विजय सोनकर समेत चार अभ्यर्थियों की याचिका पर फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने विजय सोनकर और तीन अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। दरअसल, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 3 जुलाई को प्राथमिक स्तर की UPTET 2026 परीक्षा आयोजित की थी। इसके बाद 26 अगस्त को परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया था। परिणाम जारी होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि मास्टर सेट के दो सवालों में एक से अधिक विकल्पों को सही मानने के बावजूद सभी अभ्यर्थियों को समान तरीके से अंक नहीं दिए गए। इसी विवाद को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा था।
दो सवालों में दो-दो विकल्प माने गए थे सही
विवाद की शुरुआत आयोग की ओर से जारी फाइनल आंसर की के बाद हुई। इसमें मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 और 37 के लिए दो-दो विकल्पों को सही माना गया था। हालांकि, मूल्यांकन के दौरान आयोग ने केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को अंक दिए, जिन्होंने ओएमआर शीट में उन दो मान्य विकल्पों में से किसी एक को चुना था। वहीं, जिन अभ्यर्थियों ने इन सवालों के दूसरे विकल्प चुने थे या प्रश्नों को छोड़ दिया था, उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। इसी व्यवस्था को अभ्यर्थियों ने असमान बताते हुए चुनौती दी थी।
एक-दो नंबर से फेल अभ्यर्थियों को मिल सकती है राहत
याचिका में बताया गया कि सामान्य और ओबीसी वर्ग के जिन अभ्यर्थियों के पासिंग मार्क्स 82 अंक निर्धारित थे, उनमें कई ऐसे छात्र थे जो महज एक या डेढ़ अंक से परीक्षा में अनुत्तीर्ण रह गए थे। विवादित सवालों के मूल्यांकन का असर उनके परिणाम पर पड़ सकता था। हाईकोर्ट ने माना कि जब किसी ऑब्जेक्टिव परीक्षा में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था खुद एक सवाल के दो अलग-अलग उत्तरों को सही मानती है, तो उस प्रश्न की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में उस सवाल के आधार पर अभ्यर्थियों के बीच योग्य और अयोग्य का अंतर करना उचित नहीं होगा। इसलिए दोनों विवादित प्रश्नों को मूल्यांकन से हटाने का फैसला लिया गया।
148 प्रश्नों के आधार पर बनेगा नया रिजल्ट
हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि प्रश्न संख्या 36 और 37 को हटाकर पूरी परीक्षा का मूल्यांकन 148 प्रश्नों के आधार पर किया जाए। इसके बाद निर्धारित प्रतिशत के अनुसार नए पासिंग मार्क्स तय किए जाएंगे। आयोग को सभी समान रूप से प्रभावित अभ्यर्थियों के अंकों की दोबारा गणना करके संशोधित परिणाम और नई स्कोरकार्ड जारी करनी होगी। हालांकि, कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि UPTET उत्तीर्ण करने से अभ्यर्थियों को केवल शिक्षक भर्ती के लिए पात्रता मिलेगी। इससे किसी भी आगामी भर्ती में सीधे नौकरी पाने का अधिकार नहीं मिलेगा। ऐसे में अब अभ्यर्थियों की नजर आयोग की ओर से जारी होने वाले रिवाइज्ड रिजल्ट पर टिकी है।