Comscore Analytics
Section-Specific Split Button

Board Exam Tips: बोर्ड परीक्षा में रोज कितने घंटे पढ़ना है जरूरी? टॉपर्स की तरह तैयारी करनी है तो अपनाएं ये आसान तरीके

Board Exam Tips: बोर्ड परीक्षा नजदीक आते ही छात्रों के मन में एक सवाल बार-बार आता है कि आखिर अच्छे नंबर लाने के लिए रोज कितने घंटे पढ़ाई करनी चाहिए? कोई 8 घंटे पढ़ने की सलाह देता है, तो कोई 12 घंटे तक किताबों में लगे रहने को कहता है। लेकिन क्या सच में ज्यादा घंटे पढ़ने से ही अच्छे नंबर आते हैं? असल में परीक्षा की तैयारी में पढ़ाई का समय ही नहीं, बल्कि सही तरीका, नियमित रिवीजन और लिखकर अभ्यास करना भी अहम भूमिका निभाता है। रोज कितने घंटे पढ़ना है जरूरी? (Board Exam Tips) बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए स्कूल के बाद रोज 3 से 4 घंटे ध्यान लगाकर पढ़ाई करना एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। हालांकि, पढ़ाई का सही समय हर छात्र के लिए अलग होता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पाठ्यक्रम कितना बचा है, कौन-से विषय कठिन लगते हैं और परीक्षा में कितना समय बाकी है। अगर परीक्षा नजदीक है और कई अध्याय पूरे करने बाकी हैं, तो पढ़ाई का समय धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है। लेकिन लगातार कई घंटे किताब लेकर बैठने के बजाय बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेना बेहतर है। पढ़ते समय मोबाइल को दूर रखें, ताकि बार-बार ध्यान न भटके। टॉपर्स की तरह तैयारी करनी है तो बनाएं टाइम टेबल अच्छे नंबर लाने के लिए पढ़ाई को सही तरीके से बांटना जरूरी है। सबसे पहले सभी विषयों की सूची बनाएं और देखें कि किन अध्यायों की तैयारी पूरी है और किन पर ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है। इसके बाद रोज का टाइम टेबल बनाएं। कठिन विषयों को उस समय पढ़ें, जब आपका ध्यान सबसे अच्छा रहता हो। एक ही विषय को लगातार कई घंटे पढ़ने के बजाय अलग-अलग विषयों को समय दें। हर दिन छोटे लक्ष्य तय करें। सिर्फ पढ़ना नहीं, लिखकर अभ्यास करना भी जरूरी कई छात्र किताबें पढ़ लेते हैं, लेकिन परीक्षा में जवाब लिखते समय उन्हें परेशानी होती है। इससे बचने के लिए रोज लिखने का अभ्यास करें। गणित में सवाल हल करें, विज्ञान में जरूरी डायग्राम और फॉर्मूले दोहराएं और सामाजिक विज्ञान में महत्वपूर्ण घटनाओं, तारीखों और मुख्य बिंदुओं के नोट्स बनाएं। हिंदी और अंग्रेजी में उत्तर लिखने के साथ व्याकरण और लेखन का अभ्यास भी करें। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र और सैंपल पेपर हल करना भी फायदेमंद हो सकता है। इससे सवालों के पैटर्न को समझने और तय समय में पेपर पूरा करने की आदत बनाने में मदद मिलती है। अच्छे नंबरों के लिए रिवीजन को न करें नजरअंदाज पढ़ा हुआ याद रखने के लिए बार-बार दोहराना जरूरी है। आज जो टॉपिक पढ़ें, उसे अगले दिन कुछ मिनट जरूर दोहराएं। फिर सप्ताह के आखिर में उसी टॉपिक का दोबारा रिवीजन करें। महत्वपूर्ण फॉर्मूले, परिभाषाएं, तारीखें और कठिन सवाल एक अलग कॉपी में लिख सकते हैं। परीक्षा के आखिरी दिनों में ये छोटे नोट्स काफी काम आएंगे। हर सप्ताह अपनी तैयारी की जांच भी करें। अगर किसी विषय में बार-बार गलती हो रही है, तो उसे ज्यादा समय दें। केवल पसंदीदा विषय पढ़ते रहने से बचें। नींद और आराम से भी सुधरेगी तैयारी (Board Exam Tips) अच्छे नंबर लाने के लिए देर रात तक जागना या नींद कम करना जरूरी नहीं है। पर्याप्त नींद लेने से ध्यान लगाने और पढ़ी