Diwali School Holiday 2026: दिवाली पर बिहार में लंबी छुट्टी, झारखंड-UP में भी स्कूल रहेंगे बंद; जानें बंगाल का पूरा शेड्यूल

Diwali School Holiday 2026: दिवाली आने वाली है और इसके साथ ही स्कूली बच्चों की मौज भी शुरू होने वाली है। त्योहारों के इस मौसम में छात्रों को पढ़ाई से कुछ दिनों का ब्रेक मिलने जा रहा है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में नवंबर के दौरान स्कूलों में छुट्टियां रहेंगी। खास बात यह है कि बिहार के सरकारी स्कूलों के कैलेंडर में दिवाली से लेकर छठ पूजा तक लंबा अवकाश दिया गया है। ऐसे में छात्र और अभिभावक अभी से अपनी छुट्टियों की योजना बना सकते हैं। बिहार में 7 से 17 नवंबर तक स्कूलों में अवकाश (Diwali School Holiday 2026) बिहार के सरकारी स्कूलों के लिए जारी 2026 के अवकाश कैलेंडर में दिवाली, चित्रगुप्त पूजा, भैया दूज और छठ पूजा को मिलाकर 7 नवंबर से 17 नवंबर तक छुट्टियों का समय निर्धारित किया गया है। कैलेंडर में इस अवधि के लिए कुल 10 अवकाश दर्ज हैं। दिवाली 8 नवंबर को है। इसके बाद भैया दूज, चित्रगुप्त पूजा और छठ पूजा के चलते भी स्कूलों में छुट्टी रहेगी। इस तरह बिहार के सरकारी स्कूलों के बच्चों को त्योहारों के दौरान लंबा ब्रेक मिलने वाला है। हालांकि, छुट्टियों की गिनती और स्कूल खुलने की तारीख के लिए संबंधित स्कूल का कैलेंडर जरूर देखना चाहिए। झारखंड में दिवाली से छठ तक इन तारीखों पर छुट्टी (Diwali School Holiday 2026) झारखंड में भी नवंबर का महीना छात्रों के लिए खास रहने वाला है। झारखंड एकेडमिक काउंसिल के कैलेंडर के अनुसार 8 नवंबर को दिवाली, 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भैया दूज या चित्रगुप्त पूजा के अवसर पर अवकाश रहेगा। इसके बाद छठ पूजा के लिए 16 और 17 नवंबर को छुट्टी निर्धारित की गई है। झारखंड में छठ पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है। ऐसे में इस दौरान स्कूलों में छुट्टियों को लेकर छात्रों और अभिभावकों में खास उत्साह है। ये भी पढ़ें- CBSE Board Exam 2027 : छठ पूजा से पहले नहीं आएगी 10वीं-12वीं की डेटशीट? जानें कब तक करना होगा इंतजार उत्तर प्रदेश में दिवाली और गोवर्धन पूजा पर बंद रहेंगे स्कूल (Diwali School Holiday 2026) उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों के कैलेंडर में भी नवंबर के दौरान कई त्योहारों पर अवकाश दिया गया है। यहां 8 नवंबर को दिवाली, 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भैया दूज व चित्रगुप्त जयंती के अवसर पर छुट्टी रहेगी।इसके अलावा 15 और 16 नवंबर को छठ पूजा और अन्य अवसरों पर वैकल्पिक या स्थानीय छुट्टियां हो सकती हैं। हालांकि, इन तारीखों पर छुट्टी का लाभ स्कूल और स्थानीय आदेश के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। पश्चिम बंगाल में काली पूजा के लिए खास छुट्टियां (Diwali School Holiday 2026) पश्चिम बंगाल में दिवाली के साथ काली पूजा का भी खास महत्व है। राज्य के अवकाश कैलेंडर के अनुसार 8 नवंबर को काली पूजा और दिवाली के अवसर पर अवकाश रहेगा। इसके अलावा 9 और 10 नवंबर को काली पूजा के लिए अतिरिक्त छुट्टियां निर्धारित की गई हैं। इसके बाद 11 और 12 नवंबर को भाई दूज से जुड़े अवकाश और 16 नवंबर को छठ पूजा के लिए अतिरिक्त छुट्टी भी कैलेंडर में दर्ज है। यानी नवंबर में यहां भी छात्रों को त्योहारों के चलते कई दिन स्कूल से छुट्टी मिलने वाली है। ये भी पढ़ें- BSF Sub-Inspector Bharti 2026: बीएसएफ में नौकरी पाने का मौका, जानें योग्यता और सैलरी छुट्टी से पहले जरूर चेक करें स्कूल का नोटिस (Diwali School Holiday 2026) दिवाली और छठ के कारण कई राज्यों में स्कूलों का शेड्यूल बदला हुआ रहेगा। हालांकि, सरकारी, निजी, CBSE और ICSE स्कूलों की छुट्टियों में अंतर हो सकता है। कुछ जगहों पर जिला प्रशासन की ओर से अलग आदेश भी जारी किए जा सकते हैं। इसलिए बच्चों और अभिभावकों को सलाह है कि छुट्टियों की योजना बनाने से पहले अपने स्कूल का आधिकारिक नोटिस जरूर देख लें। इससे स्कूल खुलने की तारीख को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
Girls Confidence Gap: स्कूल में खुश दिखती हैं लड़कियां, लेकिन अंदर ही अंदर टूट रहा आत्मविश्वास! सर्वे के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

Girls Confidence Gap: स्कूल में अच्छे नंबर लाना, हर गतिविधि में हिस्सा लेना और पढ़ाई में आगे रहना… इन सबके बावजूद क्या लड़कियां अंदर से उतनी ही आत्मविश्वासी हैं, जितनी बाहर दिखाई देती हैं? एक नई रिपोर्ट के आंकड़े कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखा रहे हैं। स्कूल में खुशी महसूस करने के मामले में लड़कियां लड़कों से आगे हैं, लेकिन जब बात खुद पर भरोसा करने, तनाव से दूर रहने और किसी काम को लेकर उत्साहित रहने की आती है, तो तस्वीर बदल जाती है। आईसी-3 इंस्टीट्यूट और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन की ओर से संयुक्त रूप से जारी ‘स्टूडेंट वेल बीइंग पल्स रिपोर्ट 2025-26’ में यह बात सामने आई है। देशभर के 8,515 विद्यार्थियों पर किए गए सर्वे में छात्राओं के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं। स्कूल में खुशी ज्यादा, लेकिन खुद पर भरोसा कम (Girls Confidence Gap) रिपोर्ट के अनुसार, करीब 62 प्रतिशत