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UGC NET Postponed: यूजीसी की 26 अगस्त को होने वाली नेट परीक्षा स्थगित, इस तारीख को होगा एग्जाम

नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(UGC) ने 26 अगस्त को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा(NET) को श्री कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) के कारण स्थगित (Postponed) कर दिया है। 26 को होने वाली यह परीक्षा (Exam) अब 27 अगस्त को आयोजित की जाएगी। डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार एनटीए ने पहले पूर्ण यूजीसी नेट परीक्षा(UGC Net Exam) कार्यक्रम की घोषणा की थी। तारीखों के अनुसार, कुल 7 पेपर – दर्शनशास्त्र, हिंदी, उड़िया, नेपाली, मणिपुरी, असमिया, संताली – 26 अगस्त को आयोजित होने वाले थे। पेपर के बाद यूजीसी नेट परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। यूजीसी ने बताया कि नेट परीक्षा 2024 दो पालियों में आयोजित की जाएगी। पहली पाली सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित की जाएगी। दर्शनशास्त्र और हिंदी के पेपर सुबह की पाली में आयोजित किए जाएंगे और ओरलिया, नेपाली, मणिपुरी, असमिया, संताली, हिंदी के पेपर दोपहर की पाली में आयोजित किए जाएंगे। एनटीए कुल 83 पेपरों के लिए जेआरएफ और अन्य फेलोशिप प्रदान करने के लिए पात्रता परीक्षा आयोजित करेगा। जानकारी के अनुसार यूजीसी नेट परीक्षा 21 अगस्त से 4 सितंबर तक आयोजित की जाएगी। यूजीसी नेट एडमिट कार्ड 2024 आधिकारिक वेबसाइट पर 19 अगस्त तक जारी होने की उम्मीद है। यूजीसी नेट हॉल टिकट डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को अपना आवेदन नंबर और जन्मतिथि दर्ज करनी होगी।

सावधानी से स्वीकारें नौकरी का ऑफर, पढ़ें ज़ॉब के झासें से जुड़ी फ्रॉड की ये कहानी

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में एक कोर्ट के चैंबर (Chamber) में युवती से रेप (Rape) का मामला सामने आया है। युवती ने तीस हजारी कोर्ट में एक वकील (Advocate)पर अपने चेंबर में उससे रेप करने का आरोप लगाया है। युवती की शिकायत के आधार पर दिल्‍ली पुलिस (Police) ने एफआईआर भी दर्ज कर ली है।  डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार युवती ने घटना की बाबत घर पहुंचकर अपनी मौसी को जानकारी दी।  नौकरी दिलाने के नाम पर चैंबर में बुलायायुवती ने अपनी शिकायत में कहा है कि आरोपी ने उसे 27 जुलाई को नौकरी देने के बहाने बुलाया लेकिन उसके साथ जबरदस्ती की। उसने बताया कि वह भजनपुरा इलाके में रहती है। वह आठवीं तक पढ़ी है। घर की माली हालत ठीक नहीं है। इसलिए उसने अपनी चचेरी बहन को कोई नौकरी दिलवाने के लिए कहा था। बहन ने उसे एक आदमी का नंबर दिया और कहा कि इन अंकल से बात कर लेना, यह जॉब लगवा देंगे। उन अंकल से बात हुई तो उन्होंने पूछा कि वह किसी तरह की जॉब कर सकती है। बाद में युवती से उसका आधार कार्ड वॉट्सऐप करवाया। अब उसने कहा कि तुम्हारे लायक कोई जॉब होगी तो मैं तुम्हें बता दूंगा। इसके बाद 15-20 दिन बाद उस शख्स ने फिर युवती के पास कॉल की। उसने कहा कि तुम्हें मेरे चैंबर में आकर दिखाना होगा कि तुम्हें पढ़ना लिखना आता है या नहीं। अब युवती उनके चैंबर में पहुंच गई। जहां कथित अंकल और उनकी असिस्टेंट थी। उसने अब युवती से कहा कि ठीक है मैं अभी बिजी हूं, तुम्हारे लायक कोई जॉब होगी तो 8-10 दिन में बताउंगा। अब 10 दिन बाद युवती ने ही उन्हें कॉल की। आरोपी ने 27 जुलाई को एक बार फिर युवती को चैंबर में बुला लिया।  रेप कर 1500 रुपये देकर भेजापीड़ित युवती ने कहा कि वकील ने उसे इसके बारे में किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। एक अधिकारी ने युवती की शिकायत का हवाला देते हुए कहा, रेप के बाद आरोपी वकील ने पीड़िता को 1,500 रुपये दिए और जाने के लिए कहा। पुलिस कर रही मामले की जांचपुलिस ने बताया कि युवती ने घटना के बारे में घर पहुंचकर अपनी मौसी को जानकारी दी। मौसी ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है। पुलिस ने बताया कि युवती के बयान पर सब्जी मंडी पुलिस थाने में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