हुई चीजों को याद रखने में मदद मिलती है। पढ़ाई के बीच छोटे ब्रेक लें, थोड़ा टहलें और समय पर खाना खाएं। दूसरों के पढ़ने के घंटों से अपनी तुलना न करें। आपकी तैयारी कितनी बेहतर हो रही है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। आखिर कितने घंटे पढ़ना सबसे अच्छा है? बोर्ड परीक्षा में सफलता के लिए कोई एक तय संख्या सभी छात्रों पर लागू नहीं होती। स्कूल के बाद 3 से 4 घंटे की एकाग्र पढ़ाई से शुरुआत करें और अपनी जरूरत के हिसाब से समय बढ़ाएं। नियमित अभ्यास, सही टाइम टेबल, पुराने प्रश्नपत्र और समय पर रिवीजन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

DMRC Recruitment 2026: दिल्ली मेट्रो में 73 पदों पर भर्ती! 2.08 लाख तक सैलरी, लेकिन आवेदन से पहले जान लें ये जरूरी शर्तें

DMRC Recruitment 2026: दिल्ली मेट्रो में काम करने का मौका तलाश रहे अनुभवी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने अलग-अलग विभागों में 73 पदों पर भर्ती निकाली है। इन पदों पर सैलरी 2.08 लाख रुपये तक बताई गई है। हालांकि, इस भर्ती में हर कोई आवेदन नहीं कर सकता। आवेदन करने से पहले योग्यता, उम्र और नौकरी से जुड़ी शर्तों को समझना जरूरी है। दिल्ली मेट्रो में किन पदों पर होगी भर्ती? DMRC के जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, वास्तुकला, सिविल एवं ट्रैक, सिग्नलिंग एवं दूरसंचार और पर्यावरण विभागों में भर्ती की जाएगी। इसमें सुपरवाइजर, इंजीनियर, सीनियर इंजीनियर समेत अलग-अलग पद शामिल हैं। ये नियुक्तियां जयपुर फेज-2 और दिल्ली-एनसीआर से जुड़े कार्यों के लिए प्रतिनियुक्ति और सेवानिवृत्ति के बाद संविदात्मक नियुक्ति के आधार पर की जाएंगी। यानी यह भर्ती मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है, जिन्हें संबंधित क्षेत्र में काम करने का अनुभव है। 4 नवंबर तक कर सकते हैं आवेदन इस भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 4 नवंबर 2026 तय की गई है। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार निर्धारित आवेदन फॉर्म भरकर डाक या ईमेल के जरिए अपना आवेदन भेज सकते हैं। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को संबंधित पद का विज्ञापन ध्यान से पढ़ना चाहिए। पद के अनुसार अनुभव, वर्तमान वेतन और अन्य शर्तें पूरी करना जरूरी है। अधूरी जानकारी या जरूरी दस्तावेजों की कमी से आवेदन में परेशानी हो सकती है। फ्रेशर्स के लिए नहीं है यह भर्ती इस भर्ती की सबसे अहम बात यह है कि इसमें नए उम्मीदवारों के लिए सामान्य फ्रेशर भर्ती जैसा मौका नहीं दिया गया है। पात्रता मुख्य रूप से उम्मीदवार के अनुभव, मौजूदा वेतन और संबंधित विभाग में काम करने की पृष्ठभूमि के आधार पर तय होगी। उम्मीदवार वर्तमान में किसी सरकारी संगठन, भारतीय रेलवे, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) या मेट्रो संगठन में कार्यरत होना चाहिए या संबंधित शर्तों के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारी होना चाहिए। आवेदन में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की जानकारी भी देनी होगी। पात्रता की गणना 1 अक्टूबर 2026 के आधार पर की जाएगी। इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन में अपने पद की शर्तें जरूर जांच लें। कितनी होनी चाहिए उम्र? प्रतिनियुक्ति के आधार पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की अधिकतम उम्र 55 वर्ष होनी चाहिए। वहीं, सेवानिवृत्ति के बाद संविदात्मक नियुक्ति के लिए उम्मीदवार की उम्र 