New Delhi: जब मैं अपने कॉलेज के दिनों को याद करती हूं, तो आंखों के सामने लाइब्रेरी की वो धूल भरी अलमारियां और घंटों तक पन्ने पलटने की मशक्कत आ जाती है। तब किसी एक असाइनमेंट या प्रोजेक्ट रिपोर्ट को बनाने के लिए तीन-चार अलग-अलग किताबों से नोट्स जुटाने पड़ते थे।
अगर रात के 11 बजे कोई डाउट आ गया, तो अगले दिन प्रोफेसर से मिलने या किसी सीनियर के कमरे का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं होता था।
लेकिन आज की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज का छात्र अपने फोन या लैपटॉप पर बस 2-4 शब्द टाइप करता है और सेकंडों में पूरा असाइनमेंट बनकर स्क्रीन पर आ जाता है।
ChatGPT, Gemini और Claude जैसे AI टूल्स ने पढ़ाई के तरीके को रातों-रात पलट कर रख दिया है। एक न्यूज ऑथर और पत्रकार के तौर पर जब मैं इस टेक-क्रांति को देखती हूं, तो मुझे इसमें जितनी सहूलियत नजर आती है, उतना ही एक बड़ा खतरा भी दिखाई देता है।
इसमें कोई दो राय नहीं कि AI आज हर स्टूडेंट का सबसे पावरफुल दोस्त बन चुका है। अगर आपको क्वांटम फिजिक्स या इकोनॉमिक्स का कोई मुश्किल नियम समझ नहीं आ रहा, तो आप AI से कह सकते हैं, “मुझे इसे 10 साल के बच्चे की तरह समझाओ” और वह तुरंत आसान उदाहरणों के साथ उसे समझा देता है। जो काम करने में पहले पूरा हफ्ता लगता था, वह अब कुछ घंटों में सिमट गया है। यहां तक कि जिन छात्रों को अंग्रेजी लिखने में हिचकिचाहट होती थी, AI उनके विचारों को सही और सटीक भाषा में ढाल रहा है।
लेकिन असली समस्या तब शुरू होती है जब सहूलियत, आलस में बदल जाती है।
आजकल मैं देख रही हूं कि ज्यादातर छात्र AI का इस्तेमाल सीखने के लिए नहीं, बल्कि केवल मेहनत से बचने के लिए कर रहे हैं। जब आप AI से कहते हैं कि “मेरे लिए इस टॉपिक पर निबंध लिख दो” और बिना पढ़े उसे कॉलेज पोर्टल पर सबमिट कर देते हैं, तो आप किसी और का नहीं, बल्कि खुद का नुकसान कर रहे होते हैं। सोचने, विश्लेषण करने और अपनी स्वतंत्र राय बनाने की जो क्षमता कॉलेज लाइफ में विकसित होनी चाहिए, वह पूरी तरह रुक जाती है।
इतना ही नहीं, AI कोई इंसान नहीं है, वह इंटरनेट के डेटा पर काम करता है और कई बार पूरी तरह से गलत तारीखें या भ्रामक आंकड़े पेश कर देता है। अगर आपने बिना जांच-परख किए उसे चिपका दिया, तो नुकसान आपका ही होगा। वैसे भी, आजकल हर यूनिवर्सिटी AI-डिटेक्टर टूल्स का इस्तेमाल कर रही है, जहाँ आपका ‘कॉपी-पेस्ट’ एक सेकंड में पकड़ा जा सकता है।
मेरा मानना है कि हमें AI से भागने की नहीं, बल्कि इसका सही इस्तेमाल सीखने की जरूरत है। AI को अपना ‘मालिक’ मत बनने दीजिए कि वह आपके बदले सोचने लगे। इसे एक स्मार्ट ‘असिस्टेंट’ की तरह इस्तेमाल कीजिए, आइडियाज लेने और डाउट्स दूर करने के लिए AI की मदद लें, लेकिन जो अंतिम रिपोर्ट या असाइनमेंट तैयार हो, उसमें आपकी अपनी भाषा, आपकी अपनी मेहनत और आपका अपना दिमाग झलकना चाहिए!
हालांकि ये विचार मेरे अपने हैं, हो सकता है की पाठक की राय इससे अलग हो। लेकिन एआई का इस्तेमाल करने से पहले इस बात का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है कि एआई हमारी सहायता के लिए है ना कि हमारी सोचने और समझने की क्षमता को पूर्ण रूप से नष्ट करने के लिए।