लड़कियों ने कहा कि वे स्कूल में हमेशा खुश रहती हैं। लड़कों में यह आंकड़ा 58 प्रतिशत है। पहली नजर में यह आंकड़ा छात्राओं के लिए सकारात्मक दिखाई देता है, लेकिन आत्मविश्वास की बात आते ही स्थिति बदल जाती है। ये भी पढ़ें- Diwali Essay in Hindi: दिवाली पर 10 लाइन में जानें इस त्योहार का महत्व, क्यों मनाया जाता है दीपों का पर्व? सर्वे में केवल 52 प्रतिशत लड़कियों ने बताया कि वे अक्सर या हमेशा आत्मविश्वास महसूस करती हैं। वहीं लड़कों में यह आंकड़ा 64 प्रतिशत है। इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि 22 प्रतिशत लड़कियों ने कहा कि वे कभी भी खुद को आत्मविश्वासी महसूस नहीं करतीं। लड़कों में ऐसा कहने वालों की संख्या 14 प्रतिशत रही। मानसिक शांति के मामले में भी पीछे छात्राएं (Girls Confidence Gap) आत्मविश्वास के साथ-साथ मानसिक शांति के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 42 प्रतिशत लड़कियां अक्सर या हमेशा शांत और तनावमुक्त महसूस करती हैं। वहीं लड़कों में यह संख्या 53 प्रतिशत है। करीब 28 प्रतिशत छात्राओं ने माना कि वे शायद ही कभी शांत रह पाती हैं। लड़कों में ऐसा कहने वालों का आंकड़ा 22 प्रतिशत है। यानी स्कूल में खुश रहने की बात कहने वाली कई छात्राएं तनाव और बेचैनी से भी जूझ रही हैं। मोटिवेशन में भी लड़कों से पीछे (Girls Confidence Gap) किसी काम को करने की इच्छा और उसके लिए उत्साह भी आत्मविश्वास से जुड़ा होता है। सर्वे में 55 प्रतिशत लड़कियों ने अक्सर मोटिवेटेड रहने की बात कही, जबकि लड़कों में यह आंकड़ा 61 प्रतिशत रहा। यह अंतर बताता है कि छात्राओं के लिए पढ़ाई के साथ मानसिक रूप से उत्साहित और मजबूत बने रहना भी एक चुनौती हो सकता है। ये भी पढ़ें- SSC JHT 2025 का टेंटेटिव अलॉटमेंट रिजल्ट जारी, जानिए कटऑफ और आगे का पूरा शेड्यूल चिंता और हताशा के आंकड़े भी परेशान करने वाले (Girls Confidence Gap) रिपोर्ट में नकारात्मक भावनाओं को लेकर भी अंतर सामने आया है। करीब 33 प्रतिशत लड़कियों ने अक्सर या हमेशा चिंता महसूस करने की बात कही, जबकि लड़कों में यह आंकड़ा 23 प्रतिशत रहा। इसी तरह 36 प्रतिशत छात्राओं ने बार-बार हताश महसूस करने की बात स्वीकार की। लड़कों में यह संख्या 28 प्रतिशत रही। छात्राओं में कम ऊर्जा और उदासी की शिकायतें भी अधिक दर्ज की गईं। अच्छे नंबर ही नहीं, बच्चों का मन समझना भी जरूरी (Girls Confidence Gap) इस रिपोर्ट के आंकड़े स्कूलों और अभिभावकों के लिए सोचने वाली बात हैं। बच्चों की सफलता को केवल नंबरों और परीक्षा के प्रदर्शन से नहीं मापा जा सकता। उनके मन में क्या चल रहा है, वे कितना तनाव महसूस करते हैं और खुद पर कितना भरोसा करते हैं, इस पर भी ध्यान देना जरूरी है।
PowerGrid Recruitment 2026: सरकारी कंपनी में नौकरी का शानदार मौका! पावरग्रिड में निकलीं 319 इंजीनियर ट्रेनी की भर्तियां

PowerGrid Recruitment 2026: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे इंजीनियरिंग पास युवाओं के लिए अच्छी खबर है। पावरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (PowerGrid) ने इंजीनियर ट्रेनी के 319 पदों पर भर्ती निकाली है। खास बात यह है कि इस भर्ती में इलेक्ट्रिकल, सिविल और कंप्यूटर साइंस ब्रांच के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया 3 नवंबर 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार 18 नवंबर 2026 तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। अगर आपके पास GATE 2026 का स्कोरकार्ड है, तो यह मौका आपके लिए खास हो सकता है। किस ब्रांच में कितनी हैं वैकेंसी? (PowerGrid Recruitment 2026) पावरग्रिड की इस भर्ती के तहत कुल 319 पद भरे जाएंगे। अलग-अलग इंजीनियरिंग ब्रांच के लिए पदों की संख्या भी तय की गई है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग: 250 पद सिविल इंजीनियरिंग: 48 पद कंप्यूटर साइंस: 21 पद कुल पद: 319 सबसे ज्यादा वैकेंसी इलेक्ट्रिकल ब्रांच के लिए रखी गई हैं। वहीं सिविल और कंप्यूटर साइंस के उम्मीदवारों के लिए भी सरकारी कंपनी में नौकरी पाने का अच्छा अवसर है। ये भी पढ़ें- BSF HC RO RM Answer Key 2026: बीएसएफ हेड कॉन्स्टेबल परीक्षा की आंसर-की कल होगी जारी, इस तरह कर सकेंगे डाउनलोड कौन कर सकता है आवेदन? (PowerGrid Recruitment 2026) इन पदों के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में फुल टाइम BE, BTech या BSc इंजीनियरिंग की डिग्री होनी चाहिए। डिग्री में कम से कम 60 प्रतिशत अंक या इसके बराबर CGPA होना जरूरी है। इसके अलावा उम्मीदवार के पास GATE 2026 का वैध स्कोरकार्ड होना चाहिए। इलेक्ट्रिकल पदों के लिए इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रिकल पावर या इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी डिग्री होनी चाहिए। सिविल पदों के लिए सिविल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस पदों के लिए कंप्यूटर साइंस, कंप्यूटर इंजीनियरिंग या इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की डिग्री रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। उम्र सीमा भी जान लें (PowerGrid Recruitment 2026) पावरग्रिड इंजीनियर ट्रेनी भर्ती के लिए उम्मीदवार की अधिकतम उम्र 28 वर्ष होनी चाहिए। उम्र की गणना 11 मई 2026 के आधार पर