हरियाणा में 2000 से अधिक पदों पर निकली भर्ती, पढ़ें पूरी खबर

हरियाणा लोक सेवा आयोग ने दो हजार से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती निकाली है। ये नौकरियां हारियाणा के उच्च शिक्षा विभाग में हैं। HPSC Assistant Professor Vacancy: हरियाणा लोक सेवा आयोग ने दो हजार से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती निकाली है। ये नौकरियां हारियाणा के उच्च शिक्षा विभाग में हैं। आयोग ने विभिन्न विषयों के लिये असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें 2424 वैकेंसी हैं। बता दें कि इसके लिये ऑनलाइन आवेदन 7 अगस्त से शुरू होगा। आवेदक को हरियाणा लोक सेवा आयोग की वेबसाइट regn.hpsc.gov.in या hpsc.gov.in पर जाकर आवेदन करना होगा। हरियाणा में निकली असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिये उम्मीदवारों को संबंधित विषय में कम से कम 55 फीसदी अंकों के साथ मास्टर्स की डिग्री होनी चाहिये। इसके अलावा मैट्रिक तक हिंदी/संस्कृत विषय पढ़ा होना जरूरी है। साथ में यूजीसी नेट या सीएसआईआर नेट परीक्षा भी पास होनी जरूरी है। हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा निकाली गई असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में सबसे अधिक 613 वैकेंसी अंग्रेजी विषय के हैं। इसके बाद 316 वैकेंसी भूगोल विषय के लिये है। इसके अलावा गणित में 163, कॉमर्स में 153, हिंदी में 139, फिजिकल एजुकेशन में 126, केमिस्ट्री में 123, इतिहास में 123, बॉटनी में 98, फिजिक्स में 96, जूलॉजी में 91, साइकोलॉजी में 85 समेत कई विषयों में अच्छी खासी वैकेंसी है. भर्ती के लिए उम्र सीमा हरियाणा की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिये उम्मीदवारों की उम्र 15 जुलाई 2024 को 21 से 42 साल के बीच होनी चाहिए। साथ ही आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियम के अनुसार अधिकतम उम्र सीमा में छूट मिलेगी। भर्ती के लिए आवेदन शुल्क सामान्य वर्ग व अन्य राज्य के पुरुष उम्मीदवारों के लिये 1000 रुपये है, जबकि सामान्य वर्ग व अन्य राज्य की महिलीाओं के लिए आवेदन शुल्क 250 रुपये है। इसके अलावा हरियाणा के एससी, एसटी, बीसी-बी और इडब्लूएस वर्ग के उम्मीदवारों के लिए भी आवेदन शुल्क 250 रुपये है। वहीं हरियाणा के दिव्यांग उम्मीरवारों के लिए आवेदन फ्री है।
अग्निवीर वायु सेलेक्शन टेस्ट के लिए आवेदन की लास्ट डेट आज

भारतीय वायु सेना के अग्निवीर वायु सेलेक्शन टेस्ट के लिए आवेदन की आज अंतिम तिथि है। आवेदन कैसे करना इसकी संपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है। नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना के अग्निवीर वायु सेलेक्शन टेस्ट के लिए आवेदन की लास्ट डेट आज है। अभ्यर्थी एयरफोर्स में जॉब पाने के लिये ऑफिशियल वेबसाइट agnipathvayu.cdac.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। फॉर्म भरने से पहले उम्मीदवार को योग्यता एवं मापदंड की जांच करना अनिवार्य है। अग्निवीर वायु सेलेक्शन टेस्ट में भाग लेने के लिये अभ्यर्थी द्वारा संबंधित विषयों के साथ पदानुसार 10+2/ 2 वर्षीय वोकेशनल कोर्स/ 3 वर्षीय इंजीनियरिंग डिप्लोमा आदि किया होना अनिवार्य है। साथ ही अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 17.5 वर्ष से कम और अधिकतम 21 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। आरक्षित श्रेणी से आने वाले उम्मीदवारों को नियमानुसार छूट प्रदान की गई है। आवेदन के लिये अभ्यर्थी को सबसे पहले ऑफिशियल पोर्टल https://agnipathvayu.cdac.in/avreg/candidate/login पर जाना