55 से 62 वर्ष के बीच होनी चाहिए। दोनों श्रेणियों में उम्र की गणना 1 अक्टूबर 2026 के अनुसार होगी। उम्मीदवारों को आवेदन से पहले अपनी उम्र और संबंधित श्रेणी की पात्रता का मिलान कर लेना चाहिए। कितने साल की होगी नौकरी? नोटिफिकेशन के मुताबिक, प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति की सामान्य अवधि पांच साल होगी। विशेष परिस्थितियों में इसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, यह अवधि कर्मचारी की निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु से आगे नहीं जा सकती, यदि वह पहले पूरी हो जाती है। इंटरव्यू से होगा चयन उम्मीदवारों का चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। सेवानिवृत्ति के बाद संविदात्मक नियुक्ति के लिए व्यक्तिगत इंटरव्यू के साथ मेडिकल फिटनेस जांच भी होगी। इसलिए पात्र उम्मीदवारों को अपने अनुभव और नौकरी से जुड़े दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। DMRC भर्ती के लिए कैसे करें आवेदन? आवेदन करने के लिए उम्मीदवार DMRC की आधिकारिक वेबसाइट delhimetrorail.com पर जाएं और विज्ञापन संख्या DMRC/PERS/22/HR/2026 (235) देखें। इसके बाद संबंधित पद और विभाग की शर्तें पढ़कर आवेदन फॉर्म डाउनलोड करें। फॉर्म में व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता, वर्तमान नौकरी, वेतन और अनुभव का विवरण भरें। जरूरी दस्तावेज संलग्न करने के बाद आवेदन निर्धारित पते पर स्पीड पोस्ट से भेजें। आवेदन की स्कैन कॉपी और दस्तावेज ईमेल के जरिए career@dmrc.org.in पर भी भेजे जा सकते हैं।

Supreme Court Recruitment 2026: सुप्रीम कोर्ट में नौकरी का बड़ा मौका! 2.08 लाख रुपये तक सैलरी, जानें कौन कर सकता है आवेदन

Supreme Court Recruitment 2026: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अनुभवी उम्मीदवारों के लिए सुप्रीम कोर्ट में काम करने का शानदार अवसर सामने आया है। कोर्ट मास्टर (शॉर्टहैंड) के 20 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस पद पर चयनित उम्मीदवारों को हर महीने 67,700 रुपये से लेकर 2,08,700 रुपये तक का वेतन मिल सकता है। लेकिन इस भर्ती में सिर्फ डिग्री होना काफी नहीं है, कुछ खास शर्तें भी पूरी करनी होंगी। सुप्रीम कोर्ट में कितने पदों पर होगी भर्ती? सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने कोर्ट मास्टर (शॉर्टहैंड) के 20 अस्थायी पदों पर सीधी भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। यह राजपत्रित पद है। भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 25 अक्टूबर 2026 से शुरू होंगे और योग्य उम्मीदवार 15 नवंबर 2026 को रात 11:55 बजे तक आवेदन कर सकेंगे। अधिसूचना 15 अक्टूबर 2026 को जारी की गई है। हालांकि, प्रशासनिक जरूरत के अनुसार पदों की संख्या में बदलाव किया जा सकता है। कितनी मिलेगी सैलरी? (Supreme Court Recruitment 2026) इस पद के लिए वेतनमान पे मैट्रिक्स के लेवल-11 के तहत निर्धारित है। चयनित उम्मीदवारों को 67,700 रुपये प्रतिमाह शुरुआती मूल वेतन मिलेगा। