Gen Z Baba Education: एक युवा ‘बाबा’ (आध्यात्मिक उपदेशक) आजकल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। माथे पर तिलक, घुंघराले बाल और चेहरे पर हमेशा रहने वाली मुस्कान, उनका यह अंदाज उन्हें अन्य धार्मिक कथावाचकों से अलग बनाता है।
स्वामी शाश्वत आचार्य महाराज, जिन्होंने महज 19 साल की उम्र में ‘भागवत कथा’ सुनाना शुरू कर दिया था, उन्हें ऑनलाइन ‘जेन जेड बाबा’ (Gen Z Baba Education) और ‘पूकी बाबा’ (Pookie Baba) जैसे नाम दिए गए हैं। उनके वीडियो इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धार्मिक मंचों पर अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले ये युवा उपदेशक असल में कितने पढ़े-लिखे हैं और वे अपनी पढ़ाई कहां से कर रहे हैं?
कौन हैं ‘Gen Z बाबा’ शाश्वत आचार्य महाराज? (Gen Z Baba Education)
स्वामी शाश्वत आचार्य महाराज उत्तर प्रदेश के वृंदावन से हैं। उनका जन्म 5 अगस्त 2007 को संतों के एक परिवार में हुआ था। उनके पिता, स्वामी वृंदावन आचार्य महाराज भी आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े हैं। बचपन से ही वे भजनों, कीर्तनों और धार्मिक ग्रंथों के बीच पले-बढ़े, जिसने उन्हें बहुत कम उम्र से ही आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित किया।
आज, सोशल मीडिया पर उनकी कथाओं के वीडियो काफी लोकप्रिय हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी कम उम्र में उन्होंने युवाओं के बीच भी अपनी एक अलग पहचान बना ली है।
कितने पढ़े-लिखे हैं ये ‘Gen Z बाबा’? (Gen Z Baba Education)
बड़ा सवाल यह है कि शाश्वत आचार्य महाराज की शैक्षिक पृष्ठभूमि क्या है? मीडिया रिपोर्ट्स और उनके मामा आशुतोष शुक्ला द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, शाश्वत अभी मथुरा के गिरिराज महाराज कॉलेज से BA LLB की पढ़ाई कर रहे हैं।
दूसरे शब्दों में कहें तो, आध्यात्मिक क्षेत्र में अपना नाम बनाने के साथ-साथ वे कानून (लॉ) की पढ़ाई भी कर रहे हैं। हालांकि, उनकी कोई डिग्री पूरी हुई है या नहीं, इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने महज चार साल की उम्र में ही ‘भागवत’ सुनाना शुरू कर दिया था। शाश्वत आचार्य महाराज की कहानी का एक दिलचस्प पहलू उनके बचपन से जुड़ा है। कहा जाता है कि उन्होंने महज चार साल की उम्र में ही श्रीमद्भागवत के श्लोकों का पाठ करना शुरू कर दिया था।
जहां अन्य बच्चे अपना समय खेलने-कूदने में बिताते थे, वहीं शाश्वत का समय धार्मिक माहौल में बीता। धीरे-धीरे उनकी रुचि बढ़ती गई और वे विभिन्न मंचों पर धार्मिक प्रवचन देने और शास्त्रों की कथा सुनाने लगे। इतनी कम उम्र में शास्त्रों के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई।
ये भी पढ़ें- Rajasthan SET Result 2026: राजस्थान SET परीक्षा का रिजल्ट जारी, फाइनल आंसर-की भी हुई रिलीज, यहां से करें डाउनलोड
वृंदावन के एक मंदिर के प्रमुख (Gen Z Baba Education)
शाश्वत आचार्य महाराज केवल धार्मिक ग्रंथों के युवा कथावाचक के रूप में ही नहीं जाने जाते, बल्कि वे वृंदावन स्थित ‘श्री धाम गोदा विहार’ मंदिर के पीठाधीश्वर (प्रमुख) भी हैं। उनका पारंपरिक पहनावा, बोलने का अनूठा अंदाज और उनकी कम उम्र सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा का विषय बनी रहती है। युवा पीढ़ी ने तो उन्हें “जेन जेड बाबा” (Gen Z Baba Education) का नाम भी दे दिया है।