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NCERT का बड़ा कदम! कक्षा 9वीं से 12वीं तक के बच्चे सीखेंगे AI, कोडिंग की जरूरत नहीं

School Students
प्रतीकात्मक छवि

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच स्कूली छात्रों को नई तकनीक के लिए तैयार करने की दिशा में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अहम पहल की है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक नया मॉड्यूल तैयार किया गया है। इसकी खास बात यह है कि इसे समझने के लिए छात्रों को पहले से कोडिंग या किसी तकनीकी विषय की जानकारी होना जरूरी नहीं है।

बिना कंप्यूटर और इंटरनेट के भी सीख सकेंगे AI

इस मॉड्यूल को अलग-अलग तरह के स्कूलों और संसाधनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि शहरी क्षेत्रों के आधुनिक स्कूलों से लेकर दूरदराज के गांवों के सरकारी स्कूलों तक के विद्यार्थी भी कंप्यूटेशनल थिंकिंग और AI की बुनियादी समझ विकसित कर सकें।

इसमें केवल किताबी जानकारी या रटने पर जोर देने के बजाय गतिविधियों के माध्यम से सीखने को प्राथमिकता दी गई है। छात्र आपस में चर्चा, प्रयोग और विभिन्न गतिविधियों के जरिए तकनीक के बुनियादी सिद्धांतों को समझ सकेंगे। इस तरह डिजिटल संसाधनों की कमी भी सीखने की प्रक्रिया में बाधा नहीं बनेगी।

समस्याओं को सुलझाने और रचनात्मक सोच पर जोर

कंप्यूटेशनल थिंकिंग का उद्देश्य छात्रों को किसी समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उसका समाधान खोजने की क्षमता विकसित करने में मदद करना है। नए मॉड्यूल के जरिए विद्यार्थियों को रोजमर्रा की जटिल समस्याओं को व्यवस्थित और तार्किक तरीके से हल करने के तरीके सिखाए जाएंगे।

इससे बच्चों में विश्लेषण करने, तर्क के आधार पर निर्णय लेने और नए विचार विकसित करने की क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है। AI की बुनियादी समझ उन्हें यह जानने में भी मदद करेगी कि आधुनिक तकनीक किस तरह काम करती है और अलग-अलग परिस्थितियों में उसका उपयोग कैसे किया जा सकता है।

फेक न्यूज और डेटा प्राइवेसी की भी मिलेगी जानकारी

AI सीखने के साथ उसका सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल करना भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए मॉड्यूल में डेटा प्राइवेसी, डिजिटल सुरक्षा, इंटरनेट पर फैलने वाली गलत जानकारी और AI से मिलने वाले जवाबों की विश्वसनीयता परखने जैसे विषय शामिल किए गए हैं।

विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि AI द्वारा दी गई हर जानकारी जरूरी नहीं कि सही हो। इसलिए किसी भी जवाब पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच करना और अपनी समझ का इस्तेमाल करना जरूरी है।

इस पहल का व्यापक उद्देश्य छात्रों को केवल नई तकनीक का इस्तेमाल करना सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक, जिम्मेदार और तार्किक डिजिटल नागरिक बनाना भी है। AI के दौर में ऐसी समझ विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य की चुनौतियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

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