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UPSC: सिविल सेवा प्री परीक्षा की डेटशीट जारी, यहां देखें पूरी डिटेल्स

संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करने का सपना देखने वाले युवाओं को यह जानकर खुशी होगी कि आयोग ने इसके लिये प्रारंभिक परीक्षा की तिथि घोषित कर दी है। जानिये, पूरा विवरण.. नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2020 की तिथी घोषित कर दी है। देश के लाखों युवा इस तिथि का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। कोरोना महामारी के चलते इसकी तिथि को आगे बढाया गया। आयोग द्वारा शुक्रवारो को घोषित अधिसूचना के मुताबिक अब इस साल-2020 के लिए यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन 4 अक्टूबर को किया जाएगा। परीक्षा कार्यक्रम पहले यह परीक्षा 31 मई 2020 को आयोजित की जाने वाली थी। लेकिन आयोग ने लॉकडाउन (Lockdown) के कारण इस स्थगित कर दिया गया था। इस परीक्षा में बैठने वाले इच्छुक युवा और उम्मीदवार आयोग की वेबसाइट upsc.gov.in पर जाकर इसका पूरा विवरण जान सकते हैं।

ज्वलंत मुद्दाः कोरोना का चीन और अमेरिका पर प्रभाव

एक तरफ कोरोना के कारण पूरी दुनिया संकट में है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर अमेरिका और चीन में भी पलटवार शुरू हो गया है। एक तरफ अमेरिका चीन पर कोरोना फैलाने का आरोप लगा रहा है, वहीं चीन भी अमेरिका को जवाब देने से पीछे नहीं हट रहा है। पढ़ें युवा डाइनामाइट विशेष.. नई दिल्लीः कोरोना वायरस ने अपनी चपेट में अब तक लाखों लोगों को लिया है। दुनिया का अधिकतर हिस्सों में कोरोना का कहर जारी है। इन दिनों चीन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का गुस्सा और जलन सातवें आसमान पर है। कोरोना के बहाने वो इसका खुलकर इज़हार कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर चीन भी अमेरिका को जवाब देने से बाज नहीं आ रहा है। इस महामारी के बादल छटने के बाद दुनिया की तस्वीर ही बदल जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका का सुपरपॉवर का तमगा भी छिन सकता है और दुनिया का पॉवर सेंटर वेस्ट से ईस्ट की तरफ हो जाए यानी चीन की तरफ। क्योंकि मौजूदा हालात को देखते हुए साफ है कि कोरोना से बचने के लिए दुनिया चीन की शरण में जा रही है।

ज्वलंत मुद्दाः नौकरी ढूंढते समय युवा इन बातों का रखें खास ध्यान

इस समय देश में नौकरी की काफी मार चल रही है। ऐसे में कई युवा नौकरी की तलाश कर रहे हैं। नौकरी ढूंढ रहे हैं। नौकरी ढूंढते समय कई युवा कुछ गलतियां कर बैठते है, जिससे बाद में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। युवा डाइनामाइट पर जानिए नौकरी ढूंढते समय कुछ खास बातें.. नई दिल्लीः बाजार की मौजूदा स्थितियों में बड़ी संख्या में लोग नौकरी गंवा रहे हैं। नौकरी न मिलने का एक और कारण जॉब सेलेक्शन की प्रक्रिया में कुछ गलतियां भी कर देते हैं। जानिए नौकरी ढूंढते समय कुछ खास बातों का। आप कहां और कैसे जॉब सर्च करते हैं, यह महत्वपूर्ण है। अगर आप आंख मूंदकर अनाप-शनाप तरीके से सीवी भेजते हैं या संस्थानों के कभी-कभार वैकेंसी के लिए चेक करते हैं तो नौकरी मिलने के आसार कम ही हैं। नौकरी की तलाश में अच्छा नेटवर्क काफी कारगर साबित हो सकता है। केवल नौकरी चले जाने पर ही नेटवर्क से संपर्क नहीं साधना चाहिए। नौकरी तलाशने की छटपटाहट में ज्यादातर लोगों को अपनी योग्यता से मिलता-जुलता जो भी पहला विकल्प दिखता, वे उसके लिए अप्लाई कर देते हैं। इससे उनकी कंज्यूजन का पता लगता है।

ज्वलंत मुद्दाः दो खेमों मे बंटी मीडिया के हालात..