IAS Coaching Tragedy: दिल्ली कोचिंग हादसे का सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस

नई दिल्ली: सेंट्रल दिल्ली में राजेन्द्र नगर के आईएएस कोचिंग सेंटर में तीन छात्रों की मौत को लेकर युवाओं के जारी आक्रोश के बीच देश की शीर्ष अदालत ने इस हादसे का स्वत संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस हादसे को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कोचिंग सेंटर फेडरेशन पर एक लाख का जुर्माना भी लगाया है।  डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने इस हादसे पर कई सवाल खड़े किये। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कोचिंग सेंटर डेथ चैंबर बन गये हैं, जहां युवाओं के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं तो कोचिंग सेंटर ऑनलाइन क्लासेस दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी और दिल्ली की केजरीवाल सरकार से पूछा है कि कोचिंग सेंटर्स में सेफ्टी नियम लागू किये या नहीं?

दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में छात्रों की मौत को लेकर कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, जानें पूरा अपडेट

ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी। मामले में पुलिस ने कोचिंग सेंटर संचालकों को गिरफ्तार किया था। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: छात्रों की मौत के मामले में बेसमेंट के सह मालिकों की जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मामला सीबीआई के हाथों में दे दिया है। मामले की जांच अब सीबीआई के द्वारा की जाएगी। युवा डाइनामाइट संवाददाता के अनुसार दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को उस कोचिंग सेंटर के बेसमेंट के चार सह-मालिकों की जमानत याचिका का निपटारा कर दिया। जहां पिछले महीने सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी करने वाले तीन विद्यार्थियों की डूबने से मौत हो गई थी। अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील पर गौर किया कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है

शिक्षा का गिरता स्तर और बढ़ती फीस: नीति-निर्माताओं में इच्छा शक्ति का अभाव या असंवेदनशील दृष्टिकोण?