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार अन्य भत्ते भी दिए जाएंगे। अधिकतम वेतनमान 2,08,700 रुपये तक है। कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती के लिए भारत के किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री होना जरूरी है। इसके साथ उम्मीदवारों को कुछ तकनीकी और अनुभव संबंधी शर्तें भी पूरी करनी होंगी। अंग्रेजी शॉर्टहैंड में कम से कम 120 शब्द प्रति मिनट की गति होनी चाहिए। कंप्यूटर पर अंग्रेजी टाइपिंग की गति कम से कम 40 शब्द प्रति मिनट होनी चाहिए। सरकारी विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या वैधानिक संस्था में संबंधित पद पर कम से कम पांच साल की नियमित सेवा का अनुभव जरूरी है। यह अनुभव निजी सचिव, वरिष्ठ निजी सहायक, निजी सहायक या वरिष्ठ आशुलिपिक के पद पर होना चाहिए। सभी योग्यताएं और अनुभव 1 अक्टूबर 2026 तक पूरे होने चाहिए। उम्र सीमा क्या है? (Supreme Court Recruitment 2026) 1 अक्टूबर 2026 को उम्मीदवार की उम्र 30 से 45 साल के बीच होनी चाहिए। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी (नॉन-क्रीमी लेयर) और पूर्व सैनिकों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के विभागीय उम्मीदवारों के लिए अधिकतम उम्र की सीमा निर्धारित नहीं है। चार चरणों में होगा चयन चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, शॉर्टहैंड टेस्ट, टाइपिंग टेस्ट और इंटरव्यू शामिल हैं। लिखित परीक्षा 100 अंकों की होगी, जिसमें 100 सवालों के जवाब देने के लिए 90 मिनट मिलेंगे। इसमें अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान, न्यायपालिका से जुड़े संवैधानिक प्रावधान, सुप्रीम कोर्ट के नियम और कंप्यूटर ज्ञान की जांच होगी। पास होने के लिए कम से कम 50 अंक जरूरी हैं। इसके बाद अंग्रेजी में 120 शब्द प्रति मिनट की गति से सात मिनट का डिक्टेशन होगा। इसे कंप्यूटर पर टाइप करने के लिए 45 मिनट मिलेंगे। टाइपिंग टेस्ट में 40 शब्द प्रति मिनट की गति से 10 मिनट तक टाइप करना होगा। इंटरव्यू 30 अंकों का होगा। कहां होगी परीक्षा? (Supreme Court Recruitment 2026) लिखित परीक्षा देशभर के 69 निर्धारित शहरों में आयोजित की जाएगी। इनमें दिल्ली-एनसीआर, पटना, लखनऊ, जयपुर, कोलकाता, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, भोपाल और चंडीगढ़ जैसे शहर शामिल हैं। शॉर्टहैंड और टाइपिंग टेस्ट दिल्ली-एनसीआर में होंगे, जबकि इंटरव्यू दिल्ली में प्रत्यक्ष या ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया जा सकता है। कब जारी होगा एडमिट कार्ड? प्रवेश पत्र केवल ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और बैंकों में काम करने वाले उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन के समय अपने नियोक्ता से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) देना होगा। भर्ती के किसी भी चरण में शामिल होने के लिए यात्रा या दैनिक भत्ता नहीं दिया जाएगा। वस्तुनिष्ठ परीक्षा की संभावित तारीख 7 दिसंबर 2026 है। उत्तर कुंजी 8 दिसंबर को जारी होने की संभावना है और उम्मीदवार 8 से 9 दिसंबर तक उस पर आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।

NTA Exam Centres: NEET-JEE देने वाले छात्रों के लिए बड़ी राहत! अब हर जिले में बन सकते हैं परीक्षा केंद्र, जानें क्या बदलेगा

NTA Exam Centres: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। NEET-UG, JEE Main और CUET जैसी बड़ी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों को अब परीक्षा देने के लिए दूर के शहरों का सफर न करना पड़े, इसके लिए एक अहम सिफारिश की गई है। अगर इस प्रस्ताव पर अमल होता है, तो छात्रों का समय और पैसा दोनों बच सकते हैं। हर जिले में परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश (NTA Exam Centres) शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को देश के हर जिले में कम से कम एक स्थायी कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश की है। इसका मकसद छात्रों को अपने घर के नजदीक परीक्षा देने का मौका देना है। फिलहाल कई छात्रों को परीक्षा केंद्र दूसरे शहरों में मिलने पर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे बस, ट्रेन या दूसरे साधनों का किराया बढ़ जाता है। बाहर रुकने की जरूरत पड़े, तो होटल और खाने का खर्च भी उठाना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों के छात्रों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है। सरकारी स्कूलों में तैयार हो सकते हैं सेंटर (NTA Exam Centres) प्रस्ताव के तहत सरकारी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में मौजूद कंप्यूटर लैब को परीक्षा केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना पर जोर दिया गया है। केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, पीएम-श्री स्कूल और सरकारी तकनीकी संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की जांच कर उन्हें परीक्षा के लिए तैयार किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए कंप्यूटर, तेज इंटरनेट, बिजली, सुरक्षा और निगरानी जैसी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी। इससे परीक्षा कराने के लिए निजी केंद्रों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। पेपर लीक रोकने के लिए भी सुझाव (NTA Exam Centres) परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए समिति ने कई अहम सुझाव दिए हैं। इनमें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मजबूत करना, सरकारी परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाना और छात्रों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा का अभ्यास कराने के लिए मॉक टेस्ट की सुविधा देना शामिल है। समिति ने NEET-UG को भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने की सिफारिश की है। छात्रों को कैसे मिलेगा फायदा? (NTA Exam Centres) अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो छात्रों को परीक्षा के लिए दूसरे शहर जाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे यात्रा का खर्च बचेगा और परीक्षा के दिन लंबी दूरी तय करने का तनाव भी घटेगा। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों को इसका फायदा मिल सकता है।

Private MBBS: प्राइवेट कॉलेज से कर रहे हैं MBBS? हॉस्टल में रहने से पहले बना लें ये बजट, वरना महीने के आखिर में पड़ सकती है पैसों की कमी

Private MBBS: प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से MBBS करना छात्रों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है। पढ़ाई की फीस के अलावा हॉस्टल, मेस, किताबें, मेडिकल इक्विपमेंट और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पैसे खर्च होते हैं। कई बार छात्र इन खर्चों का पहले से हिसाब नहीं रखते और महीने के आखिर में बजट बिगड़ जाता है। अगर आप भी हॉस्टल में रहकर MBBS कर रहे हैं, तो कुछ आसान तरीकों से अपने खर्चों को संभाल सकते हैं। हर महीने मिलने वाले पैसों का पहले से बनाएं हिसाब हॉस्टल लाइफ में बजट संभालने का सबसे आसान तरीका है कि महीने की शुरुआत में ही अपने खर्चों की योजना बना लें। सबसे पहले यह तय करें कि आपको परिवार से हर महीने कितने पैसे मिलते हैं। इसके बाद हॉस्टल और मेस की फीस, मोबाइल रिचार्ज, आने-जाने के खर्च और रोजमर्रा के सामान के लिए पैसे अलग रखें। जरूरी खर्चों का हिसाब लगाने के बाद देखें कि