भारत में कई ऐसे मीडिया संस्थान हैं जो खुद को लिबरल तो कहते हैं लेकिन पक्षपात करने से बाज नहीं आते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि भारत का मीडिया इन दिनों चाहे जो भी कर रहा हो मगर पत्रकारिता नहीं कर रहा है। यहां मीडिया दो खेमों में बंट गया है। पढ़ें युवा डाइनामाइट विशेष.. नई दिल्लीः भारत का मीडिया इन दिनों चाहे जो भी कर रहा हो मगर पत्रकारिता नहीं कर रहा है। सच की आवाज बुलंद करने वालों को दबाया जा रहा है। मीडिया सूचना स्त्रोत के रुप में खबरें पहुंचाने का काम करता है, तो वहीं हमारा मनोरंजन भी करता है। मीडिया जहां संचार का साधन है, तो वहीं परिवर्तन का वाहक भी है। लेकिन, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में निरंतर हो रही पत्रकारों की हत्या, मीडिया चैनलों के प्रसारण पर लगायी जा रही बंदिशें और कलमकारों के मुंह पर आए दिन स्याही पोतने जैसी घटनाओं ने प्रेस की आजादी को संकट के घेरे में ला दिया है। आज ऐसा कोई सच्चा पत्रकार नहीं होगा, जिसे रोज-ब-रोज मारने व डराने की धमकी नहीं मिलती होगी। हालांकि, भारत में मीडिया पर भ्रष्टाचार का आरोप बेहद पुराना है। समाचारपत्रों और टी.वी. चैनलों पर किसी विशिष्ट व्यक्ति, कॉरपोरेट इकाई, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों आदि के पक्ष में धन लेकर सूचनाएँ प्रकाशित या प्रसारित करने के आरोप लगते रहे हैं।

UPSC Update: सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा हुई स्थगित, जानें कब घोष‍ित होगी नई तारीख

यूपीएसई ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को स्थगित कर दिया है। यह परीक्षा 31 मई को होनी थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण अब इस परीक्षा को आगे बढ़ा दिया गया है। पढ़ें युवा डाइनामाइट पर पूरी खबर.. नई दिल्लीः देश में लॉकडाउन का तीसरा चरण शुरू हो चुका है। जिसके कारण कई अब यूपीएसई ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को स्थगित कर दिया है। ये एग्जाम 31 मई को होने वाली थी। यूपीएससी अधिकारियों के अनुसार अब 20 मई तक स्थ‍ितियों के मूल्यांकन के बाद परीक्षा की नई तिथ‍ि घोष‍ित की जाएगी। यूपीएससी का कहना है कि अभी कोविड 19 के लगातार बढ़ते प्रभाव को देखते हुए आयोग ने ये फैसला लिया है। अभी जिस तरह तीसरी बार लॉकडाउन बढ़ाया गया है, इसे देखते हुए इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा आयोजित करना संभव नहीं है। खासकर रेड या ऑरेंज जोन में ये और भी मुश्कि‍ल है।

ज्वलंत मुद्दाः भ्रष्टाचार की गहरी होती जड़.. कैसे लगे अंकुश?

भारत में भ्रष्टाचार का एक प्रमुख विषय रहा है। आजादी केबाद से ही भारत भ्रष्टाचार के दलदल में धंसा नजर आने लगा है। 21 दिसम्बर 1963 को भारत में भ्रष्टाचार के खात्मे पर संसद में हुई बहस में डॉ राममनोहर लोहिया ने जो भाषण दिया था वह आज भी प्रासंगिक है। उस वक्त डॉ लोहिया ने कहा था सिंहासन और व्यापार के बीच संबंध भारत में जितना दूषित, भ्रष्ट और बेईमान हो गया है उतना दुनिया के इतिहास में कहीं नहीं हुआ है। ऐसे में अब ये सवाल उठता है कि आखिर भ्रष्टाचार की इस बढ़ती जड़ को कैसे रोका जाए। पढ़ें युवा डाइनामाइट विशेष.. नई दिल्लीः भ्रष्टाचार से देश की अर्थव्यवस्था और प्रत्येक व्यक्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। भारत में राजनीतिक और नौकरशाही का भ्रष्टाचार बहुत ही आम माना जाता है। इसके अलावा न्यायपालिका, मीडिया, सेना, पुलिस आदि में भी भ्रष्टाचार है। शिक्षा विकास की जननी है। इसके बिना सर्वांगीण विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। लेकिन भ्रष्टाचार ने शिक्षा क्षेत्र में भी जड़ जमा लिया है। पिछले कुछ वर्षों से भारत एक नए तरह के भ्रष्टाचार का सामना कर रहा है। बड़े घपले-घोटालों के रूप में सामने आया यह भ्रष्टाचार कॉरपोरेट जगत से जुड़ा हुआ है। ऐसे में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कोई पक्का रास्ता नजर नहीं आ रहा है, पर हां एक कोशिश तो जरूर की जा सकती है। ऐसा माना जाता है कि भारत में भ्रष्टाचार के आरोपियों के लिए सजा की सीमा बहुत ही कम होती है। इसलिए भ्रष्टाचार की सजा ज्यादा से ज्यादा होनी चाहिए। अगर लोगों का परिश्रमिक उनकी जरूरतों के अनुसार होगा तो शायद भ्रष्टाचार पर लगाम लग सकती है। इन सबसे भी ज्यादा जरूरी है कि अगर हम अपने जीवन का ही मूल्य सिद्धांत ही ईमानदारी बना लें।

