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ज्वलंत मुद्दाः आरक्षण के साथ और बिना आरक्षण, इन दो हिस्सों में बंटा भारत

भारत इस समय दो हिस्सों में बंटा हुआ, जिसमें एक आरक्षण के साथ है, जबकि एक बिना आरक्षण के। आज के समय में ये युवाओं के लिए एक अहम मुद्दा बना हुआ है, फिर चाहे बात नौकरी से जुड़ी हुई हो या पढ़ाई। पढ़ें युवा डाइनामाइट की ये विशेष खबर.. नई दिल्लीः आज के समय में देश में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर फैसला का इंतजार पूरा भारत कर रहा है। इन्हीं मुद्दों में से एक है आरक्षण का मुद्दा। संविधान की पांचवी अनुसूची में शेड्यूल ट्राइब्स परिषद के अंतर्गत शेड्यूल ट्राइब्स को विशेष अधिकार प्राप्त है। आरक्षण जैसी नीतियां सिर्फ भारत में नहीं और भी काफी देशों में हैं, जहां रंग, भाषा, धर्म के आधार पर आरक्षण दिया जाता है। आरक्षण इसलिए दिया जाता है कि जिन लोगों से उनकी पहचान के आधार पर भेदभाव करते हुए उनके अधिकारों से वंचित रखा गया हो, उनको मुख्यधारा में लाया जा सके। भारत में इस वक्त इस चीज को लेकर बहस रही है कि मेडिकल जैसी फिल्ड से (ओबीसी) के आरक्षण के कितने सीट हैं और असल में उन्हें कितनी सीटें दी जा रही हैं।

ज्वलंत मुद्दाः कोरोना का चीन और अमेरिका पर प्रभाव

एक तरफ कोरोना के कारण पूरी दुनिया संकट में है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर अमेरिका और चीन में भी पलटवार शुरू हो गया है। एक तरफ अमेरिका चीन पर कोरोना फैलाने का आरोप लगा रहा है, वहीं चीन भी अमेरिका को जवाब देने से पीछे नहीं हट रहा है। पढ़ें युवा डाइनामाइट विशेष.. नई दिल्लीः कोरोना वायरस ने अपनी चपेट में अब तक लाखों लोगों को लिया है। दुनिया का अधिकतर हिस्सों में कोरोना का कहर जारी है। इन दिनों चीन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का गुस्सा और जलन सातवें आसमान पर है। कोरोना के बहाने वो इसका खुलकर इज़हार कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर चीन भी अमेरिका को जवाब देने से बाज नहीं आ रहा है। इस महामारी के बादल छटने के बाद दुनिया की तस्वीर ही बदल जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका का सुपरपॉवर का तमगा भी छिन सकता है और दुनिया का पॉवर सेंटर वेस्ट से ईस्ट की तरफ हो जाए यानी चीन की तरफ। क्योंकि मौजूदा हालात को देखते हुए साफ है कि कोरोना से बचने के लिए दुनिया चीन की शरण में जा रही है।

ज्वलंत मुद्दाः नौकरी ढूंढते समय युवा इन बातों का रखें खास ध्यान

इस समय देश में नौकरी की काफी मार चल रही है। ऐसे में कई युवा नौकरी की तलाश कर रहे हैं। नौकरी ढूंढ रहे हैं। नौकरी ढूंढते समय कई युवा कुछ गलतियां कर बैठते है, जिससे बाद में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। युवा डाइनामाइट पर जानिए नौकरी ढूंढते समय कुछ खास बातें.. नई दिल्लीः बाजार की मौजूदा स्थितियों में बड़ी संख्या में लोग नौकरी गंवा रहे हैं। नौकरी न मिलने का एक और कारण जॉब सेलेक्शन की प्रक्रिया में कुछ गलतियां भी कर देते हैं। जानिए नौकरी ढूंढते समय कुछ खास बातों का। आप कहां और कैसे जॉब सर्च करते हैं, यह महत्वपूर्ण है। अगर आप आंख मूंदकर अनाप-शनाप तरीके से सीवी भेजते हैं या संस्थानों के कभी-कभार वैकेंसी के लिए चेक करते हैं तो नौकरी मिलने के आसार कम ही हैं। नौकरी की तलाश में अच्छा नेटवर्क काफी कारगर साबित हो सकता है। केवल नौकरी चले जाने पर ही नेटवर्क से संपर्क नहीं साधना चाहिए। नौकरी तलाशने की छटपटाहट में ज्यादातर लोगों को अपनी योग्यता से मिलता-जुलता जो भी पहला विकल्प दिखता, वे उसके लिए अप्लाई कर देते हैं। इससे उनकी कंज्यूजन का पता लगता है।

ज्वलंत मुद्दाः भ्रष्टाचार की गहरी होती जड़.. कैसे लगे अंकुश?