की जाएगी। SC, ST, OBC और अन्य पात्र आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। कैसे होगा उम्मीदवारों का चयन? (PowerGrid Recruitment 2026) इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन GATE 2026 के स्कोर के आधार पर किया जाएगा। इसके बाद शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया के अगले चरणों में शामिल होना पड़ सकता है। इसमें ग्रुप डिस्कशन और पर्सनल इंटरव्यू शामिल हैं। इसके बाद जरूरी दस्तावेजों की जांच और मेडिकल प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसलिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को अपने सभी जरूरी प्रमाणपत्र तैयार रखने चाहिए। कितनी देनी होगी आवेदन फीस? (PowerGrid Recruitment 2026) आवेदन करने वाले सामान्य, OBC और EWS वर्ग के उम्मीदवारों को 500 रुपये फीस जमा करनी होगी। वहीं SC, ST, PwBD और विभागीय उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से छूट दी गई है। ये भी पढ़ें- SSC GD Final Answer Key 2026: एसएससी ने जारी की फाइनल आंसर की, 17 नवंबर तक डाउनलोड कर सकेंगे रिस्पॉन्स शीट 18 नवंबर से पहले ऐसे करें आवेदन (PowerGrid Recruitment 2026) पावरग्रिड इंजीनियर ट्रेनी भर्ती के लिए आवेदन करने का तरीका काफी आसान है। 1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट powergrid.in पर जाएं। 2. वेबसाइट पर Careers या Job Opportunities सेक्शन खोलें। 3. Engineer Trainee Recruitment 2026 के लिंक पर क्लिक करें। 4. GATE 2026 से जुड़ी जानकारी और मांगे गए विवरण भरें। 5. जरूरी दस्तावेज और प्रमाणपत्र अपलोड करें। 6. अपनी कैटेगरी के अनुसार आवेदन शुल्क जमा करें। 7. फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट या कॉपी सुरक्षित रख लें। आवेदन से पहले नोटिफिकेशन जरूर पढ़ें
Foreign MBBS Rules 2026: विदेश में MBBS का सपना कहीं न बन जाए मुसीबत! NMC के जवाबों ने बढ़ाया कन्फ्यूजन

Foreign MBBS Rules: विदेश में MBBS करके भारत में डॉक्टर बनने का सपना देख रहे छात्रों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। जॉर्जिया जैसे देशों में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के बीच नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अलग-अलग जवाबों ने असमंजस बढ़ा दिया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं लाखों रुपये खर्च करके की गई पढ़ाई बाद में भारत में डॉक्टर बनने की राह में रुकावट न बन जाए। ऐसे में एडमिशन लेने से पहले विदेशी मेडिकल डिग्री से जुड़े नियमों को समझना बेहद जरूरी है। NMC के दो जवाबों ने क्यों बढ़ाई परेशानी? (Foreign MBBS Rules) पूरा विवाद तब सामने आया, जब दो छात्रों ने प्रधानमंत्री ग्रीवांस पोर्टल पर एक ही सवाल पूछा। वे जानना चाहते थे कि जॉर्जिया से छह साल का MBBS कोर्स पूरा करने वाले छात्र भारत में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) देने के योग्य होंगे या नहीं। 24 सितंबर को NMC ने 2021 के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि विदेशी मेडिकल डिग्री की मान्यता के लिए संबंधित देश में कोर्स पूरा करने के बाद स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने का लाइसेंस मिलने की शर्त (Foreign MBBS Rules) अहम है। ये भी पढ़ें- High Court Recruitment 2026: 8वीं पास युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का मौका, बिना लिखित परीक्षा चयन, 21 नवंबर तक करें आवेदन लेकिन 13 अक्टूबर को इसी सवाल पर आयोग ने कहा कि स्वतंत्र लाइसेंसिंग व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों की जांच सक्षम अधिकारी और विशेषज्ञ समिति कर रही है। जब एक अन्य छात्र ने दोनों जवाबों के बीच अंतर पर स्पष्टीकरण मांगा, तो आयोग ने फिर 2021 के नियमों का हवाला दिया। इससे छात्रों के मन में सवाल उठने लगे कि आखिर किस जवाब को अंतिम माना जाए। एजेंटों के दावों पर भरोसा करना पड़ सकता है भारी (Foreign MBBS Rules) इस उलझन के बीच एजुकेशन कंसल्टेंट की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। मेडिकल मामलों के जानकार वकील सचिन जैन के अनुसार, कुछ कंसल्टेंट NMC के अलग-अलग जवाबों का हवाला देकर छात्रों को भरोसा दिला रहे हैं कि स्वतंत्र लाइसेंस की शर्त हट सकती है या कोई दूसरा रास्ता निकल सकता है। हालांकि, केवल ऐसे दावों के आधार पर एडमिशन लेना जोखिम भरा हो सकता है। नियमों में बदलाव का फैसला संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है। इसलिए छात्रों को किसी एजेंट के वादे के बजाय आधिकारिक नियमों और लिखित जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। जॉर्जिया के नियम भी बढ़ा रहे हैं सवाल (Foreign MBBS Rules) जॉर्जिया के नेशनल सेंटर फॉर एजुकेशन क्वालिटी एन्हांसमेंट (NCEQE) की जानकारी से भी विवाद जुड़ा है। वहां के विवरण के मुताबिक, मेडिकल प्रोग्राम पूरा करने वाले छात्र जूनियर डॉक्टर के रूप में काम कर सकते हैं, लेकिन स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने के लिए अतिरिक्त शर्तें लागू हो सकती हैं। ये भी पढ़ें- CAT Exam 2026: MBA उम्मीदवार तैयार रहें, 4 नवंबर को आएगा एडमिट कार्ड, जानें डाउनलोड करने का पूरा तरीका यही अंतर भारतीय छात्रों के लिए अहम है, क्योंकि भारत में विदेशी मेडिकल डिग्री की पात्रता तय करते समय संबंधित नियमों और लाइसेंसिंग शर्तों को पूरा करना जरूरी हो सकता है। एडमिशन से पहले क्या करें छात्र? (Foreign MBBS Rules) कानूनी विशेषज्ञों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और NMC से स्पष्ट दिशानिर्देश तथा पात्र विदेशी मेडिकल संस्थानों की आधिकारिक सूची जारी करने की मांग की है। छात्रों को सलाह है कि किसी भी विदेशी विश्वविद्यालय में दाखिला लेने से पहले NMC के मौजूदा नियम, संबंधित देश में मिलने वाले लाइसेंस और भारत में लागू पात्रता शर्तों की पुष्टि करें।