ज्वलंत मुद्दाः गरीबी, बेरोजगारी, युवा, आरक्षण.. क्या यही है बदलते देश की सूरत?

आज भारत में युवाओं की संख्या विश्व में सबसे अधिक है। युवाओं को देश का बेहतरीन भविष्य माना जाता है। पर क्या हो जब जिनसे हम बेहतरीन भविष्य की उम्मीद लगाए बैठे हैं उनका वर्तमान समय ही बेहद नाजुक और खराब हो। आज के समय में देश के युवाओं को सबसे ज्यादा बेरोजगारी की मार सहनी पड़ रही है। केवल बेरोजगारी ही नहीं उसके साथ गरीबी, आरक्षण जैसी भी कई परेशानियां हैं जो उसे अंदर ही अंदर कमजोर बना रहा है। नई दिल्लीः सरकार और समाज का ये मानना है कि यदि देश के युवाओं को अच्छी तरह से शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण दिया जाए तो इनको न केवल अच्छा रोजगार मिलेगा बल्कि यह देश के आर्थिक विकास में भी अच्छा योगदान दे सकते हैं। पर देश के हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। युवाओं के बीच बेरोजगारी बढ़ती चली जा रही है। जिसकी वजह से वो देश के हित के बजाय उसे नुकसान पहुंचाने वालों कामों में ज्यादा सहयोग दे रहे हैं। इनमें मुख्यरूप से आरक्षण को लेकर प्रदर्शन (मराठा, जाट और पटेल), कश्मीर में सेना पर पत्थरबाजी, ‘गो रक्षक’ के नाम पर हिंसा करते देखा गया है। अगर पिछले कुछ वर्षों के आकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि देश के आर्थिक सर्वे के अनुसार, कुल बेरोजगारी दर 2011-12 में 3.8 पर्सेंट से बढ़कर 2015-16 में 5.0 पर्सेंट हो गई है। विशेष रूप से युवाओं में बेरोजगारी दर अधिक तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान सरकार को देश की आर्थिक विकास दर से ज्यादा आज रोजगार सृजन पर ध्यान देने की जरूरत है। जिस तरह से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ‘ऑटोमेशन’ की वजह से पूरे विश्व में नौकरियों की कटौती हो रही हैं।

आखिर क्यों युवाओं के साथ छलावा कर रही हरियाणा सरकार?

कोरोना वायरस के कारण पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया गया है। इस दौरान कई जगहों पर सरकारी भर्तियों को भी रोक दिया गया है। जिससे लोगों में काफी गुस्सा है। पढ़ें युवा डाइनामाइट की खास रिपोर्ट.. हरियाणाः सोमवार को हरियाणा की मनोहर सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण और आर्थिक संकट को देखते हुए सरकारी नौकरियों की भर्ती पर रोक लगा दी है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में महामारी से उपजे हुए आर्थिक संकट को देखते हुए ऐसा करना पड़ा है। खट्टर सरकार के इस फैसले का ‘युवा हल्ला बोल’ ने विरोध किया है। “युवा हल्ला बोल” एक ऐसी संगठन है जो देश में युवाओं के हक के लिए लगातार लड़ती है। हरियाणा सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए इस संगठन का मानना है कि ये घोषणा से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी कर देगा। पहले से कोरोना महामारी के चलते अचानक हुए लॉकडाउन के कारण छात्र/छात्राएं परेशानी में आ चुके हैं जो कि दिल्ली, चंडीगढ़ और अन्य बड़े शहरों में रहकर विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनके सामने किराया देने और खाने की समस्या पहले से चल रही है और अब अचानक नयी घोषणा उनको और परेशान कर रही है। अगले एक साल तक हरियाणा में कोई नई भर्ती नहीं होगी जिसको भले ही कोरोना महामारी कारण बताया जा रहा हो लेकिन असल मुद्दा ये है कि हरियाणा का चुनाव अभी दूर है। हरियाणा के युवाओं के साथ हो रहे इस धोखे का हम पुरजोर विरोध करते हैं। सरकार ने एक तरफ कारोबारियों से अपील किया गया कि कोई भी ऐसा कदम न उठाएं जिससे इस कठिन दौर में बेरोजगारी बढ़े। लेकिन बेरोजगारी में नंबर 1 हरियाणा ने ही भर्तियों पर रोक लगा दी। हरियाणा के हर एक गांव में बड़ी संख्या में छात्र सरकारी नौकरी की चाह रखते हैं ऐसे मे नई सरकारी भर्तियों पर रोक इन छात्रों के साथ अन्याय है। सरकार से विनम्र अनुरोध है कि सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बारे में सोचें और भर्तियों से रोक को हटाएं।

