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CBSE Board Class 10, 12 Exam Dates 2021: सीबीएसई 10वीं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की डेटशीट को लेकर बड़ी खबर

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 10 और 12 बोर्ड परीक्षा 2021 की तारीखों की घोषणा हो गई है। नई दिल्लीः सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स का इंतजार आखिर खत्म हो गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बोर्ड एग्जाम की डेट्स का ऐलान कर दिया है। CBSE बोर्ड परीक्षा की तारीखों का ऐलान केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ द्वारा किया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखिरियाल निशंक ने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2021 (CBSE Board Exam 2021) की घोषणा कर दी है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि बोर्ड की परीक्षाएं 4 मई से परीक्षाएं शुरू होंगी।  CBSE बोर्ड की परीक्षाओं की तारीखों का ऐलान हो गया है. चार मई से बोर्ड की परीक्षाएं शुरू होंगी, जो 10 जून तक चलेंगी। 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा का रिजल्ट 15 जुलाई को घोषित किया जाएगा।

Trending Topics: अब 4 साल में मिलेगी डीयू से डिग्री, ये है वजह

नई दिल्लीः नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद अब डीयू पर तीन साल की जगह चार साल में अंडरग्रेजुएट कोर्सेस की डिग्री देने की तैयारी कर रहा है। डीयू के तीन साल के ऑनर्स कोर्सेस को चार साल का बनाया जाएगा। यानी स्टूडेंट्स को तीन साल में ऑनर्स की डिग्री नहीं मिल पाएगी। हालांकि डीयू शिक्षक संघ इसका विरोध कर रहा है। यूनिवर्सिटी ने सितंबर 2020 में नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के लिए एक समिति बनाई थी।

CBSE Board Exam 2021: वायरल एग्‍जाम डेट्स को लेकर बोर्ड ने जारी किया नोटिस, जानिए क्या कहा

इस समय सोशल मीडिया पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की डेटशीट काफी वायरल हो रही है। इसको लेकर अब बोर्ड ने एक नोटिस जारी किया है। जानिए क्या कहा है बोर्ड ने उस नोटिस में। नई दिल्लीः कुछ समय से सोशल मीडिया पर CBSE कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड की थ्‍योरी और प्रैक्टिकल परीक्षाओं की डेट/ महीने की जानकारी वाली पोस्‍ट सर्कुलेट हो रही है। जिसे लेकर बोर्ड ने एक नोटिस निकाला है। नोटिस में ये कहा लिखा गया है कि- छात्रों, शिक्षकों, स्कूलों और अभिभावकों को सचेत किया है कि बोर्ड की तरफ से एग्‍जाम की डेट्स या महीने की कोई जानकारी जारी नहीं की गई है। नोटिस में बोर्ड ने कहा कि सर्कुलेट हो रही सूचना सही नहीं है और इससे स्कूलों, छात्रों और अभिभावकों में घबराहट पैदा हो सकती है। गुरुवार को नोटिस जारी करके कहा गया है कि- CBSE के संज्ञान में यह आया है कि दसवीं और बारहवीं बोर्ड की परीक्षाओं और प्रैक्टिकल परीक्षाओं की डेट की जानकारी कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और न्यूज़ पेपर्स में जारी की जा रहा है। चूंकि ये जानकारी सही नहीं है, इसलिए, यह छात्रों और अभिभावकों में घबराहट पैदा कर सकती है।

School Reopening: जानें कब तक रहेंगे बंद स्कूल, राजस्थान सरकार ने लिया फैसला

कोरोना काल के कारण कई स्कूल और कॉलेज अभी तक नहीं खोले गए हैं। इसी बीच राजस्थान सरकार ने भी स्कूलों को लेकर एक बयान जारी किया है। जयपुरः कोरोना के कारण कॉलेज और स्कूल लंबे समय से बंद हैं। कई स्कूलों को दिसंबर के महीने में खोल दिया गया है, वहीं कई स्कूलों को खोलने के समय पर विचार चल रहा है। राजस्थान सरकार ने बताया है कि राज्य में स्कूल-कॉलेज 31 दिसंबर तक बंद करने का फैसला लिया है। राजस्थान सरकार के नए आदेश के अनुसार अब 31 दिसंबर 2020 तक राजस्थान में सभी स्कूल-कॉलेज बंद ही रहेंगे। इसी बीच राजस्थान बोर्ड की कक्षा 12वीं के लिए बोर्ड एग्जाम 2021 के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी है। आरबीएसई (RBSE) की वेबसाइट के जरिए 12वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 20 नवंबर थी।