UPTET 2027: फरवरी में फिर लगेगी परीक्षा की तारीख? हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने तेज की तैयारी

UPTET 2027: उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी खबर है। यूपीटीईटी (UPTET) परीक्षा को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने नई परीक्षा कराने की तैयारी शुरू कर दी है। खबर है कि फरवरी के आखिरी सप्ताह में एक बार फिर यूपीटीईटी का आयोजन किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो लंबे समय से परीक्षा का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। खास बात यह है कि इस बार परीक्षा का फायदा सिर्फ कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों को नहीं, बल्कि सभी योग्य उम्मीदवारों को मिल सकता है। आयोग जल्द ही परीक्षा का प्रस्तावित कार्यक्रम हाईकोर्ट के सामने पेश करने वाला है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने तेज की तैयारी (UPTET 2027) यूपीटीईटी परीक्षा (UPTET 2027) को लेकर यह पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ तक पहुंचा था। वसीम अहमद की अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आयोग से यूपीटीईटी का प्रस्तावित परीक्षा कार्यक्रम मांगा था। कोर्ट के निर्देश के बाद आयोग ने नई परीक्षा की रूपरेखा तैयार कर ली है। अब इस कार्यक्रम को हाईकोर्ट के सामने रखा जाएगा। इसके बाद आवेदन और परीक्षा की तारीखों को लेकर आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद है। ये भी पढ़ें- Cost of Studying Abroad: विदेश में पढ़ाई का सपना पड़ेगा कितना भारी? इन 5 देशों में BA की फीस सुनकर उड़ जाएंगे होश! फिलहाल फरवरी के अंतिम सप्ताह में परीक्षा कराने की तैयारी की खबर सामने आई है। हालांकि, अभ्यर्थियों को आधिकारिक तारीखों का इंतजार करना होगा। 3 नवंबर को होगी विशेष टीईटी परीक्षा (UPTET 2027) आयोग की ओर से फिलहाल 3 नवंबर को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की जा रही है। यह परीक्षा प्रदेश के छह मंडल मुख्यालयों में बनाए गए 131 केंद्रों पर होगी। इनमें आगरा, गोरखपुर, लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज और वाराणसी शामिल हैं। इस विशेष परीक्षा में करीब 1.06 लाख सेवारत शिक्षक और स्पेशल एजुकेटर्स शामिल होंगे। इसके बाद करीब चार महीने के भीतर दूसरी यूपीटीईटी परीक्षा कराने की तैयारी है। इस परीक्षा में सामान्य अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने का मौका मिलेगा। यानी जो युवा लंबे समय से यूपीटीईटी का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए यह एक अहम अवसर हो सकता है। TGT अभ्यर्थियों को भी मिलेगी राहत (UPTET 2027) यूपीटीईटी की प्रस्तावित परीक्षा से टीजीटी अभ्यर्थियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक, 23 और 24 दिसंबर को होने वाली टीजीटी परीक्षा के अभ्यर्थियों को टीईटी पास करने के लिए 30 जून 2027 तक का समय दिया गया है। ऐसे में फरवरी में प्रस्तावित यूपीटीईटी परीक्षा उनके लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। बीएड और डीएलएड पास युवाओं को भी इस परीक्षा से अपने शिक्षक बनने के सपने को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा। अब साल में दो बार होगी UPTET परीक्षा? (UPTET 2027) यूपीटीईटी को लेकर सबसे बड़ा बदलाव आने वाले वर्षों में देखने को मिल सकता है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की गाइडलाइन के मुताबिक टीईटी परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जानी चाहिए। हालांकि, उत्तर प्रदेश में 2011 के बाद से परीक्षा नियमित रूप से साल में दो बार नहीं हो सकी। अब आयोग ने भविष्य में हर साल जुलाई और जनवरी में परीक्षा कराने की योजना बनाई है। ये भी पढ़ें- रेलवे भर्ती बोर्ड प्रयागराज का बड़ा अपडेट, NTPC अंडर ग्रेजुएट CBT-2 का स्कोर कार्ड और कट-ऑफ जारी अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे उन युवाओं को भी फायदा होगा जो किसी कारण से एक परीक्षा में शामिल नहीं हो पाते हैं। UPTET अभ्यर्थी अब क्या करें? (UPTET 2027) फिलहाल अभ्यर्थियों को आयोग की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए। परीक्षा का पूरा कार्यक्रम हाईकोर्ट में पेश होने के बाद आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा की तारीखों को लेकर स्थिति साफ हो सकती है। उम्मीदवारों को सलाह है कि वे अपनी तैयारी जारी रखें और आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाले नोटिस पर नजर बनाए रखें।
Cost of Studying Abroad: विदेश में पढ़ाई का सपना पड़ेगा कितना भारी? इन 5 देशों में BA की फीस सुनकर उड़ जाएंगे होश!

