UP PET 2026: उत्तर प्रदेश प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) 2026 में शामिल होने जा रहे लाखों अभ्यर्थियों की मुश्किलें परीक्षा से पहले ही बढ़ गई हैं। किसी को घर से 520 किलोमीटर दूर परीक्षा देने जाना है, तो किसी को 650 किलोमीटर का सफर तय करके केंद्र तक पहुंचना होगा। ऐसे में अभ्यर्थियों के सामने समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने, यात्रा का खर्च उठाने और लंबी दूरी की थकान से निपटने की चुनौती खड़ी हो गई है। दूर-दराज के शहरों में केंद्र मिलने से नाराज उम्मीदवार अब परीक्षा केंद्र बदलने की मांग कर रहे हैं। वहीं, पीईटी और पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तारीख एक होने से भी अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ गई है।
520 से 650 किलोमीटर दूर मिले UP PET 2026 परीक्षा केंद्र
पीईटी 2026 के परीक्षा केंद्रों के आवंटन को लेकर कई अभ्यर्थियों ने अपनी परेशानी सामने रखी है। जौनपुर के एक उम्मीदवार को करीब 520 किलोमीटर दूर मैनपुरी में परीक्षा देनी होगी। वहीं, प्रयागराज के एक अभ्यर्थी को लगभग 650 किलोमीटर दूर गाजियाबाद में केंद्र आवंटित किया गया है। इसके अलावा प्रतापगढ़ के एक उम्मीदवार को फिरोजाबाद और पीलीभीत के एक अभ्यर्थी को बिजनौर में परीक्षा केंद्र मिला है।
इन मामलों के सामने आने के बाद परीक्षा केंद्रों की दूरी और आवंटन व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी के बीच इतनी लंबी यात्रा की व्यवस्था करना आसान नहीं है। कई उम्मीदवारों को परीक्षा से एक दिन पहले ही घर से निकलना पड़ सकता है।
यात्रा का खर्च और थकान बढ़ाएगी परेशानी
दूर परीक्षा केंद्र मिलने का असर UP PET 2026 अभ्यर्थियों की जेब और तैयारी, दोनों पर पड़ सकता है। लंबी दूरी तय करने के लिए ट्रेन या बस का टिकट बुक करना होगा। अगर सीधे परिवहन की सुविधा नहीं मिली, तो रास्ते में वाहन भी बदलना पड़ सकता है। वहीं, कंफर्म रेल टिकट मिलना भी उम्मीदवारों के लिए चुनौती बन सकता है। यात्रा के अलावा खाने-पीने और जरूरत पड़ने पर होटल में ठहरने का खर्च भी उठाना पड़ सकता है। सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवारों के अभ्यर्थियों पर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। महिला उम्मीदवारों के लिए लंबी दूरी की यात्रा के दौरान सुरक्षा और समय पर केंद्र तक पहुंचने की चिंता भी अहम है। इसके साथ ही सफर की थकान परीक्षा के दिन उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।
आयोग ने बताई केंद्र दूर मिलने की वजह
परीक्षा केंद्रों के आवंटन पर उठ रहे सवालों के बीच आयोग की ओर से बताया गया है कि केंद्रों का निर्धारण कंप्यूटर आधारित व्यवस्था से किया गया है। आयोग के मुताबिक, पूर्वांचल के कुछ जिलों में अभ्यर्थियों की संख्या अधिक है, जबकि वहां परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता सीमित है। दूसरी ओर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में परीक्षा केंद्र अपेक्षाकृत अधिक उपलब्ध हैं। इसी अंतर के कारण कुछ अभ्यर्थियों को दूसरे शहरों में परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं। हालांकि, लंबी दूरी से परेशान उम्मीदवारों को अब इस मामले में राहत मिलने की उम्मीद है।
पीईटी और पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तारीख टकराई
UP PET 2026 के अभ्यर्थियों की दूसरी बड़ी चिंता परीक्षा की तारीखों को लेकर है। नगीना से सांसद चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने कहा कि 25 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की पीईटी और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा एक ही दिन निर्धारित होने से उन उम्मीदवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है, जिन्होंने दोनों परीक्षाओं के लिए आवेदन किया है। चंद्रशेखर के मुताबिक, पीईटी परीक्षा की तारीखें पहले से प्रस्तावित थीं, जबकि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने बाद में पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए 25 अक्टूबर की तारीख घोषित की। उन्होंने यह भी कहा कि पीईटी के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के परीक्षा भवन को भी केंद्र बनाया गया है। इसके बावजूद उसी दिन पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। सांसद ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तारीख बदलने की मांग की है। उनका कहना है कि तारीखों के टकराव के कारण किसी भी अभ्यर्थी का एक परीक्षा देने का अवसर नहीं छूटना चाहिए।
35.41 लाख अभ्यर्थियों के लिए होगी UP PET 2026 परीक्षा
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की UP PET 2026 परीक्षा के लिए करीब 35.41 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। परीक्षा 25 और 30 अक्टूबर तथा 1 नवंबर 2026 को आयोजित की जानी है। इसके लिए प्रदेश के 60 जिलों में 1,372 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा तीन दिनों तक प्रतिदिन दो पालियों में होगी। फिलहाल अभ्यर्थियों की नजर परीक्षा केंद्रों की दूरी को लेकर मिलने वाली राहत और पीईटी-पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तारीखों के टकराव के समाधान पर है। उम्मीदवार चाहते हैं कि ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे उन्हें लंबी यात्रा और अतिरिक्त खर्च की परेशानी से राहत मिले। साथ ही, दोनों परीक्षाओं के लिए आवेदन करने वाले किसी भी अभ्यर्थी को तारीखों के टकराव के कारण अपना एक अवसर गंवाना न पड़े।