आपके पास कितनी रकम बच रही है। इस पैसे का इस्तेमाल आप अपनी जरूरतों के हिसाब से कर सकते हैं। कोशिश करें कि हर महीने कुछ पैसे बचाकर भी रखें, ताकि अचानक कोई जरूरत आने पर परेशानी न हो। खाने-पीने के छोटे खर्च बढ़ा सकते हैं परेशानी (Private MBBS) हॉस्टल में रहने वाले छात्रों का काफी पैसा खाने-पीने पर खर्च हो जाता है। कभी कैंटीन में स्नैक्स खाना, कभी मेस का खाना पसंद न आने पर बाहर से खाना मंगाना या दोस्तों के साथ बाहर जाना आम बात है। एक बार में ये खर्च छोटे लगते हैं, लेकिन बार-बार ऐसा करने से महीने का बजट बिगड़ सकता है। इससे बचने के लिए पहले ही तय कर लें कि महीने में बाहर खाने या ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने पर कितने पैसे खर्च करने हैं। अगर हॉस्टल में मेस की सुविधा है, तो उसका ज्यादा इस्तेमाल करें। बाहर खाने पर पूरी तरह रोक लगाने की जरूरत नहीं है, लेकिन खर्च को तय सीमा में रखना जरूरी है। किताबों और मेडिकल सामान के लिए अलग रखें पैसे MBBS की पढ़ाई में किताबें, नोट्स, एप्रन, स्टेथोस्कोप और दूसरी जरूरी चीजों की जरूरत पड़ती है। इन पर हर महीने खर्च हो, यह जरूरी नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ने पर एक साथ ज्यादा पैसे लग सकते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए हर महीने अपनी रकम में से कुछ पैसे पढ़ाई और मेडिकल सामान के लिए अलग रखें। इससे जब कोई जरूरी किताब या उपकरण खरीदना हो, तो आपको दूसरे खर्चों में कटौती नहीं करनी पड़ेगी। इस तरह पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों के लिए पहले से तैयारी रहेगी। दोस्तों के साथ घूमने के लिए भी तय करें सीमा MBBS की पढ़ाई के दौरान पढ़ाई के साथ दोस्तों के लिए समय निकालना भी जरूरी लगता है। हॉस्टल में रहने वाले छात्र अक्सर दोस्तों के साथ बाहर घूमने, खाने या दूसरी गतिविधियों पर पैसे खर्च करते हैं। लेकिन अगर इन खर्चों का हिसाब न रखा जाए, तो परेशानी हो सकती है। 20 और 50 रुपये के खर्च का भी रखें हिसाब (Private MBBS) कई बार छात्र 20, 50 या 100 रुपये के खर्च को ज्यादा अहमियत नहीं देते। लेकिन दिनभर में होने वाले ऐसे छोटे-छोटे खर्च महीने के आखिर तक बड़ी रकम बन सकते हैं। इसलिए मोबाइल में रोजाना के खर्च का छोटा-सा रिकॉर्ड रखें। महीने के अंत में इसे देखकर पता चल सकेगा कि सबसे ज्यादा पैसे कहां खर्च हुए और किन चीजों पर बचत की जा सकती है। बजट बनाने से आसान होगी हॉस्टल लाइफ MBBS का कोर्स करीब 4-5 साल का लंबा सफर होता है। ऐसे में शुरुआत से ही पैसों का हिसाब रखना छात्रों के लिए मददगार हो सकता है। जरूरी खर्चों को प्राथमिकता दें, पढ़ाई के लिए पैसे अलग रखें और गैर-जरूरी खर्चों पर नजर बनाए रखें। इससे हॉस्टल लाइफ में पैसों को लेकर होने वाली परेशानी कम करने और अपनी जरूरतों को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है।

Foreign Language Career: इन 3 विदेशी भाषाओं को सीख लिया तो खुल सकते हैं कमाई के नए रास्ते, CBSE के नए नियम पर भी डालें नजर