होगा। वेबसाइट के होम पेज पर रजिस्टर बटन पर क्लिक कर मांगी गई जानकारी भरकर पंजीकरण करना होगा। रजिस्ट्रेशन होने के बाद अभ्यर्थी लॉग इन के माध्यम से अन्य डिटेल भरकर फॉर्म को पूरा कर सकेंगे। इसके बाद निर्धारित शुल्क जमा कर भरे हुए फॉर्म का एक प्रिंटआउट निकालना होगा। आवेदन के साथ सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों को 550 रुपये का भुगतान करना होगा। शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय में अब CUET के बिना भी मिलेगा दाखिला, पढ़े पूरी खबर

दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों को दाखिला अब बिना CUET के भी मिल सकेगा। हालांकि सीटें खाली रहने पर ही छात्रों को दाखिला मिल पायेगा। नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन शुरू हो गये हैं। छात्रों को सीयूईटी यूजी रिजल्ट के आधार पर ही दाखिला मिलेगा, लेकिन डीयू ने यह बताया कि कुछ छात्रों को सीयूईटी यूजी रिजल्ट के बिना भी एडमिशन मिल सकता है, लेकिन ऐसा तभी हो होगा, जब यूनिवर्सिटी में सीटें खाली रह जायेंगी। दिल्ली विश्वविद्यालय ने बयान जारी किया है कि दाखिले का प्रोसेस पूरा पर बची सीटों को भरने के लिए 12वीं बोर्ड रिजल्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। UGC ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिये एसओपी जारी की थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। बता दें कि डीयू के 65 कॉलेजों की 71 हजार से ज्यादा सीटों पर सीयूईटी यूजी रिजल्ट के आधार पर एडमिशन दिया जाएगा। UGC ने केंद्रीय यूनिवर्सिटी को दिये निर्देश में कहा कि ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स की सभी सीटें भरना अनिवार्य है। एक पूरे शैक्षणिक वर्ष के लिए सीटें खाली छोड़ देना संसाधनों की बर्बादी है। पिछले साल दिल्ली विश्वविद्यालय में करीब 5000 सीटें खाली रह गई थीं।
दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में छात्रों की मौत को लेकर कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, जानें पूरा अपडेट

ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी। मामले में पुलिस ने कोचिंग सेंटर संचालकों को गिरफ्तार किया था। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: छात्रों की मौत के मामले में बेसमेंट के सह मालिकों की जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मामला सीबीआई के हाथों में दे दिया है। मामले की जांच अब सीबीआई के द्वारा की जाएगी। युवा डाइनामाइट संवाददाता के अनुसार दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को उस कोचिंग सेंटर के बेसमेंट के चार सह-मालिकों की जमानत याचिका का निपटारा कर दिया। जहां पिछले महीने सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी करने वाले तीन विद्यार्थियों की डूबने से मौत हो गई थी। अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील पर गौर किया कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है
दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले को लिए महत्वपूर्ण घोषणा, जानें पूरा अपडेट

दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने वालों के लिए वि.वि की तरफ से जरूरी तारीख का ऐलान कर दिया गया है। जिन छात्रों को दाखिला हो गया है वे इस डेट से कॉलेज जा सकेंगे। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक के नए बैच की कक्षाएं 29 अगस्त से शुरू होने जा रही है। नए एडमिशन वाले छात्रों को 29 अगस्त से कॉलेज जाना शुरू करना है। युवा डाइनामाइट संवाददाता के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय ने शनिवार को 2024-2025 सत्र में प्रवेश लेने वाले स्नातक के प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए बहुप्रतीक्षित शैक्षणिक कैलेंडर जारी कर दिया। जिसके अनुसार स्नातक के नए बैच की कक्षाएं 29 अगस्त से शुरू होंगी। आपको बताते चलें कि हर साल दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले बच्चों की लाइन लगी रहती है। विश्वविद्यालय की तरफ से स्नातक में दाखिले पूरे कर लिए गए हैं। वहीं अब छात्रों के लिए शैक्षणिक कैलेंडर जारी कर दिया गया है।
केरल लोक सेवा आयोग ने इस पद के लिये निकाली भर्ती, मिलेगी अच्छी सैलरी

केरल लोक सेवा आयोग ने नोटिफिकेशन जारी कर केरल पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में भर्ती हेतु वैकेंसी निकाली है। Kerala PSC Recruitment 2024: केरल लोक सेवा आयोग ने भर्ती नोटिफिकेशन जारी किया गया है। नोटिफिकेशन के अनुसार केरल पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में भर्ती की जाएगी। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक साइट 4 सितंबर 2024 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने वाले उम्मीदवार को 12वीं पास होने के साथ पोल्ट्री उत्पादन/डेयरी विज्ञान/प्रयोगशाला तकनीक में डिप्लोमा पास होना चाहिए। साथ ही पीपीबीएम में ग्रेजुएशन कर चुके अभ्यर्थी इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं। भर्ती अभियान के माध्यम से फार्म असिस्टेंट ग्रेड II के 33 पद भरे जाएंगे। इस भर्ती के लिये आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की उम्र 18 साल से लेकर 36 साल के बीच होनी चाहिए। इन पद पर चयनित उम्मीदवारों को 27,900 रुपये से लेकर 63,700 रुपये के बीच वेतन दिया जाएगा। वहीं आवेदन करने वाले इच्छुक व पात्र उम्मीदवारों को आधिकारिक साइट keralapsc.gov.in पर जाकर आवेदन करना होगा।
शिक्षा का गिरता स्तर और बढ़ती फीस: नीति-निर्माताओं में इच्छा शक्ति का अभाव या असंवेदनशील दृष्टिकोण?

देश में स्कूल से लेकर कॉलेज समेत हर शिक्षण संस्थान में लगातार फीस बढ़ोत्तरी एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है लेकिन इसके साथ शिक्षा का गिरता स्तर भी चिंताजनक है। पढ़िये प्रो. (डॉ.) सरोज व्यास का यह ब्लॉग नई दिल्ली: “शिक्षा के गिरते स्तर और बढ़ती फीस के लिए ज़िम्मेदार कौन” ? लेख द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मन की व्यथा को विचारशील विवेकी पाठकों तक प्रेषित करने मात्र से क्या आपका कर्तव्य पूरा हो गया? क्या केवल प्रश्नचिन्ह लगाना पर्याप्त है? क्या आपके पास कोई सुझाव है? सहयोगी डॉ. गीता ने पूछा – समस्या के साथ समाधान होने चाहिये, ऐसा आप कहती है। मैंने कहा-समाधान और सुझाव हैं, लेकिन कोई समझना ही नहीं चाहता। “भारत की 28वीं शिक्षा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी (26 मई 2014-5 जुलाई 2016) से लेकर दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सीसोदिया (14 फरवरी 2015–28 फरवरी 2023) तक से अथक प्रयासों के बाद मिलने का समय लेने में तो सफल हो गयी, किन्तु हाथ लगी केवल “घंटों की प्रतीक्षा और निराशा”। सांत्वना थी अथवा प्रोत्साहन नहीं जानती लेकिन उसने कहा – कोई बात नहीं, फिर भी लिखिए शायद किसी को कुछ समझ में आ जाए । आपको लेखन के माध्यम से जन सामान्य की आवाज़ उठानी चाहिए। जैसे आप यशपाल कमेटी का उल्लेख कर रही है, भविष्य में कोई आपके सुझावों का उद्धरण दे सकता है। केवल त्रुटियों एवं असफलताओं की चर्चा मेरी मंशा नहीं हैं, लेख के माध्यम से धरातलीय स्तर पर सुझाव देने का दु:स्साहस कर रही हूँ । दिन-प्रतिदिन संस्थानों के अध्यक्षों, निदेशकों, प्राचार्यों और शिक्षक समुदाय के समक्ष आने वाली चुनौतियों तथा कठिनाइयों की ओर सत्ता और शीर्षासन पर विराजमान शिक्षा मंत्रियों, विश्वविद्यालय के कुलपतियो एवं तथाकथित नीति-निर्माता शिक्षाविदों को ध्यान देने की आवश्यकता है। बस्ते का बोझ कम नहीं हुआयशपाल कमेटी 1993 की रिपोर्ट का शीर्षक ‘शिक्षा बिना बोझ के’ था, इससे पूर्व नरेन्द्र देव समिति – 1947, राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 1986, में भी इस सम्बन्ध में सुझाव दिए गये थे। शिक्षा मंत्रालय शैक्षिक गुणवत्ता के लिए प्रतिबद्ध है और आवंटित बजट धनराशि को ख़र्च भी कर रहा है। फिर क्यों आज तक इन सिफारिशों को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया ? क्या सरकारों द्वारा गठित समितियों, कमेटियो और आयोगों का गठन केवल हितधारकों (स्टेकहोल्डर) के मुहं पर ताला लगाने के लिए किया जाता है कि देखिए सरकार कितनी संजीदा है। यदि यह सच नहीं है तो सुझावों की अनदेखी क्यों? सूर्या फाउंडेशन के संस्थापक एवं चैयरमैन, पद्मश्री जयप्रकाश जी के नेतृत्व एवं प्रो. एच एल शर्मा जी के मार्गदर्शन में पहली से पाँचवी तक, एक कक्षा-एक किताब को सूर्या भारती के शिक्षाविदों ने वर्ष 2000 में ही तैयार कर दिया था। अन्य शिक्षाविदों और समाज सेवी संस्थाओं द्वारा भी निरंतर इस क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। सभी के द्वारा समय-समय पर महामहिम राष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री जी और शिक्षा मंत्रियों के संज्ञान में भी इसे लाया गया है। नि: स्वार्थ किए गये प्रयास एवं परिश्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा तो होती है, लेकिन नियमों को कठोरता से लागू किए जाने की दिशा में कोई ठोस क़दम नहीं उठाये जाते । यदि उठाये जाते तो पुन: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बस्ते का बोझ कम कैसे हो ? सम्बन्ध में सुझाव/सिफारिश देने की आवश्यकता नहीं होती। सुझावसही अर्थों में पुस्तके अध्यापकों के लिए सूचनाओं का संग्रह और सैद्धांतिक दिशा-निर्देशिका होती है, लेकिन शैक्षिक व्यवस्था ऐसी है कि विद्यार्थियों के बस्ते में अध्ययन सामग्री (पुस्तकें) रटने के लिए ठूस दी जाती है।पाठ्य पुस्तके विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में रखी जाये, विद्यार्थी सर्वप्रथम अध्यापक द्वारा दिए जाने वाली विषयक जानकारी को सुनें, उसे दोहराये, ग्रहण किए गये ज्ञान को लिखे और तदुपरांत पढ़कर उस पर चिंतन-मनन करें। शिक्षा के सभी स्तरों पर पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगात्मक प्रशिक्षण पर अधिकाधिक बल दिया जाए, क्योंकि व्यवसाय और रोजगार के लिए यह आवश्यक है। पाठ्यक्रम का निर्माण मांग और पूर्ति के नियमानुसार हितधारकों के प्रतिनिधियों (शिक्षार्थी, शिक्षक, अभिभावक, नीति-निर्माता और अनुभवी शिक्षाविद) से विचार-विमर्श करके किया जाए। बढ़ती फीस के लिए ज़िम्मेदार कौन?इस यक्ष प्रश्न का उत्तर देना सामर्थ्य से बाहर है, किन्तु मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों की लाचारी मन को द्रवित कर देती है। 