ज्वलंत मुद्दाः समाज में महिलाओं की स्थिति आज भी एक बड़ा मुद्दा

आज के समय में भारत में भले ही महिलाओं की स्थिति थोड़ा बहुत बदलाव आया है, लेकिन ये अभी भी एक बड़ा मुद्दा है। एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण के कदम उठा रही है तो दूसरी ओर घर से बाहर निकलने वाली महिलाओं की सुरक्षा भी चिंताजनक होती जा रही है। नई दिल्लीः हाल ही में एक विदेशी संस्थान की रिपोर्ट के मुताबिक भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक देश बताया गया है। इस सर्वे में महिलाओं का स्वास्थ्य, शिक्षा, उनके साथ होने वाली यौन हिंसा, हत्या और भेदभाव जैसे कुछ पैमाने थे, जिन पर दुनिया के 193 देशों का आकलन किया गया था। भारत हर पैमाने में पीछे था। वहां औरतों के स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति सबसे खराब थी। सवाल अब ये उठता है कि कब जाकर भारत में महिलाओं की स्थिती में हदलाव होंगे। सरकार एक तरफ महिला सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं की सुरक्षा ही एक बड़ा सवाल बन रहा है। महिलाओं की स्थिति बदली है, मगर अभी भी इसमें सुधार की जरूरत है। समाज की सोच बदलनी होगी। आज भी समाज में जेंडर एक बड़ा मुद्दा है। महिलाओं की सुरक्षा की बात यह साबित करती है कि हम संवेदनशील नहीं हो सके हैं।

ज्वलंत मुद्दाः स्कूल खुलने के बाद क्यों ठप हो रही बच्चों की पढ़ाई?

लॉकडाउन में देश की अर्थव्यवस्था के साथ बच्चों के भविष्य पर भी भारी असर पड़ा है। सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा का लाभ बहुत ही कम बच्चों को मिल सकी है। नई दिल्लीः कोरोना काल के कारण बच्चों की शिक्षा पर भी काफी असर पड़ा है। लॉकडाउन लगने के बाद पढ़ाई-लिखाई का ऑनलाइन का फायदा गांव में सिर्फ कुछ ही बच्चों को मिल पा रहा है। वहीं अब कई जगहों पर स्कूल भी खोल दिए गए हैं। जिसकी वजह से उन बच्चों की पढ़ाई पर काफी असर देखने को मिल रहा है, जो घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई करना चाहते हैं। सरकारी स्कूलों में 25 से 30 प्रतिशत बच्चों को ही वर्तमान में ऑनलाइन पढ़ाई का मिल पा रहा है। जब स्कूलों में शिक्षकों को बुलाया जाने लगा तो व्हाट्सएप ग्रुपों पर निष्क्रिय हो गए। कुछ शिक्षक व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाई करा रहे हैं लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है।

UPSC Civil Services Mains Exam Date 2020: यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2020 की डेटशीट जारी, यहां देखें पूरा शेड्यूल

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की डेट शीट जारी कर दी है। युवा डाइनामाइट पर देखें पूरी एग्जाम का शेड्यूल नई दिल्लीः यूपीएससी ने सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का विस्तृत शेड्यूल जारी कर दिया है। ये एग्जाम जनवरी के महीने में शुरू होंगे। मुख्य परीक्षा का आयोजन 8 जनवरी 2021 से 17 जनवरी 2021 के बीच किया होगा। इससे पहले कैंडिडेट्स को डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म (डीएएफ) भरना होगा। जिसे भरने की आखिरी तारिख 11 नवंबर है। अभ्यर्थियों को upsconline.nic.in पर जाकर ये फॉर्म ऑनलाइन भरना होगा। बता दें कि 4 अक्टूबर को सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2020 का आयोजन किया गया था। 23 अक्टूबर को इसका परिणाम जारी कर दिया गया था।

ज्वलंत मुद्दाः नई शिक्षा नीति 2020- आखिर क्यों पड़ी इसकी जरूरत

भारत में लंबे समय के बाद शिक्षा नीति में बड़े बदलाव किए गए हैं। इस नीति में बदलाव के बाद अब ये सवाल खड़े हो रहे हैं कि इस बदलाव की क्यों जरूरत पड़ी और क्या खास है इस नई नीति में.. नई दिल्लीः देश में मौजूदा शिक्षा नीति को अंतिम बार 1992 में अपडेट किया गया था। इस नीति का उद्देश्य स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा को तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षाओं को दायरे में लाना है। छात्र को बचपन से ही उसके हुनर और दिलचस्पी के हिसाब शिक्षा देना है। ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ साथ किसी लाइफ स्‍क‍िल से सीधा जोड़ा जा सके। ऐसा माना जा रहा है कि देश में रट्टू तोते वाली शिक्षा व्यवस्था से पढाई करने पर बच्चों को शिक्षा से लाभ मिलना बंद हो जाता है। यही कारण है कि भारत में समय समय पर शिक्षा नीति को बदला जाता रहा है। अभी तक हमारे देश में स्कूली पाठ्यक्रम 10+2 के हिसाब से चलता है लेकिन अब नई शिक्षा नीति में इसे खत्म कर 5+ 3+ 3+ 4 के फार्मेट को मंजूरी दी गयी है। जिसका मतलब प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, फिर तीसरी से पांचवीं तक दूसरा हिस्सा, छठी से आठवीं तक तीसरा हिस्सा और नौंवी से 12 तक आखिरी हिस्सा होगा।

ज्वलंत मुद्दाः आरक्षण के साथ और बिना आरक्षण, इन दो हिस्सों में बंटा भारत

भारत इस समय दो हिस्सों में बंटा हुआ, जिसमें एक आरक्षण के साथ है, जबकि एक बिना आरक्षण के। आज के समय में ये युवाओं के लिए एक अहम मुद्दा बना हुआ है, फिर चाहे बात नौकरी से जुड़ी हुई हो या पढ़ाई। पढ़ें युवा डाइनामाइट की ये विशेष खबर.. नई दिल्लीः आज के समय में देश में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर फैसला का इंतजार पूरा भारत कर रहा है। इन्हीं मुद्दों में से एक है आरक्षण का मुद्दा। संविधान की पांचवी अनुसूची में शेड्यूल ट्राइब्स परिषद के अंतर्गत शेड्यूल ट्राइब्स को विशेष अधिकार प्राप्त है। आरक्षण जैसी नीतियां सिर्फ भारत में नहीं और भी काफी देशों में हैं, जहां रंग, भाषा, धर्म के आधार पर आरक्षण दिया जाता है। आरक्षण इसलिए दिया जाता है कि जिन लोगों से उनकी पहचान के आधार पर भेदभाव करते हुए उनके अधिकारों से वंचित रखा गया हो, उनको मुख्यधारा में लाया जा सके। भारत में इस वक्त इस चीज को लेकर बहस रही है कि मेडिकल जैसी फिल्ड से (ओबीसी) के आरक्षण के कितने सीट हैं और असल में उन्हें कितनी सीटें दी जा रही हैं।

ज्वलंत मुद्दा: क्या चीनी सामान का बहिष्कार कर आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा?

अगर ये कहा जाए की भारत और भारत के लोगों में चीनी सामान ने अपनी एक अलग जगह बना ली है। ऐसे में चीनी सामानों को पूरी तरह से बहिष्कार करना एक बड़ा सवाल है। पढ़ें युवा डाइनामाइट न्यूज़ विशेष.. नई दिल्लीः देश में चीनी सामान के बहिष्कार का अभियान चल पड़ता है। सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट की भरमार हो जाती है जिसमें चीनी सामान नहीं खरीदने का आह्वान होता है। चीन को सबक सिखाने के लिए चीनी सामान का बहिष्कार किया जाएगा तो यह बात पूरी तरह से व्यावहारिक दिखाई नहीं देती है। अगर अपने घर में नजर डाले तो हमें ज्यादातर सामान चीन का ही मिलेगा। ऐसे में पूरी तरह से चीन के सामान का बहिष्कार करना एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

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