देश में स्कूल से लेकर कॉलेज समेत हर शिक्षण संस्थान में लगातार फीस बढ़ोत्तरी एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है लेकिन इसके साथ शिक्षा का गिरता स्तर भी चिंताजनक है। पढ़िये प्रो. (डॉ.) सरोज व्यास का यह ब्लॉग नई दिल्ली: “शिक्षा के गिरते स्तर और बढ़ती फीस के लिए ज़िम्मेदार कौन” ? लेख द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मन की व्यथा को विचारशील विवेकी पाठकों तक प्रेषित करने मात्र से क्या आपका कर्तव्य पूरा हो गया? क्या केवल प्रश्नचिन्ह लगाना पर्याप्त है? क्या आपके पास कोई सुझाव है? सहयोगी डॉ. गीता ने पूछा – समस्या के साथ समाधान होने चाहिये, ऐसा आप कहती है। मैंने कहा-समाधान और सुझाव हैं, लेकिन कोई समझना ही नहीं चाहता। “भारत की 28वीं शिक्षा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी (26 मई 2014-5 जुलाई 2016) से लेकर दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सीसोदिया (14 फरवरी 2015–28 फरवरी 2023) तक से अथक प्रयासों के बाद मिलने का समय लेने में तो सफल हो गयी, किन्तु हाथ लगी केवल “घंटों की प्रतीक्षा और निराशा”। सांत्वना थी अथवा प्रोत्साहन नहीं जानती लेकिन उसने कहा – कोई बात नहीं, फिर  भी लिखिए शायद किसी को कुछ समझ में आ जाए । आपको लेखन के माध्यम से जन सामान्य की आवाज़ उठानी चाहिए। जैसे आप यशपाल कमेटी का उल्लेख कर रही है, भविष्य में कोई आपके सुझावों का उद्धरण दे सकता है। केवल त्रुटियों एवं असफलताओं की चर्चा मेरी मंशा नहीं हैं, लेख के माध्यम से धरातलीय स्तर पर सुझाव देने का दु:स्साहस कर रही हूँ । दिन-प्रतिदिन संस्थानों के अध्यक्षों, निदेशकों, प्राचार्यों और शिक्षक समुदाय के समक्ष आने वाली चुनौतियों तथा कठिनाइयों की ओर सत्ता और शीर्षासन पर विराजमान शिक्षा मंत्रियों, विश्वविद्यालय के कुलपतियो एवं तथाकथित नीति-निर्माता शिक्षाविदों को ध्यान देने की आवश्यकता है। बस्ते का बोझ कम नहीं हुआयशपाल कमेटी 1993 की रिपोर्ट का शीर्षक ‘शिक्षा बिना बोझ के’ था, इससे पूर्व नरेन्द्र देव समिति – 1947, राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 1986, में भी इस सम्बन्ध में सुझाव दिए गये थे। शिक्षा मंत्रालय शैक्षिक गुणवत्ता के लिए प्रतिबद्ध है और आवंटित बजट धनराशि को ख़र्च भी कर रहा है। फिर क्यों आज तक इन सिफारिशों को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया ? क्या सरकारों द्वारा गठित समितियों, कमेटियो और आयोगों का गठन केवल हितधारकों (स्टेकहोल्डर) के मुहं पर ताला लगाने के लिए किया जाता है कि देखिए सरकार कितनी संजीदा है। यदि यह सच नहीं है तो सुझावों की अनदेखी क्यों? सूर्या फाउंडेशन के संस्थापक एवं चैयरमैन, पद्मश्री जयप्रकाश जी के नेतृत्व एवं प्रो. एच एल शर्मा जी के मार्गदर्शन में पहली से पाँचवी तक, एक कक्षा-एक किताब को सूर्या भारती के शिक्षाविदों ने वर्ष 2000 में ही तैयार कर दिया था। अन्य शिक्षाविदों और समाज सेवी संस्थाओं द्वारा भी निरंतर इस क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। सभी के द्वारा समय-समय पर महामहिम राष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री जी और शिक्षा मंत्रियों के संज्ञान में भी इसे लाया गया है। नि: स्वार्थ किए गये प्रयास एवं परिश्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा तो होती है, लेकिन नियमों को कठोरता से लागू किए जाने की दिशा में कोई ठोस क़दम नहीं उठाये जाते । यदि उठाये जाते तो पुन: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बस्ते का बोझ कम कैसे हो ? सम्बन्ध में सुझाव/सिफारिश देने की आवश्यकता नहीं होती। सुझावसही अर्थों में पुस्तके अध्यापकों के लिए सूचनाओं का संग्रह और सैद्धांतिक दिशा-निर्देशिका होती है, लेकिन शैक्षिक व्यवस्था ऐसी है कि विद्यार्थियों के बस्ते में अध्ययन सामग्री (पुस्तकें) रटने के लिए ठूस दी जाती है।