2-3 संतानों को पढ़ाना, दो समय की रोटी की व्यवस्था में लगे माता-पिता के लिए बहुत बड़ी चुनौती है, एक बच्चे की फीस लाखों में कहाँ से लाये । प्रतिस्पर्धा की दौड़ में शैक्षिक गुणवत्ता की चर्चा व्यर्थ है। जिस गति से फीस में बढ़ोतरी हुई है, उससे अधिक गति से शैक्षिक बेरोजगारी बढ़ी है। उदाहरण के लिए यदि गुरु गोबिन्द सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के फीस संरचना (structure) का तुलनात्मक विश्लेषण कर लिया जाए तो जमीन-आसमान का अंतर स्पष्ट हो जायेगा । सुधी पाठकों के लिए दो लिंक साझा कर रही हूँ। http://ipu.ac.in/norms/statues/s27-27.pdf http://www.ipu.ac.in/pubinfo2024/nt300424548%20(2).pdf सुझावस्वायत संस्थाओं (विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय) की फीस मान्यता देने वाली (Affiliating body) संस्थाओं के माध्यम से ऑन लाइन हो सकती है। छात्रवृतियाँ देने की अपेक्षा एडमिशन के समय ही फीस माफ़ अथवा कम की जा सकती है। पाठ्यक्रम की अवधि के अनुसार शिक्षण सामग्री को दो भागों (सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक) में विभाजित किया जाए तथा सैद्धांतिक शिक्षण के लिए फीस की 50% राशि ही शिक्षण संस्थाओं को दी जाए। प्रयोगात्मक शिक्षण-प्रशिक्षण सम्बंधित संस्थाओं में नि: शुल्क करवाया जाए । मेरा यह सुझाव “हींग लगे ना फिटकरी, रंग आए चोखा” कहावत को चरितार्थ करता है। इससे अभिभावकों को केवल आधी फीस ही देनी होगी तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को वर्ष दो वर्ष के लिए अवैतनिक जनशक्ति (Manpowar) मिलेगी। नौकरी के लिए इच्छुक युवाओं को रुचि और कौशल के आधार पर नौकरियां, स्व रोजगार हेतु प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन तथा उच्च शिक्षा के लिए उपाधि प्राप्त हो सकेगी। विकसित भारत @2047 के विजन की पूर्ण सफलता के लिए कमेटियों के गठन, सुझावों और लेख से बात नहीं बनेगी। सत्तारुढ़ राजनेताओं एवं नीति-निर्माताओं की इच्छा शक्ति और मानवीय संवेदना को झकझोरने का समय आ गया है। (लेखिका प्रो. (डॉ.) सरोज व्यास, वर्तमान में फेयरफील्ड तकनीक एवं प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली , निदेशक के पद पर कार्यरत है ।)
NEET UG : दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए शुरू हुई प्रक्रिया, जानें क्या है डीयू का पहला एक्शन

डीयू ने नीट यूजी काउंसलिंग के लिए एक कदम आगे बढ़ा दिया है। छात्रों को डीयू में दाखिले का बेसब्री से इंतजार था। जिसकों लेकर डीयू ने भी काम शूरू कर दिया है। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने नीट यूजी काउंसलिंग के माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीडब्ल्यू (सशस्त्र बलों के कर्मियों के बच्चे, विधवाएं) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए दस्तावेज जमा करने की विंडो खोल दी है। सबमिशन पोर्टल पर चिकित्सा विज्ञान संकाय की वेबसाइट के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। आधिकारिक नोटिस के अनुसार, नीट यूजी परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले और 85% दिल्ली कोटा के तहत 2024-25 शैक्षणिक सत्र में विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश चाहने वाले CW श्रेणी के उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से CW रियायतों के लिए अपनी पात्रता साबित करने वाले प्रासंगिक दस्तावेज जमा करने होंगे।
UGC: खाली बची सीटों को इस तरह भरेंगे विश्वविद्यालय, जानें आपके काम की खबर

