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TET परीक्षा के दिन रोड शो बना युवाओं की राह में रोड़ा, अभ्यर्थी परीक्षा से वंचित, आखिर किसकी जिम्मेदारी?

Budaun: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा TET के आयोजन के दिन बदायूं में लगे भीषण जाम ने कई अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा दिया। रोड शो के कारण शहर के मुख्य मार्गों पर कई घंटों तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। नतीजा, कई जिलों से परीक्षा देने आए कई अभ्यर्थी समय पर परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके और उनकी परीक्षा छूट गई।

छह साल बाद हुई परीक्षा

गौरतलब है कि UPTET का आयोजन लगभग छह साल के लंबे अंतराल के बाद हो रहा था। प्रदेश भर के लाखों युवाओं के लिए यह परीक्षा शिक्षक बनने का एकमात्र रास्ता है। अभ्यर्थियों ने बताया कि वे सुबह 5 बजे घर से निकले थे ताकि समय से केंद्र पहुंच सकें। मगर बदायूं शहर में घुसते ही सिविल लाइंस, कचहरी रोड और नवादा चौराहे पर किलोमीटर लंबा जाम मिला।

एंबुलेंस तक जाम में फंसी दिखीं। कई अभ्यर्थी गाड़ियों से उतरकर 4-5 किलोमीटर पैदल भागे, फिर भी गेट बंद होने के बाद ही केंद्र पहुंच पाए।

अभ्यर्थियों का छलका दर्द

बरेली से आई छात्रा प्रीति शर्मा ने रोते हुए कहा, “छह साल से इसी दिन का इंतजार कर रही थी। कोचिंग, किताबें, रात-रात भर जागकर तैयारी की। घर से 4 बजे निकली थी। सब बेकार हो गया।” शाहजहांपुर के छात्र ने बताया, “प्रशासन को पता था आज TET है। फिर रोड शो की अनुमति क्यों दी? क्या नेताओं का कार्यक्रम हमारे भविष्य से बड़ा है?”

प्रशासन पर उठे सवाल

अभ्यर्थियों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के दिन रूट डायवर्जन और ट्रैफिक प्लान पहले से जारी करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रोड शो के कारण सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त रही।

मांग: निष्पक्ष जांच और दोबारा परीक्षा का मौका

इस घटना के बाद अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश है। मांग उठ रही है कि
1. जाम के कारण परीक्षा से वंचित रहे सभी अभ्यर्थियों का चिन्हीकरण कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
2. प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए अलग से पुनर्परीक्षा आयोजित की जाए, ताकि उनकी मेहनत बेकार न जाए।
3. भविष्य में UPSC, UPPSC, TET जैसी किसी भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा के दिन राजनीतिक रैली, रोड शो या यातायात बाधित करने वाले आयोजनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

युवाओं का कहना है कि जब सरकार एक दिन में चुनाव करवा सकती है, तो एक दिन के लिए राजनीतिक कार्यक्रम स्थगित क्यों नहीं कर सकती? प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण किसी युवा का सालों का परिश्रम और भविष्य दांव पर लगाना पूरी तरह अन्याय है। अब सबकी निगाहें प्रदेश सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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