पाठ्य पुस्तके विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में रखी जाये, विद्यार्थी सर्वप्रथम अध्यापक द्वारा दिए जाने वाली विषयक जानकारी को सुनें, उसे दोहराये, ग्रहण किए गये ज्ञान को लिखे और तदुपरांत पढ़कर उस पर चिंतन-मनन करें। शिक्षा के सभी स्तरों पर पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगात्मक प्रशिक्षण पर अधिकाधिक बल दिया जाए, क्योंकि व्यवसाय और रोजगार के लिए यह आवश्यक है। पाठ्यक्रम का निर्माण मांग और पूर्ति के नियमानुसार हितधारकों के प्रतिनिधियों (शिक्षार्थी, शिक्षक, अभिभावक, नीति-निर्माता और अनुभवी शिक्षाविद) से विचार-विमर्श करके किया जाए। बढ़ती फीस के लिए ज़िम्मेदार कौन?इस यक्ष प्रश्न का उत्तर देना सामर्थ्य से बाहर है, किन्तु मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों की लाचारी मन को द्रवित कर देती है। 2-3 संतानों को पढ़ाना, दो समय की रोटी की व्यवस्था में लगे माता-पिता के लिए बहुत बड़ी चुनौती है, एक बच्चे की फीस लाखों में कहाँ से लाये । प्रतिस्पर्धा की दौड़ में शैक्षिक गुणवत्ता की चर्चा व्यर्थ है। जिस गति से फीस में बढ़ोतरी हुई है, उससे अधिक गति से शैक्षिक बेरोजगारी बढ़ी है। उदाहरण के लिए यदि गुरु गोबिन्द सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के फीस संरचना (structure) का तुलनात्मक विश्लेषण कर लिया जाए तो जमीन-आसमान का अंतर स्पष्ट हो जायेगा । सुधी पाठकों के लिए दो लिंक साझा कर रही हूँ। http://ipu.ac.in/norms/statues/s27-27.pdf http://www.ipu.ac.in/pubinfo2024/nt300424548%20(2).pdf सुझावस्वायत संस्थाओं (विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय) की फीस मान्यता देने वाली (Affiliating body) संस्थाओं के माध्यम से ऑन लाइन हो सकती है। छात्रवृतियाँ देने की अपेक्षा एडमिशन के समय ही फीस माफ़ अथवा कम की जा सकती है। पाठ्यक्रम की अवधि के अनुसार शिक्षण सामग्री को दो भागों (सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक) में विभाजित किया जाए तथा सैद्धांतिक शिक्षण के लिए फीस की 50% राशि ही शिक्षण संस्थाओं को दी जाए। प्रयोगात्मक शिक्षण-प्रशिक्षण सम्बंधित संस्थाओं में नि: शुल्क करवाया जाए । मेरा यह सुझाव “हींग लगे ना फिटकरी, रंग आए चोखा” कहावत को चरितार्थ करता है। इससे अभिभावकों को केवल आधी फीस ही देनी होगी तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को वर्ष दो वर्ष के लिए अवैतनिक जनशक्ति (Manpowar) मिलेगी। नौकरी के लिए इच्छुक युवाओं को रुचि और कौशल के आधार पर नौकरियां, स्व रोजगार हेतु प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन तथा उच्च शिक्षा के लिए उपाधि प्राप्त हो सकेगी। विकसित भारत @2047 के विजन की पूर्ण सफलता के लिए कमेटियों के गठन, सुझावों और लेख से बात नहीं बनेगी। सत्तारुढ़ राजनेताओं एवं नीति-निर्माताओं की इच्छा शक्ति और मानवीय संवेदना को झकझोरने का समय आ गया है। (लेखिका प्रो. (डॉ.) सरोज व्यास, वर्तमान में  फेयरफील्ड तकनीक एवं प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली , निदेशक के पद पर कार्यरत है ।)

