Comscore Analytics
Section-Specific Split Button

CBSE का बड़ा बदलाव! 10वीं में अब नहीं पढ़ना होगा पर्यावरण शिक्षा, जानिए कौन-से विषय हटे और किनकी बढ़ी अहमियत

cbse
CBSE ने विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का पैटर्न बदला (Img: AI Generated)

New Delhi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए विषयों की योजना में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत शैक्षणिक सत्र 2027-28 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को अब पर्यावरण शिक्षा नहीं पढ़नी होगी। इसके साथ ही बोर्ड ने अनिवार्य विषयों, वैकल्पिक विषयों और कौशल शिक्षा को लेकर भी नई व्यवस्था तय की है। इसका असर आने वाले सत्रों में विद्यार्थियों की पढ़ाई और विषयों के चुनाव पर पड़ेगा।

10वीं में पांच विषयों की होगी अनिवार्य बोर्ड परीक्षा

CBSE के नए नियमों के अनुसार, सत्र 2027-28 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए पांच विषय अनिवार्य होंगे। इनमें पहली भाषा (आर-1), दूसरी भाषा (आर-2), गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान शामिल हैं। सभी विद्यार्थियों को इन पांचों विषयों की परीक्षा देनी होगी।

इसके अलावा विद्यार्थी एक वैकल्पिक विषय चुन सकेंगे। इसके लिए बोर्ड (CBSE) ने 57 विषयों की सूची दी है। विद्यार्थी चाहें तो वैकल्पिक उन्नत गणित, उन्नत विज्ञान या व्यावसायिक शिक्षा के तहत 22 कौशल विषयों में से भी किसी एक का चुनाव कर सकते हैं।

9वीं के पाठ्यक्रम से भी हटाए गए विषय

बोर्ड ने वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में भी बदलाव किया है। अब इनके पाठ्यक्रम से ‘इंडिविजुअल्स इन सोसाइटी’ विषय और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (सीटी) एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का मॉड्यूल हटा दिया गया है।ये बदलाव अंतरविषयी क्षेत्र को लागू करने की तय समय-सारणी के अनुसार किए गए हैं। हालांकि, जो विद्यार्थी अभी 10वीं में पढ़ रहे हैं, उन पर नई व्यवस्था लागू नहीं होगी। उनके लिए पुरानी विषय योजना ही जारी रहेगी।

कौशल शिक्षा होगी अनिवार्य: CBSE

CBSE ने कौशल शिक्षा को अनिवार्य रखा है। विद्यार्थी कौशल विकास विषय या बोर्ड की ओर से अधिसूचित 22 कौशल विषयों में से किसी एक को चुन सकते हैं। इन विकल्पों में सूचना प्रौद्योगिकी, एआई, डाटा साइंस, स्वास्थ्य देखभाल, कृषि, बैंकिंग एवं बीमा, पर्यटन, खुदरा कारोबार, सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर और डिजाइन थिंकिंग एवं नवाचार शामिल हैं।

ये भी पढ़ें- AEES Recruitment 2026: शिक्षक बनने का मौका, 254 पदों पर भर्ती; 2 नवंबर से शुरू होंगे आवेदन

कौशल विकास विषय चुनने वाले विद्यार्थियों का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होगा। इसके लिए बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। वहीं, 22 कौशल विषयों में से किसी एक को चुनने वाले विद्यार्थियों को 10वीं में उसकी बोर्ड परीक्षा देनी होगी। पास होने पर अंक और ग्रेड अंकतालिका में दर्ज होंगे। साथ ही राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।

एक विषय में फेल होने पर मिल सकता है दूसरा मौका

बोर्ड ने विषय प्रतिस्थापन यानी सब्जेक्ट रिप्लेसमेंट का प्रावधान भी स्पष्ट किया है। अगर कोई विद्यार्थी गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में से किसी एक विषय में 33 प्रतिशत अंक हासिल नहीं कर पाता, लेकिन चुने गए कौशल विषय में पास हो जाता है, तो तय नियमों के तहत कौशल विषय से उस अनुत्तीर्ण विषय को बदला जा सकता है। हालांकि, यह सुविधा कौशल विकास विषय चुनने वालों को नहीं मिलेगी।

इसी तरह पहली या दूसरी भाषा में से किसी एक में 33 प्रतिशत अंक नहीं आने पर वैकल्पिक भाषा में पास होने की स्थिति में निर्धारित शर्तों के अनुसार विषय बदला जा सकता है।

विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग व्यवस्था

विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को एक अनिवार्य भाषा पढ़नी होगी, जिसकी बोर्ड परीक्षा होगी। बाकी चार बोर्ड परीक्षा वाले विषयों के लिए वे गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अन्य भाषा, संगीत, चित्रकला, गृह विज्ञान, व्यवसाय के तत्व, बहीखाता एवं लेखांकन, कंप्यूटर अनुप्रयोग और कौशल विषयों में से नियमों के अनुसार चुनाव कर सकेंगे। वे अधिकतम दो कौशल विषय भी चुन सकते हैं। हालांकि, सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर अनुप्रयोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को एक साथ चुनने की अनुमति नहीं होगी।

ये भी पढ़ें- AIIMS में मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा मौका! 34 स्पेशलाइजेशन में 93 सीटों पर निकली फेलोशिप, 11 नवंबर तक करें आवेदन

कला और शारीरिक शिक्षा में मिलेंगे ग्रेड (CBSE)

कक्षा 10वीं में कला शिक्षा और शारीरिक शिक्षा एवं कल्याण का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा। इन विषयों में अंकों की जगह ग्रेड दिए जाएंगे। भाषा-तीन और कौशल विकास का आंतरिक मूल्यांकन भी स्कूल स्तर पर होगा। कौशल विकास में कम से कम 33 प्रतिशत अंक पाने वाले विद्यार्थियों को स्कूल की ओर से प्रमाणपत्र दिया जाएगा।

नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस की पूर्व अध्यक्ष सुधा आचार्य के अनुसार, पांच अनिवार्य बोर्ड परीक्षा विषयों की व्यवस्था से विद्यार्थियों पर अनावश्यक परीक्षा दबाव कम करने और सीखने पर अधिक ध्यान देने में मदद मिल सकती है। उनके मुताबिक, कौशल शिक्षा में विकल्प और विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग प्रावधान व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाते हैं।

Previous Post
Next Post

Advertisement

कैटेगरी

Advertisement

error: Content is protected !!