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MBBS Seats Vacant: नीट काउंसलिंग के बाद राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली

MBBS Seats Vacant: राजस्थान के 15 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में काउंसलिंग नियमों में बदलाव के चलते एमबीबीएस की 1039 सीटें खाली रह गईं। राज्य में 86.2 प्रतिशत सीटें ही भर पाई हैं, जबकि सरकारी कॉलेजों में सभी सीटें फुल हो चुकी हैं।
MBBS Seats Vacant
MBBS Seats Vacant: राजस्थान मेडिकल कॉलेज (सोर्स- Pinterest)

New Delhi: राजस्थान के चिकित्सा शिक्षा जगत में इस बार एमबीबीएस एडमिशन प्रक्रिया को लेकर एक बड़ी चुनौती सामने आई है। नीट यूजी काउंसलिंग के तीनों राउंड पूरे होने के बावजूद राज्य के कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सैकड़ों सीटें खाली रह गई हैं। नियमों में हुए बदलाव के चलते इस साल प्रवेश का आंकड़ा पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाया है।

कुल सीटों और प्रवेश की स्थिति

इस सत्र में राजस्थान में एमबीबीएस की कुल 7,533 सीटें उपलब्ध थीं, जिनमें से 6,494 सीटों पर ही प्रवेश हो सका है। इस प्रकार राज्य में लगभग 86.2 प्रतिशत सीटें भरी हैं, जबकि 13.8 प्रतिशत यानी कुल 1,039 सीटें खाली रह गई हैं। इन रिक्त सीटों में 731 सीटें प्राइवेट जनरल मेडिकल कैटेगरी की हैं, जबकि 308 सीटें प्राइवेट मैनेजमेंट कोटे के अंतर्गत आती हैं। राहत की बात यह है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों और राजमेस (RGUHS/RAJMES) के अंतर्गत आने वाले कॉलेज पूरी तरह भर चुके हैं। इसके अलावा, बीडीएस (BDS) की सभी 1,525 सीटें भी पूरी तरह आवंटित हो चुकी हैं। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने को लेकर प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों और काउंसलिंग बोर्ड के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं।

MBBS Seats Vacant: नियमों में बदलाव और मुख्य वजह

MBBS Seats Vacant में सीटें खाली रहने का मुख्य कारण काउंसलिंग के तीसरे राउंड में लागू किए गए नए नियमों को माना जा रहा है। पिछले शैक्षणिक सत्र में, राजस्थान के मूल निवासियों की मेरिट लिस्ट पूरी होने के बाद, बचे हुए आरक्षण नियमों के तहत दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को मौका दिया जाता था।

लेकिन 2026-27 के सत्र में काउंसलिंग बोर्ड ने सूचना पुस्तिका के क्लोज 11 (XI) में संशोधन किया है। नए नियम के अनुसार, तीसरे राउंड में दूसरे राज्यों के आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को राजस्थान की स्थानीय आरक्षण व्यवस्था का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे विद्यार्थियों को केवल सामान्य वर्ग की कट-ऑफ के आधार पर ही प्रवेश दिया जा सकता है, जो इस वर्ष 213 निर्धारित की गई थी। प्राइवेट कॉलेजों का तर्क है कि इसी बदलाव की वजह से सीटें खाली रह गईं। वहीं, काउंसलिंग बोर्ड का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और राज्य सरकार की आरक्षण नीति के अनुरूप लिया गया है, जिसके तहत स्थानीय आरक्षण का लाभ केवल मूल निवासियों को ही मिल सकता है।

MBBS Seats Vacant के लिये प्रमुख कॉलेजों में खाली सीटों का विवरण

राज्य के 15 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में खाली सीटों की स्थिति इस प्रकार है-

सुधा मेडिकल कॉलेज, कोटा: 157 सीटें

जेआईईटी मेडिकल कॉलेज, जोधपुर: 151 सीटें

विकास मेडिकल कॉलेज, जोधपुर: 134 सीटें

भारत विकास मेडिकल संस्थान, कोटा: 130 सीटें

आर्य मेडिकल कॉलेज, जयपुर: 112 सीटें

पेसिफिक भीलों का बेडिया, उदयपुर: 79 सीटें

बीएस तोमर, साइंस टेक सिटी, जयपुर: 81 सीटें

जेएनयू इंस्टीट्यूट, जयपुर: 62 सीटें

डॉ. बीएस तोमर संस्थान, जगतपुरा जयपुर: 32 सीटें

प्रिंस मेडिकल कॉलेज, सीकर: 28 सीटें

अनंता इंस्टीट्यूट, राजसमंद: 26 सीटें

पैसिफिक इंस्टिट्यूट, उमर्दा, उदयपुर: 14 सीटें

डॉ. एसएस टांटिया मेडिकल कॉलेज, श्रीगंगानगर: 13 सीटें

गीतांजलि मेडिकल साइंसेज, जयपुर: 13 सीटें

गीतांजलि मेडिकल कॉलेज, उदयपुर: 7 सीटें

स्ट्रे वैकेंसी राउंड की संभावना

इन तमाम रिक्त सीटों को भरने के लिए अब काउंसलिंग बोर्ड द्वारा स्ट्रे वैकेंसी राउंड आयोजित किए जाने की संभावना है, जिसके 15 अक्टूबर के बाद शुरू होने की उम्मीद है। इस चरण में उन पात्र उम्मीदवारों को मौका मिलेगा जिन्हें शुरुआती चरणों में सीट नहीं मिल पाई थी। हालांकि, स्ट्रे वैकेंसी राउंड में सीट आवंटित होने पर उसे स्वीकार करना अनिवार्य होगा, और नियम न मानने की स्थिति में अभ्यर्थियों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

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