NEET UG : दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए शुरू हुई प्रक्रिया, जानें क्या है डीयू का पहला एक्शन

डीयू ने नीट यूजी काउंसलिंग के लिए एक कदम आगे बढ़ा दिया है। छात्रों को डीयू में दाखिले का बेसब्री से इंतजार था। जिसकों लेकर डीयू ने भी काम शूरू कर दिया है। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने नीट यूजी काउंसलिंग के माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीडब्ल्यू (सशस्त्र बलों के कर्मियों के बच्चे, विधवाएं) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए दस्तावेज जमा करने की विंडो खोल दी है। सबमिशन पोर्टल पर चिकित्सा विज्ञान संकाय की वेबसाइट के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। आधिकारिक नोटिस के अनुसार, नीट यूजी परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले और 85% दिल्ली कोटा के तहत 2024-25 शैक्षणिक सत्र में विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश चाहने वाले CW श्रेणी के उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से CW रियायतों के लिए अपनी पात्रता साबित करने वाले प्रासंगिक दस्तावेज जमा करने होंगे।

UGC: खाली बची सीटों को इस तरह भरेंगे विश्वविद्यालय, जानें आपके काम की खबर

अगर आप भी कॉलेज में दाखिला लेना चाहते हैं तो आपके लिए यूजीसी की तरफ से नई घोषणा की गई है। अगर किसी की रैंक कम आई है या सीयूईटी की परीक्षा नहीं दी है तो उन्हें एक और मौका दिया जा रहा है। पढ़िये युवा डाइनामाइट की खास रिपोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विश्वविद्यालयों को स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी है। आयोग ने कहा है कि यदि प्रवेश के नियमित दौर के बाद सीटें रिक्त रह जाती हैं, तो विश्वविद्यालय स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित कर सकते हैं। आपको बताते चलें कि कुछ विश्वविद्यालय का कहना था कि उन्हें सीयूईटी में भाग लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। वहीं मामले को संज्ञान में लेते हुए यूसीजी ने विश्वविद्यालयों को बची हुई सीटे भरने के लिए खुद की परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी है। अब वे खुद की परीक्षा आयोजित कर बच्चों का चयन कर सकते हैं। वहीं छात्रों को भी इस नियम के आने के बाद एक और मौका मिल जाएगा। इसके साथ ही जो छात्र किसी एक विश्वविद्याल की प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाया वह दूसरे वि.वि में जाकर परीक्षा दे सकते हैं।

IAS Coaching: आईएएस कोचिंग हब राजेंद्र नगर में फिर दरिया बनीं सड़कें, कई सेंटर्स में घुसा पानी

ओल्ड राजेंद्र नगर में जहां पिछले सप्ताह एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भर जाने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी वहां बुधवार शाम को भारी बारिश के बाद फिर से जलभराव हो गया। नई दिल्ली: दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर के कोचिंग सेंटर राव आईएएस स्टडी सर्किल के बेसमेंट में जलभराव का पानी घुसने की वजह से तीन छात्रों की डूबकर हुई मौत के बाद भी इस सड़क के हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ हैं। यहां पर अतिरिक्त पंप और सुपर सकर मशीन से नाले की सफाई की गई थी, लेकिन कोई इंतजाम काम नहीं आए। हालांकि बारिश तेज होते ही एमसीडी के कर्मचारी अलर्ट होकर मौके पर तो पहुंच गए, लेकिन जलभराव को नहीं रोक पाए। सड़क पर कमर तक भरा पानी बड़ा बाजार मार्ग से लेकर सतपाल भाटिया मार्ग पर कमर तक पानी भर गया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि जलभराव की मात्रा 27 जून की घटना से भी ज्यादा थी। यही वजह रही कि कोचिंग सेंटर राव आईएएस स्टडी सर्किल में फिर पानी पहले भूतल और फिर बेसमेंट में घुस गया। जलभराव के बीच छात्र घटनास्थल पर प्रदर्शन करते हुए नजर आए, जबकि स्थानीय लोग फिर उसी मार्ग को देखने पहुंचे। हालांकि जलभराव की वजह से कोचिंग सेंटर राव आईएएस स्टडी सर्किल के बड़ा बाजार मार्ग और सतपाल भाटिया मार्ग पर यातायात नहीं चल रहा था। जिन लोगों को अपने घर या दुकान तक जाना था, वह जलभराव से गुजरते हुए नजर आए। हालांकि मौके पर दिल्ली पुलिस के जवान मौजूद थे, जो लोगों को जलभराव वाले स्थान पर जाने से रोक रहे थे। साथ ही प्रवेश और निकास को भी जलभराव होने के बाद बंद कर दिया गया था। https://youtu.be/knk0pyuelbo दुकानों से लेकर कोचिंग सेंटर में भरा पानी बारिश कम होने के बाद यहां के लोग अपनी दुकानों से लेकर कोचिंग सेंटर में बाल्टी व वाइपर से पानी निकालते हुए नजर आए। अधिकारियों के अनुसार शंकर रोड पर ढलान है, जिससे शंकर रोड, न्यू राजेंद्र नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर का यह सतपाल भाटिया मार्ग सड़क पर जमा होने वाले पानी की वजह दरिया में तब्दील हो जाता है। ऐसी ही स्थिति करोल बाग मेट्रो स्टेशन की ओर से पूसा रोड पर होती है, जहां ढलान की वजह से पानी जमा होकर बड़ा बाजार मार्ग पर हो जाता है। दोनों ओर से आने वाले पानी से भारी जलभराव हो जाता है।