अगर आप भी कॉलेज में दाखिला लेना चाहते हैं तो आपके लिए यूजीसी की तरफ से नई घोषणा की गई है। अगर किसी की रैंक कम आई है या सीयूईटी की परीक्षा नहीं दी है तो उन्हें एक और मौका दिया जा रहा है। पढ़िये युवा डाइनामाइट की खास रिपोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विश्वविद्यालयों को स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी है। आयोग ने कहा है कि यदि प्रवेश के नियमित दौर के बाद सीटें रिक्त रह जाती हैं, तो विश्वविद्यालय स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित कर सकते हैं। आपको बताते चलें कि कुछ विश्वविद्यालय का कहना था कि उन्हें सीयूईटी में भाग लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। वहीं मामले को संज्ञान में लेते हुए यूसीजी ने विश्वविद्यालयों को बची हुई सीटे भरने के लिए खुद की परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी है। अब वे खुद की परीक्षा आयोजित कर बच्चों का चयन कर सकते हैं। वहीं छात्रों को भी इस नियम के आने के बाद एक और मौका मिल जाएगा। इसके साथ ही जो छात्र किसी एक विश्वविद्याल की प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाया वह दूसरे वि.वि में जाकर परीक्षा दे सकते हैं।
विश्वविद्यालयों की UG/PG सीटें अब नहीं रहेंगी खाली, CUET के बाद प्रवेश परीक्षा कराने की UGC ने दी छूट
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों और सम्बद्ध/घटक महाविद्यालयों में CUET के आधार पर UG/PG दाखिले को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs) जारी किए हैं। नई दिल्ली: NTA द्वारा आयोजित CUET UG/PG 2024 में प्राप्त स्कोर के आधार पर केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने जा रहे हैं छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खबर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों और सम्बद्ध/घटक महाविद्यालयों में UG/PG दाखिले को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs) जारी किए हैं। इस सम्बन्ध में UGC अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार द्वारा आज, 1 अगस्त को साझा की गई जानकारी के मुताबिक CUET स्कोर के आधार पर दाखिले के बाद बची रह गई UG/PG कोर्सेस की सीटों को भरने के लिए विश्वविद्यालय अतिरिक्त मानकों का प्रयोग कर सकते हैं, जिसमें अलग प्रवेश परीक्षा में शामिल हैं। UGC द्वारा केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए तैयार की गई SOPs में कहा गया है कि यदि किसी कोर्स की सीटें बची रह जाती हैं तो इसके लिए संस्थान द्वारा निम्नलिखित मानक अपनाए जा सकते हैं:- • विश्वविद्यालय अपने स्तर पर प्रवेश परीक्षा का आयोजन कर सकते हैं या विश्वविद्यालय के सम्बन्धित द्वारा छंटनी परीक्षा (Screening Test) का आयोजन किया जा सकता है। • विश्वविद्यालय छात्र-छात्राओं का दाखिला योग्यता परीक्षा (Qualifying Exam) के प्राप्तांकों के आधार पर भी कर सकते हैं। CUET UG PG 2024: सीयूईटी के अंक ही मुख्य आधार हालांकि, स्टूडेंट्स को ध्यान देना चाहिए कि UGC की तरफ से जारी SOPs में कहा गया है कि सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों व सम्बद्ध/घटक महाविद्यालयों में UG/PG दाखिले के लिए मुख्य आधार CUET के अंक ही होंगे। ऐसे में यदि CUET से बची सीटों के लिए यदि प्रवेश परीक्षा का आयोजन भी किया जाता है तो अंतिम चयन सूची (Merit List) तैयार करने में CUET और प्रवेश परीक्षा दोनों के अंकों का प्रयोग किया जाएगा। CUET UG PG 2024: खाली रह जाती थीं सीटें UGC अध्यक्ष ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में CUET के आधार पर UG/PG दाखिले के लिए आयोजित काउंसलिंग के 3-4 राउंड के बाद भी सीटें खाली रह जाने की सूचनाएं UGC को प्राप्त हो रही थीं। आयोग ने माना कि किसी भी शैक्षणिक वर्ष में रिक्त सीटें न सिर्फ संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दी जा रही उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा से कई छात्र-छात्राएं वंचित हो जा रहे थे। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए SOPs तैयार की गई हैं।