Cost of Studying Abroad: विदेश में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी चुनौती कॉलेज में एडमिशन लेना नहीं, बल्कि उसका खर्च उठाना है। अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन तक कई ऐसे देश हैं, जहां पढ़ाई के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। हैरानी की बात यह है कि यहां सिर्फ मेडिकल और इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि BA जैसी सामान्य ग्रेजुएशन डिग्री हासिल करना भी जेब पर भारी पड़ सकता है। ऐसे में विदेश जाने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इन देशों में पढ़ाई का खर्च जानना बेहद जरूरी है। 1. अमेरिका में पढ़ाई के लिए खर्च करने होंगे करोड़ों रुपये (Cost of Studying Abroad) विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने की बात हो तो अमेरिका का नाम सबसे पहले आता है। यहां की यूनिवर्सिटीज में पढ़ने का सपना लाखों भारतीय छात्र देखते हैं, लेकिन इसकी फीस सुनकर कई परिवारों का बजट बिगड़ सकता है।अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सालाना ट्यूशन फीस लगभग 20,000 से 45,000 अमेरिकी डॉलर तक हो सकती है। भारतीय रुपये में यह करीब 20 लाख से 40 लाख रुपये के आसपास बैठती है। अमेरिका में BA की डिग्री आमतौर पर चार साल की होती है। ऐसे में सिर्फ कॉलेज की फीस पर ही लगभग 80 लाख से 1.6 करोड़ रुपये या उससे अधिक खर्च हो सकते हैं। अगर रहने, खाने और आने-जाने का खर्च भी जोड़ दिया जाए तो कुल बजट और बढ़ जाता है। न्यूयॉर्क और लॉस एंजेलिस जैसे शहरों में रहना भी काफी महंगा पड़ सकता है। ये भी पढ़ें- Seva First Innovation Challenge 2026: रजिस्ट्रेशन की तारीख बढ़ी, अब 6 नवंबर तक मौका 2. ऑस्ट्रेलिया में भी कम नहीं है पढ़ाई का खर्च (Cost of Studying Abroad) भारतीय छात्रों के बीच ऑस्ट्रेलिया भी काफी लोकप्रिय है। यहां अच्छी यूनिवर्सिटीज और पढ़ाई के कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए फीस काफी ज्यादा हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया में सालाना ट्यूशन फीस लगभग 20,000 से 45,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक हो सकती है। भारतीय मुद्रा में यह करीब 15 लाख से 30 लाख रुपये के बराबर है। तीन साल की BA डिग्री के लिए सिर्फ ट्यूशन फीस का खर्च करीब 45 लाख से 90 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। इसके अलावा रहने, खाने और स्वास्थ्य बीमा का खर्च अलग से उठाना पड़ता है। 3. ब्रिटेन में तीन साल की डिग्री भी पड़ेगी महंगी (Cost of Studying Abroad) ब्रिटेन यानी यूनाइटेड किंगडम भारतीय छात्रों के पसंदीदा देशों में शामिल है। यहां कई प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज हैं, जहां दुनिया भर से छात्र पढ़ने आते हैं। ब्रिटेन में बैचलर डिग्री की सालाना फीस लगभग 15 लाख से 25 लाख रुपये तक हो सकती है। ज्यादातर अंडरग्रेजुएट कोर्स तीन साल के होते हैं। इस हिसाब से केवल ट्यूशन फीस पर 45 लाख से 75 लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं। लंदन जैसे बड़े शहरों में रहने और खाने का खर्च जोड़ने के बाद सालाना बजट 30 लाख रुपये से भी ऊपर जा सकता है। 4. कनाडा में भी भारतीय छात्रों को करना होगा बड़ा खर्च (Cost of Studying Abroad) कनाडा को भारतीय छात्र पढ़ाई और करियर के लिहाज से एक अच्छा विकल्प मानते हैं। हालांकि, यहां भी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए शिक्षा सस्ती नहीं है। कनाडा में सालाना ट्यूशन फीस करीब 15 लाख से 25 लाख रुपये तक हो सकती है। इसके अलावा किराया, खाना, ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य से जुड़े खर्च भी बजट में शामिल करने पड़ते हैं। रहने के खर्च के लिए तय वित्तीय जरूरतों को पूरा करना भी छात्रों के लिए जरूरी है। ये भी पढ़ें- Government Jobs 2026: रेलवे और यूपी में 3,984 पदों पर भर्ती, आवेदन की पूरी जानकारी 5. न्यूजीलैंड में पढ़ाई के साथ रहने का खर्च भी भारी (Cost of Studying Abroad) न्यूजीलैंड भी विदेशी छात्रों के बीच लोकप्रिय विकल्प है। यहां पढ़ाई के लिए छात्रों को ट्यूशन फीस के साथ स्वास्थ्य बीमा और रहने का खर्च भी उठाना पड़ता है। अनुमान के मुताबिक, शिक्षा और स्वास्थ्य बीमा समेत सालाना खर्च करीब 16 लाख से 25 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। शहर और यूनिवर्सिटी के हिसाब से यह रकम बदल सकती है। विदेश जाने से पहले जरूर बनाएं पूरा बजट (Cost of Studying Abroad) विदेश में पढ़ाई करने का फैसला सिर्फ यूनिवर्सिटी की फीस देखकर नहीं लेना चाहिए। छात्रों को ट्यूशन फीस के साथ रहने, खाने, स्वास्थ्य बीमा, ट्रांसपोर्ट और वीजा से जुड़े खर्चों का भी हिसाब लगाना चाहिए। इसके अलावा यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप, फीस में छूट और दूसरे आर्थिक सहायता विकल्पों की जानकारी भी लेनी चाहिए। सही प्लानिंग के साथ विदेश में पढ़ाई का सपना पूरा करना आसान हो सकता है।
CBSE Class 9 Syllabus 2026-27: 9वीं के छात्रों के लिए बड़ा बदलाव! हटाए गए ये विषय, 10वीं बोर्ड में भी बदलेंगे परीक्षा के नियम

CBSE Class 9 Syllabus 2026-27: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की पढ़ाई और परीक्षा से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत कुछ विषयों को पाठ्यक्रम से बाहर रखा गया है, जबकि स्किल एजुकेशन को अनिवार्य बनाया गया है। इतना ही नहीं, 2027-28 में जब यही छात्र कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब उनकी बोर्ड परीक्षा का तरीका भी पहले से अलग होगा। ऐसे में छात्रों और अभिभावकों के लिए इन बदलावों को समझना बेहद जरूरी है। CBSE ने किन विषयों को पाठ्यक्रम से हटाया? (CBSE Class 9 Syllabus 2026-27) CBSE के 29 अक्टूबर 2026 के सर्कुलर के मुताबिक, कक्षा 9 के नए बैच के लिए इंटर-डिसिप्लिनरी एरिया को अध्ययन योजना में शामिल नहीं किया जाएगा। इसमें ‘Individuals in Society’ और ‘Computational Thinking and Artificial Intelligence’ जैसे मॉड्यूल शामिल थे। इसके अलावा, पर्यावरण शिक्षा (Environmental Education) भी इन छात्रों के 2027-28 के कक्षा 10 पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं होगी। बोर्ड ने बताया है कि इन बदलावों का उद्देश्य नए पाठ्यक्रम को तय समय के अनुसार लागू करना है। कक्षा 9 में अब स्किल एजुकेशन अनिवार्य (CBSE Class 9 Syllabus 2026-27) नई योजना में व्यावसायिक शिक्षा यानी Vocational Education को अनिवार्य रखा गया है। छात्रों को ‘कौशल विकास’ या CBSE की ओर से मान्यता प्राप्त 22 स्किल विषयों में से किसी एक को चुनना होगा। इन विषयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, रिटेल, आईटी, बैंकिंग, पर्यटन, कृषि, हेल्थकेयर, ऑटोमोटिव, ब्यूटी एंड वेलनेस और मल्टीमीडिया जैसे विकल्प शामिल हैं। ये भी पढ़ें- ONGC Apprentice Recruitment 2026: ओएनजीसी में 3,047 पदों पर निकली भर्ती, 10वीं से ग्रेजुएट तक कर सकते हैं आवेदन इसका मकसद छात्रों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर भविष्य में काम आने वाली स्किल्स से भी जोड़ना है। 