Foreign MBBS Rules: विदेश में MBBS करके भारत में डॉक्टर बनने का सपना देख रहे छात्रों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। जॉर्जिया जैसे देशों में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के बीच नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अलग-अलग जवाबों ने असमंजस बढ़ा दिया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं लाखों रुपये खर्च करके की गई पढ़ाई बाद में भारत में डॉक्टर बनने की राह में रुकावट न बन जाए। ऐसे में एडमिशन लेने से पहले विदेशी मेडिकल डिग्री से जुड़े नियमों को समझना बेहद जरूरी है।
NMC के दो जवाबों ने क्यों बढ़ाई परेशानी? (Foreign MBBS Rules)
पूरा विवाद तब सामने आया, जब दो छात्रों ने प्रधानमंत्री ग्रीवांस पोर्टल पर एक ही सवाल पूछा। वे जानना चाहते थे कि जॉर्जिया से छह साल का MBBS कोर्स पूरा करने वाले छात्र भारत में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) देने के योग्य होंगे या नहीं।
24 सितंबर को NMC ने 2021 के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि विदेशी मेडिकल डिग्री की मान्यता के लिए संबंधित देश में कोर्स पूरा करने के बाद स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने का लाइसेंस मिलने की शर्त (Foreign MBBS Rules) अहम है।
लेकिन 13 अक्टूबर को इसी सवाल पर आयोग ने कहा कि स्वतंत्र लाइसेंसिंग व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों की जांच सक्षम अधिकारी और विशेषज्ञ समिति कर रही है। जब एक अन्य छात्र ने दोनों जवाबों के बीच अंतर पर स्पष्टीकरण मांगा, तो आयोग ने फिर 2021 के नियमों का हवाला दिया। इससे छात्रों के मन में सवाल उठने लगे कि आखिर किस जवाब को अंतिम माना जाए।
एजेंटों के दावों पर भरोसा करना पड़ सकता है भारी (Foreign MBBS Rules)
इस उलझन के बीच एजुकेशन कंसल्टेंट की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। मेडिकल मामलों के जानकार वकील सचिन जैन के अनुसार, कुछ कंसल्टेंट NMC के अलग-अलग जवाबों का हवाला देकर छात्रों को भरोसा दिला रहे हैं कि स्वतंत्र लाइसेंस की शर्त हट सकती है या कोई दूसरा रास्ता निकल सकता है।
हालांकि, केवल ऐसे दावों के आधार पर एडमिशन लेना जोखिम भरा हो सकता है। नियमों में बदलाव का फैसला संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है। इसलिए छात्रों को किसी एजेंट के वादे के बजाय आधिकारिक नियमों और लिखित जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
जॉर्जिया के नियम भी बढ़ा रहे हैं सवाल (Foreign MBBS Rules)
जॉर्जिया के नेशनल सेंटर फॉर एजुकेशन क्वालिटी एन्हांसमेंट (NCEQE) की जानकारी से भी विवाद जुड़ा है। वहां के विवरण के मुताबिक, मेडिकल प्रोग्राम पूरा करने वाले छात्र जूनियर डॉक्टर के रूप में काम कर सकते हैं, लेकिन स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने के लिए अतिरिक्त शर्तें लागू हो सकती हैं।
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यही अंतर भारतीय छात्रों के लिए अहम है, क्योंकि भारत में विदेशी मेडिकल डिग्री की पात्रता तय करते समय संबंधित नियमों और लाइसेंसिंग शर्तों को पूरा करना जरूरी हो सकता है।
एडमिशन से पहले क्या करें छात्र? (Foreign MBBS Rules)
कानूनी विशेषज्ञों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और NMC से स्पष्ट दिशानिर्देश तथा पात्र विदेशी मेडिकल संस्थानों की आधिकारिक सूची जारी करने की मांग की है। छात्रों को सलाह है कि किसी भी विदेशी विश्वविद्यालय में दाखिला लेने से पहले NMC के मौजूदा नियम, संबंधित देश में मिलने वाले लाइसेंस और भारत में लागू पात्रता शर्तों की पुष्टि करें।