भारत में भ्रष्टाचार का एक प्रमुख विषय रहा है। आजादी केबाद से ही भारत भ्रष्टाचार के दलदल में धंसा नजर आने लगा है। 21 दिसम्बर 1963 को भारत में भ्रष्टाचार के खात्मे पर संसद में हुई बहस में डॉ राममनोहर लोहिया ने जो भाषण दिया था वह आज भी प्रासंगिक है। उस वक्त डॉ लोहिया ने कहा था सिंहासन और व्यापार के बीच संबंध भारत में जितना दूषित, भ्रष्ट और बेईमान हो गया है उतना दुनिया के इतिहास में कहीं नहीं हुआ है। ऐसे में अब ये सवाल उठता है कि आखिर भ्रष्टाचार की इस बढ़ती जड़ को कैसे रोका जाए। पढ़ें युवा डाइनामाइट विशेष.. नई दिल्लीः भ्रष्टाचार से देश की अर्थव्यवस्था और प्रत्येक व्यक्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। भारत में राजनीतिक और नौकरशाही का भ्रष्टाचार बहुत ही आम माना जाता है। इसके अलावा न्यायपालिका, मीडिया, सेना, पुलिस आदि में भी भ्रष्टाचार है। शिक्षा विकास की जननी है। इसके बिना सर्वांगीण विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। लेकिन भ्रष्टाचार ने शिक्षा क्षेत्र में भी जड़ जमा लिया है। पिछले कुछ वर्षों से भारत एक नए तरह के भ्रष्टाचार का सामना कर रहा है। बड़े घपले-घोटालों के रूप में सामने आया यह भ्रष्टाचार कॉरपोरेट जगत से जुड़ा हुआ है। ऐसे में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कोई पक्का रास्ता नजर नहीं आ रहा है, पर हां एक कोशिश तो जरूर की जा सकती है। ऐसा माना जाता है कि भारत में भ्रष्टाचार के आरोपियों के लिए सजा की सीमा बहुत ही कम होती है। इसलिए भ्रष्टाचार की सजा ज्यादा से ज्यादा होनी चाहिए। अगर लोगों का परिश्रमिक उनकी जरूरतों के अनुसार होगा तो शायद भ्रष्टाचार पर लगाम लग सकती है। इन सबसे भी ज्यादा जरूरी है कि अगर हम अपने जीवन का ही मूल्य सिद्धांत ही ईमानदारी बना लें।

ज्वलंत मुद्दाः गरीबी, बेरोजगारी, युवा, आरक्षण.. क्या यही है बदलते देश की सूरत?

आज भारत में युवाओं की संख्या विश्व में सबसे अधिक है। युवाओं को देश का बेहतरीन भविष्य माना जाता है। पर क्या हो जब जिनसे हम बेहतरीन भविष्य की उम्मीद लगाए बैठे हैं उनका वर्तमान समय ही बेहद नाजुक और खराब हो। आज के समय में देश के युवाओं को सबसे ज्यादा बेरोजगारी की मार सहनी पड़ रही है। केवल बेरोजगारी ही नहीं उसके साथ गरीबी, आरक्षण जैसी भी कई परेशानियां हैं जो उसे अंदर ही अंदर कमजोर बना रहा है। नई दिल्लीः सरकार और समाज का ये मानना है कि यदि देश के युवाओं को अच्छी तरह से शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण दिया जाए तो इनको न केवल अच्छा रोजगार मिलेगा बल्कि यह देश के आर्थिक विकास में भी अच्छा योगदान दे सकते हैं। पर देश के हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। युवाओं के बीच बेरोजगारी बढ़ती चली जा रही है। जिसकी वजह से वो देश के हित के बजाय उसे नुकसान पहुंचाने वालों कामों में ज्यादा सहयोग दे रहे हैं। इनमें मुख्यरूप से आरक्षण को लेकर प्रदर्शन (मराठा, जाट और पटेल), कश्मीर में सेना पर पत्थरबाजी, ‘गो रक्षक’ के नाम पर हिंसा करते देखा गया है। अगर पिछले कुछ वर्षों के आकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि देश के आर्थिक सर्वे के अनुसार, कुल बेरोजगारी दर 2011-12 में 3.8 पर्सेंट से बढ़कर 2015-16 में 5.0 पर्सेंट हो गई है। विशेष रूप से युवाओं में बेरोजगारी दर अधिक तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान सरकार को देश की आर्थिक विकास दर से ज्यादा आज रोजगार सृजन पर ध्यान देने की जरूरत है। जिस तरह से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ‘ऑटोमेशन’ की वजह से पूरे विश्व में नौकरियों की कटौती हो रही हैं।

आखिर क्यों दिन-रात मेहनत करने के बाद भी एग्जाम हॉल में हो जाती है सिट्टी-पिट्टी गुम

नई दिल्लीः एग्जाम के समय की गई चूक से किसी भी बच्चे का पूरा साल बर्बाद हो जाता है, तो कोई छात्र प्रतियोगिता परीक्षा से बाहर हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि हम कुछ ऐसे टिप्स का भी ध्यान रखें कि आपका एग्जाम अच्छा हो सकता है। 1. पढ़ाई करते वक्त शांत वातावरण का होना जरूरी होता है। जहां तक हो सके, अकेले न पढ़ें। हो सके तो ग्रुप में ही अध्ययन करें, इससे आपको नींद नहीं आएगी व साथ मिलने से पढ़ाई में मन लगेगा। 2. पढ़ाई करते समय रट्टू तोता बनने के बजाय समझ कर पढ़ने की कोशिश करें। 3. किसी भी एग्जाम में जाने से पहले या पढ़ते समय कभी भी अपना आत्मविश्वास कम ना होने दें। किसी भी प्रकार से मन में संकोच न लाएं, नहीं तो असफलता का विचार आएगा। यदि आप में आत्मविश्वास होगा तो आप हर मुसीबतों का सामना डटकर कर सकते हैं।

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