2027-28 में कक्षा 10 के छात्रों को देने होंगे 5 अनिवार्य पेपर (CBSE Class 9 Syllabus 2026-27) नए नियमों के अनुसार, मौजूदा कक्षा 9 के छात्रों को अगले सत्र में कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा पांच अनिवार्य विषयों में देनी होगी। इनमें शामिल हैं: 1. भाषा R1 2. भाषा R2 3. गणित 4. विज्ञान 5. सामाजिक विज्ञान इसके अलावा छात्र अपनी पसंद के अनुसार Mathematics Advanced, Science Advanced या 22 स्किल विषयों में से किसी एक की परीक्षा भी दे सकते हैं। कौशल विकास और स्किल विषय में क्या है अंतर? (CBSE Class 9 Syllabus 2026-27) CBSE ने कौशल विकास और 22 स्किल विषयों के लिए अलग-अलग मूल्यांकन व्यवस्था रखी है। अगर छात्र कौशल विकास चुनते हैं, तो उनका मूल्यांकन स्कूल के स्तर पर होगा। इसमें अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। कम से कम 33 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्रों को स्कूल की ओर से प्रमाण पत्र मिलेगा। वहीं, 22 स्किल विषयों में से किसी एक को चुनने वाले छात्रों को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा देनी होगी। उनके अंक CBSE की मार्कशीट में दर्ज होंगे और सफल छात्रों को NSQF प्रमाण पत्र भी मिलेगा। 10वीं में पास होने के लिए कितने अंक जरूरी? (CBSE Class 9 Syllabus 2026-27) नए नियमों के तहत छात्रों को पांचों अनिवार्य विषयों में कम से कम 33 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। इसमें लिखित परीक्षा और इंटरनल असेसमेंट के अंकों को मिलाकर परिणाम तैयार किया जाएगा। फेल होने पर भी मिल सकता है एक मौका (CBSE Class 9 Syllabus 2026-27) नई योजना में विषय बदलने का विकल्प भी दिया गया है। अगर कोई छात्र 22 स्किल विषयों में से किसी एक में पास है, लेकिन गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान में फेल हो जाता है, तो तय शर्तों के तहत स्किल विषय के अंकों से उस विषय की जगह ली जा सकती है। हालांकि, यह सुविधा कौशल विकास चुनने वाले छात्रों को नहीं मिलेगी। भाषा के मामले में भी कुछ शर्तों के साथ वैकल्पिक भाषा से विषय बदलने का प्रावधान है। ये भी पढ़ें- UP TET 2026 पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोबारा जारी होगा रिजल्ट, फेल अभ्यर्थियों को मिलेगी राहत 57 वैकल्पिक विषयों में से भी कर सकेंगे चुनाव (CBSE Class 9 Syllabus 2026-27) कक्षा 9 के छात्र 57 वैकल्पिक विषयों की सूची में से एक अतिरिक्त विषय चुन सकते हैं। इसमें भारतीय और विदेशी भाषाएं, संगीत, पेंटिंग, गृह विज्ञान, NCC, कंप्यूटर एप्लीकेशन और अकाउंटेंसी जैसे विकल्प शामिल हैं। Mathematics Advanced और Science Advanced भी वैकल्पिक विषयों में उपलब्ध हैं। किन छात्रों पर लागू होंगे नए नियम? (CBSE Class 9 Syllabus 2026-27) CBSE की संशोधित अध्ययन योजना 2026-27 में कक्षा 9 में पढ़ने वाले छात्रों पर लागू होगी। यही नियम उनके 2027-28 में कक्षा 10 में पहुंचने पर भी जारी रहेंगे। वहीं, जो छात्र अभी 2026-27 में कक्षा 10 में पढ़ रहे हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उनकी पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा पहले से लागू नियमों के अनुसार ही होगी।
Highest Paying Engineering Jobs: AI के दौर में इन 5 इंजीनियरिंग जॉब्स की है जबरदस्त डिमांड! जानें कौन-सी स्किल्स दिलाएंगी मोटी कमाई

Highest Paying Engineering Jobs: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने से नौकरियों की दुनिया तेजी से बदल रही है। कई ऐसे काम हैं जिन्हें अब मशीनें आसानी से कर रही हैं, लेकिन दूसरी तरफ कुछ नई नौकरियां ऐसी भी पैदा हो रही हैं, जिनकी कंपनियों में जबरदस्त मांग है। खास बात यह है कि इन नौकरियों में अच्छी स्किल्स रखने वाले युवाओं को लाखों से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का सालाना पैकेज मिल सकता है। अगर आप इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं या टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो ये पांच जॉब प्रोफाइल आपके लिए खास हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि आखिर कौन-सी हैं ये नौकरियां और इनमें कितनी कमाई का मौका मिल सकता है। 1. फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर (FDE) (Highest Paying Engineering Jobs) AI के दौर में फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर एक तेजी से उभरता हुआ करियर बन रहा है। इनका काम कंपनियों की समस्याओं को समझकर AI और दूसरी तकनीकों की मदद से उनका समाधान तैयार करना होता है। स्केलर-सीएमआर की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 88 फीसदी भारतीय कंपनियां मानती हैं कि 2030 तक इस प्रोफाइल की मांग बढ़ेगी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस क्षेत्र के 80 फीसदी इंजीनियरों का सालाना पैकेज 40 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच है। इसके लिए IIT हैदराबाद और Scaler जैसे संस्थानों के प्रोग्राम मददगार हो सकते हैं। ये भी पढ़ें- CBSE Board Exam 2028: 10वीं के छात्रों के लिए बदलने वाला है परीक्षा पैटर्न, एक विषय में फेल होने पर भी मिलेगा राहत का विकल्प! 2. AI और मशीन लर्निंग इंजीनियर (Highest Paying Engineering Jobs) AI और मशीन लर्निंग इंजीनियर ऐसे सिस्टम तैयार करते हैं, जो डेटा से सीखकर खुद फैसले लेने में सक्षम होते हैं। आज बैंकिंग, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में इनकी जरूरत बढ़ रही है। 