Delhi Coaching Tragedy: UPSC की तैयारी कराने वाले लगभग 20 कोचिंग सेंटर सील, देखें पूरी लिस्‍ट

दिल्ली के राउज आईएएस कोचिंग सेंटर में तीन छात्रों की मौत के बाद प्रशासन ने अब जबरदस्त कार्रवाई की है। एमसीडी ने दिल्ली के कई कोचिंग सेंटर्स पर कार्रवाई करते हुए लगभग 20 कोचिंग सेंटर सील कर दिये हैं। ज्यादा जानकारी के लिये पढ़िये डाइनामाइट न्यूज की ये रिपोर्ट नई दिल्ली: दिल्ली के राउज आईएएस कोचिंग सेंटर में तीन छात्रों की मौत के बाद प्रशासन की ओर से अब लगातार कार्रवाई की जा रही है। मामला बढ़ता देख एमसीडी ने दिल्ली के कई कोचिंग सेंटर को लगातार सील करने की कार्रवाई की। बता दें कि दिल्ली में अब तक UPSC की तैयारी कराने वाले लगभग 20 कोचिंग सेंटरों के बेसमेंट सील हो चुके हैं। इसमें राउज आईएएस कोचिंग सेंटर के अलावा डॉक्टर दिव्याकृति का कोचिंग सेंटर दृष्टि आईएएस भी शामिल है। बताया जा रहा है कि एमसीडी ने ओझा सर के आईएएस कोचिंग को भी सील करने की कार्रवाई की है। एमसीडी ने बताया कि ये कोचिंग सेंटर नियमों का उल्लंघन कर बेसमेंट में चलाये जा रहे थे। बेसमेंट में पानी घुसने के कारण ही राउज आईएएस कोचिंग सेंटर में तीन छात्रों की मौत हुई थी। बता दें कि दिल्‍ली नगर निगम ने नियमों का उल्लंघन करने के मामले में 60 लाइब्रेरी और 8 कोचिंग संस्थानों को नोटिस भी दिया है। एमसीडी द्वारा रविवार और सोमवार को की गई कार्रवाई में यूपीएससी की तैयारी कराने वाले लगभग 20 कोचिंग सेंटर सील किये जा चुकै हैं। इसमें आईएएस गुरुकुल, प्लूटस अकादमी, आईएएस सेतु, टॉपर्स अकादमी, चहल अकादमी, करिअर पावर, दैनिक संवाद, सिविल्स डेली आईएएस, 99 नोट्स, विद्या गुरु, साई ट्रेडिंग, गाइडेंस आईएएस और ‘इजी फॉर आईएएस’, दृष्टि IAS, वाजी राम IAS इंस्टीट्यूट, वाजीराम और रवि इंस्टीट्यूट, श्रीराम IAS और वाजीराम और आईएएस हब इंस्टीट्यूट आदि के नाम शामिल हैं।

यूजीसी-नेट पेपर को लेकर सरकार के फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से किया इंकार

सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी की परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया है। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कथित प्रश्नपत्र लीक के बाद यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मामले को लेकर मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि जनहित याचिका को खारिज करना जनहित याचिका की योग्यता के आधार पर निर्णय नहीं है क्योंकि यह एक वकील द्वारा दायर किया गया था, न कि पीड़ित छात्रों द्वारा।

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