यह समस्या देश भर के छात्रों की है..

जो छात्र इस लॉकडाउन में अपने रूम/पीजी/हॉस्टल में फसे हैं उनमें से अधिकांश के घर से खर्चे के लिए पैसे नहीं आ पा रहे हैं ऐसे में रूम रेंट देना मुमकिन नहीं है। दूसरा जो छात्र इस लॉक डाउन में क्लास/कोचिंग बंद होने से घर पहुंच गए हैं ऐसे में रेंट देना अभिवावकों पर अतिरिक्त बोझ है। युवा हल्ला बोल ने #NoRentForStudents मुहिम की शुरुआत की है जिसके लिए सबको साथ आना चाहिए और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज उठानी चाहिए। किराया माफी के इस मुहिम को समर्थन देते हुए #NoRentForStudents हैशटेग के साथ ट्वीट करें। साथ ही ऑनलाइन पेटिशन change.org/NoRentForStudents को sign करें

Lockdown Support: डाइनामाइट न्यूज़ और युवा हल्ला बोल के साझा प्रयासों से लॉकडाउन में लोगों को बड़ी मदद

डाइनामाइट न्यूज़ और युवा हल्ला बोल के साझा प्रयासों से लॉकडाउन के दौरान अन्य प्रदेशों में काम करने वालों को मिल रही है मदद। पूरी खबर.. महराजगंज: कोरोना के कहर से हुए लॉकडाउन ले लाखों लोग परेशान हैं ऐसे में लोगों की मदद करने को युवा हल्लाबोल संगठन आगे आया है। युवा हल्लाबोल ने हेल्पलाइन नंबर 9810408888 जारी कर लोगों की मदद करनी शुरू की है। नौकरी की तालाश में अपने घर को छोड़ कर अन्य प्रदेशों में काम करने वालों लोगों की संख्या बहुत ज्यादे है। लॉकडाउन की स्थिति में लोग को खाने तक कि परेशानी उठाना पड़ रहा है। युवा हल्लाबोल के नेशनल कोऑर्डिनेटर गोविन्द मिश्रा ने बताया कि हेल्पलाइन नंबर पर मदद के लिए लगातार फ़ोन आ रहे हैं। ऐसे में दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। लोगों के पास न राशन बचा है और न ही पैसे। युवा हल्ला बोल के दर्जनों कार्यकर्ता प्रशासन की मदद से लोगों तक खाना पहुंचा रहे हैं। कई केसों में युवा हल्ला बोल अपने ट्वीटर के माध्यम से मदद की गुहार की है। जिस पर तेलंगाना, पंजाब, महाराष्ट्र, यूपी तथा अन्य राज्यों की पुलिस एवं प्रशासन ने जवाब देते हुए कार्यवाही भी की है। डाइनामाइट न्यूज से बात करते हुए गोविन्द मिश्रा ने ये भी बताया कि डाइनामाइट न्यूज़ पर आई खबर की वजह से मदद के लिए महराजगंज के लोगों फ़ोन आये हैं। अहमदाबाद में फसे हुए श्रवण, कांचीपुरम में फसे हुए राजू, मुम्बई में फसे हुए त्रिलोकी समेत तमाम ऐसे लोग जो महराजगंज के हैं उनकी मदद के गुहार पर प्रशासन की मदद से कार्यवाही की गई है।

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