2026 की टैलेंट इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में AI प्रोफेशनल्स की मांग और उपलब्ध टैलेंट के बीच बड़ा अंतर है। इसी वजह से इस क्षेत्र में सैलरी बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत हैं। Google Machine Learning Crash Course और DeepLearning.AI से इस क्षेत्र की शुरुआत की जा सकती है। 3. सॉफ्टवेयर और क्लाउड आर्किटेक्ट (Highest Paying Engineering Jobs) जब किसी ऐप या वेबसाइट पर लाखों लोग एक साथ आते हैं, तब भी उसका बिना रुके काम करना जरूरी होता है। यही जिम्मेदारी क्लाउड आर्किटेक्ट की होती है। ये ऐसे डिजिटल सिस्टम तैयार करते हैं, जो ज्यादा ट्रैफिक और डेटा को आसानी से संभाल सकें। 2026 की सैलरी गाइड के अनुसार, 3 से 7 साल का अनुभव रखने वाले क्लाउड आर्किटेक्ट 20 से 30 लाख रुपये सालाना तक कमा सकते हैं। वहीं अनुभवी प्रोफेशनल्स का पैकेज 45 से 60 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। ये भी पढ़ें- Student Motivation: दूसरों की सफलता देखकर क्यों जलता है मन? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती! 4. बिग डेटा स्पेशलिस्ट और डेटा इंजीनियर (Highest Paying Engineering Jobs) आज कंपनियों के पास ग्राहकों से जुड़ा करोड़ों डेटा मौजूद है। इस डेटा को संभालना और उससे काम की जानकारी निकालना आसान नहीं होता। डेटा इंजीनियर इसी काम के लिए सिस्टम तैयार करते हैं। टेक हायरिंग से जुड़े आंकड़ों में डेटा इंजीनियरिंग की मांग लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। बेंगलुरु जैसे टेक हब में इस प्रोफाइल का औसत सालाना पैकेज करीब 22 लाख रुपये बताया गया है। इस क्षेत्र के लिए SQL, Python और Google Cloud जैसी तकनीकों की जानकारी फायदेमंद है। 5. ब्लॉकचेन और साइबर सिक्योरिटी इंजीनियर (Highest Paying Engineering Jobs) डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ रहा है। ऐसे में कंपनियों को साइबर सिक्योरिटी इंजीनियरों की जरूरत है, जो उनके सिस्टम और जरूरी डेटा को सुरक्षित रख सकें। वहीं ब्लॉकचेन इंजीनियर सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क तैयार करते हैं। डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कई कंपनियां आज भी कुशल साइबर सुरक्षा कर्मचारियों की कमी से जूझ रही हैं। इस क्षेत्र में IIT दिल्ली और IIT मद्रास के ट्रेनिंग प्रोग्राम विकल्प हो सकते हैं। सिर्फ डिग्री नहीं, ये स्किल्स बनाएंगी करोड़पति! (Highest Paying Engineering Jobs) इन पांचों करियर में कमाई की संभावनाएं जरूर शानदार हैं, लेकिन सिर्फ डिग्री के दम पर करोड़ों का पैकेज मिलना आसान नहीं है। इसके लिए प्रैक्टिकल नॉलेज, प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अनुभव और लगातार नई तकनीक सीखना जरूरी है।
UP TET 2026: हाई कोर्ट के फैसले से अभ्यर्थियों को बड़ी राहत! दो सवाल हटे, अब बदलेगा रिजल्ट; जानिए किसे मिलेगा फायदा

UP TET 2026: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP TET) 2026 के अभ्यर्थियों के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट से अहम फैसला आया है। कोर्ट ने परीक्षा के प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया है। खास बात यह है कि इस फैसले का लाभ सिर्फ याचिका दाखिल करने वाले चार अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समान स्थिति वाले सभी उम्मीदवारों को मिलेगा। इससे कई अभ्यर्थियों के अंकों और पात्रता पर असर पड़ सकता है। प्रश्न 36 और 37 को मूल्यांकन से हटाने का आदेश (UP TET 2026) इलाहाबाद हाई कोर्ट की एकलपीठ ने कानपुर नगर के विजय सोनकर और तीन अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने की। अदालत ने कहा कि प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। अंतिम उत्तर कुंजी में इन दोनों सवालों के दो-दो विकल्प सही माने गए थे। कोर्ट के आदेश के बाद अब प्रश्नपत्र का मूल्यांकन 150 के बजाय 148 प्रश्नों के आधार पर किया जाएगा। अर्हता का मानक निर्धारित प्रतिशत के हिसाब से तय होगा। चार अभ्यर्थियों को क्यों नहीं मिले थे अंक? (UP TET 2026) याचिकाकर्ताओं ने 3 जुलाई 2026 को दूसरी पाली में यूपी टीईटी की परीक्षा दी थी। 26 अगस्त 2026 को परिणाम घोषित हुआ, जिसमें चारों के सामान्यीकृत अंक निर्धारित 82 अंकों से कम थे। उनके अंक क्रमशः 81.39, 81.32, 80.40 और 80.94 थे। प्रोविजनल उत्तर कुंजी में प्रश्न 36 और 37 का सही जवाब केवल विकल्प (डी) बताया गया था। लेकिन अंतिम उत्तर कुंजी में प्रश्न 36 के लिए विकल्प (बी) और (डी), जबकि प्रश्न 37 के लिए (ए) और (डी) को सही मान लिया गया। ये भी पढ़ें- CBSE का बड़ा बदलाव! 10वीं में अब नहीं पढ़ना होगा पर्यावरण शिक्षा, जानिए कौन-से विषय हटे और किनकी बढ़ी अहमियत आयोग ने इन विकल्पों में से कोई एक चुनने वाले अभ्यर्थियों को अंक दिए। याचिकाकर्ताओं ने इनमें से कोई विकल्प नहीं चुना था, इसलिए उन्हें इन सवालों के अंक नहीं मिले। इसी फैसले को चुनौती देते हुए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने सभी समान अभ्यर्थियों को दिया लाभ (UP TET 2026) हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि राहत केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगी। जिन अभ्यर्थियों की स्थिति समान है, उन्हें भी इसका फायदा मिलेगा। आयोग को निर्देश दिया गया है कि याचिकाकर्ताओं के अंकों की दोबारा गणना कर परिणाम और स्कोरकार्ड में जरूरी सुधार किया जाए। ये भी पढ़ें- AIIMS Fellowship Programme January 2027: एम्स में 93 सीटों पर एडमिशन, 11 नवंबर तक करें आवेदन; दिसंबर में परीक्षा कोर्ट ने यह भी कहा कि जब किसी सवाल के दो विकल्प सही मान लिए जाते हैं, तो वह प्रश्न सही और गलत जानकारी रखने वाले अभ्यर्थियों के बीच अंतर करने का आधार नहीं रह जाता। ऐसे में केवल संयोग से सही विकल्प चुनने वालों को अंक देना उचित नहीं है। प्रश्न 38 हटने का भी कोर्ट ने किया जिक्र (UP TET 2026) अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि इसी परीक्षा में आयोग पहले ही प्रश्न संख्या 38 को मूल्यांकन से हटा चुका था। ऐसे में प्रश्न 36 और 37 के साथ अलग व्यवहार करने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं था। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस फैसले से किसी भी अभ्यर्थी को भविष्य की भर्ती में नियुक्ति या चयन का स्वतः अधिकार नहीं मिलेगा। राहत केवल यूपी टीईटी 2026 के परिणाम में सुधार और उससे जुड़ी पात्रता तक सीमित रहेगी। मामले में याचियों की ओर से अधिवक्ता अंकिता सिंह और तनिया पांडेय पेश हुईं, जबकि प्रतिवादियों की ओर से स्थायी अधिवक्ता शिव कुमार सिंह और उदयन नंदन ने पक्ष रखा।
CBSE का बड़ा बदलाव! 10वीं में अब नहीं पढ़ना होगा पर्यावरण शिक्षा, जानिए कौन-से विषय हटे और किनकी बढ़ी अहमियत

New Delhi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए विषयों की योजना में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत शैक्षणिक सत्र 2027-28 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को अब पर्यावरण शिक्षा नहीं पढ़नी होगी। इसके साथ ही बोर्ड ने अनिवार्य विषयों, वैकल्पिक विषयों और कौशल शिक्षा को लेकर भी नई व्यवस्था तय की है। इसका असर आने वाले सत्रों में विद्यार्थियों की पढ़ाई और विषयों के चुनाव पर पड़ेगा। 10वीं में पांच विषयों की होगी अनिवार्य बोर्ड परीक्षा CBSE के नए नियमों के अनुसार, सत्र 2027-28 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए पांच विषय अनिवार्य होंगे। इनमें पहली भाषा (आर-1), दूसरी भाषा (आर-2), गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान शामिल हैं। सभी विद्यार्थियों को इन पांचों विषयों की परीक्षा देनी होगी। इसके अलावा विद्यार्थी एक वैकल्पिक विषय चुन सकेंगे। इसके लिए बोर्ड (CBSE) ने 57 विषयों की सूची दी है। विद्यार्थी चाहें तो वैकल्पिक उन्नत गणित, उन्नत विज्ञान या व्यावसायिक शिक्षा के तहत 22 कौशल विषयों में से भी किसी एक का चुनाव कर सकते हैं। 9वीं के पाठ्यक्रम से भी हटाए गए विषय बोर्ड ने वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में भी बदलाव किया है। अब इनके पाठ्यक्रम से ‘इंडिविजुअल्स इन सोसाइटी’ विषय और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (सीटी) एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का मॉड्यूल हटा दिया गया है।ये बदलाव अंतरविषयी क्षेत्र को लागू करने की तय समय-सारणी के अनुसार किए गए हैं। हालांकि, जो विद्यार्थी अभी 10वीं में पढ़ रहे हैं, उन पर नई व्यवस्था लागू नहीं होगी। उनके लिए पुरानी विषय योजना ही जारी रहेगी। कौशल शिक्षा होगी अनिवार्य: CBSE CBSE ने कौशल शिक्षा को अनिवार्य रखा है। विद्यार्थी कौशल विकास विषय या बोर्ड की ओर से अधिसूचित 22 कौशल विषयों में से किसी एक को चुन सकते हैं। इन विकल्पों में सूचना प्रौद्योगिकी, एआई, डाटा साइंस, स्वास्थ्य देखभाल, कृषि, बैंकिंग एवं बीमा, पर्यटन, खुदरा कारोबार, सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर और डिजाइन थिंकिंग एवं नवाचार शामिल हैं। ये भी पढ़ें- AEES Recruitment 2026: शिक्षक बनने का मौका, 254 पदों पर भर्ती; 2 नवंबर से शुरू होंगे आवेदन कौशल विकास विषय चुनने वाले विद्यार्थियों का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होगा। इसके लिए बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। वहीं, 22 कौशल विषयों में से किसी एक को चुनने वाले विद्यार्थियों को 10वीं में उसकी बोर्ड परीक्षा देनी होगी। पास होने पर अंक और ग्रेड अंकतालिका में दर्ज होंगे। साथ ही राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा। एक विषय में फेल होने पर मिल सकता है दूसरा मौका बोर्ड ने विषय प्रतिस्थापन यानी सब्जेक्ट रिप्लेसमेंट का प्रावधान भी स्पष्ट किया है। अगर कोई विद्यार्थी गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में से किसी एक विषय में 33 प्रतिशत अंक हासिल नहीं कर पाता, लेकिन चुने गए कौशल विषय में पास हो जाता है, तो तय नियमों के तहत कौशल विषय से उस अनुत्तीर्ण विषय को बदला जा सकता है। हालांकि, यह सुविधा कौशल विकास विषय चुनने वालों को नहीं मिलेगी। इसी तरह पहली या दूसरी भाषा में से किसी एक में 33 प्रतिशत अंक नहीं आने पर वैकल्पिक भाषा में पास होने की स्थिति में निर्धारित शर्तों के अनुसार विषय बदला जा सकता है। विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग व्यवस्था विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को एक अनिवार्य भाषा पढ़नी होगी, जिसकी बोर्ड परीक्षा होगी। बाकी चार बोर्ड परीक्षा वाले विषयों के लिए वे गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अन्य भाषा, संगीत, चित्रकला, गृह विज्ञान, व्यवसाय के तत्व, बहीखाता एवं लेखांकन, कंप्यूटर अनुप्रयोग और कौशल विषयों में से नियमों के अनुसार चुनाव कर सकेंगे। वे अधिकतम दो कौशल विषय भी चुन सकते हैं। हालांकि, सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर अनुप्रयोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को एक साथ चुनने की अनुमति नहीं होगी। ये भी पढ़ें- AIIMS में मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा मौका! 34 स्पेशलाइजेशन में 93 सीटों पर निकली फेलोशिप, 11 नवंबर तक करें आवेदन कला और शारीरिक शिक्षा में मिलेंगे ग्रेड (CBSE) कक्षा 10वीं में कला शिक्षा और शारीरिक शिक्षा एवं कल्याण का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा। इन विषयों में अंकों की जगह ग्रेड दिए जाएंगे। भाषा-तीन और कौशल विकास का आंतरिक मूल्यांकन भी स्कूल स्तर पर होगा। कौशल विकास में कम से कम 33 प्रतिशत अंक पाने वाले विद्यार्थियों को स्कूल की ओर से प्रमाणपत्र दिया जाएगा। नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस की पूर्व अध्यक्ष सुधा आचार्य के अनुसार, पांच अनिवार्य बोर्ड परीक्षा विषयों की व्यवस्था से विद्यार्थियों पर अनावश्यक परीक्षा दबाव कम करने और सीखने पर अधिक ध्यान देने में मदद मिल सकती है। उनके मुताबिक, कौशल शिक्षा में विकल्प और विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग प्रावधान व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाते हैं।