Foreign Language Career: आज के समय में सिर्फ डिग्री हासिल करना ही काफी नहीं है, बल्कि पढ़ाई के साथ नई स्किल सीखना भी जरूरी हो गया है। अगर आप हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कोई दूसरी भाषा सीखते हैं, तो आपके लिए करियर के नए रास्ते खुल सकते हैं। जापानी, जर्मन और फ्रेंच जैसी भाषाएं नौकरी, अनुवाद, पर्यटन और विदेशी कंपनियों में काम पाने के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। वहीं, CBSE की 2026-27 की भाषा संबंधी गाइडलाइन ने भी छात्रों के लिए भाषा की पढ़ाई को चर्चा में ला दिया है। 1. जापानी भाषा सीखकर विदेशी कंपनियों में बना सकते हैं जगह जापान टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए जाना जाता है। ऐसे में जापानी भाषा सीखने वाले छात्रों के लिए कई तरह के काम तलाशने के रास्ते खुल सकते हैं। अनुवाद, भाषा सिखाने, कस्टमर सपोर्ट और कंपनियों के बीच बातचीत से जुड़े कामों में इस भाषा की जानकारी उपयोगी हो सकती है। भारत में भी जापानी कंपनियों के साथ काम करने वाली कुछ कंपनियों में जापानी भाषा जानने वालों की जरूरत हो सकती है। इसे सीखने के लिए शुरुआती कोर्स से शुरुआत की जा सकती है। रोज नए शब्द सीखना, जापानी भाषा सुनना और छोटे-छोटे वाक्य बोलने का अभ्यास करना मददगार रहेगा। हालांकि, बेहतर करियर के लिए भाषा के साथ किसी दूसरे काम की स्किल और अनुभव होना भी जरूरी है। 2. जर्मन भाषा से खुल सकते हैं करियर के नए रास्ते (Foreign Language Career) जर्मन भाषा उन छात्रों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकती है, जो इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, रिसर्च और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहते हैं। जर्मनी इन क्षेत्रों के लिए जाना जाता है। जर्मन भाषा की जानकारी अनुवाद, भाषा प्रशिक्षण, पर्यटन और कंपनियों में बातचीत से जुड़े कामों में मदद कर सकती है। अगर आप आगे की पढ़ाई के लिए जर्मनी जाने की योजना बना रहे हैं, तो वहां के कोर्स और संस्थानों की शर्तों के अनुसार जर्मन भाषा सीखना फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए पहले अपनी पढ़ाई और करियर के लक्ष्य को समझना जरूरी है, ताकि भाषा सीखने का सही स्तर और तरीका चुना जा सके। 3. फ्रेंच सीखने से भी मिल सकते हैं नए मौके फ्रेंच दुनिया के कई देशों में बोली जाती है। यही वजह है कि इसे सीखने वाले छात्र पर्यटन, होटल, अनुवाद, भाषा प्रशिक्षण और इंटरनेशनल कस्टमर सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में काम तलाश सकते हैं। विदेश में पढ़ाई या नौकरी करने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए भी यह भाषा उपयोगी हो सकती है। फ्रेंच सीखने के लिए शुरुआत में रोज कुछ नए शब्द याद करें और छोटे वाक्य बोलने की आदत डालें। ऑनलाइन क्लास, भाषा सीखने वाले ऐप और नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे इस भाषा पर पकड़ मजबूत की जा सकती है। CBSE का 2026-27 का भाषा नियम क्या कहता है? (Foreign Language Career) CBSE ने जुलाई 2026 में भाषा की पढ़ाई को लेकर गाइडलाइन जारी की थी। इसके अनुसार, 2026-27 के शिक्षा सत्र में कक्षा 9 के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी हैं, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। विदेशी भाषा को तीसरी भाषा के रूप में तभी चुना जा सकता है, जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हों। वहीं, कक्षा 10 के छात्रों के लिए इस सत्र में पुरानी दो भाषाओं वाली व्यवस्था जारी रहेगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि स्कूलों में भाषाओं की पढ़ाई से जुड़ा यह नियम और कॉलेज स्तर पर जापानी, जर्मन या फ्रेंच के डिग्री कोर्स अलग-अलग विकल्प हैं। भाषा के साथ दूसरी स्किल भी है जरूरी जापानी, जर्मन और फ्रेंच सीखना करियर की संभावनाएं बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन केवल भाषा जानने से नौकरी या कमाई की गारंटी नहीं मिलती। बेहतर अवसरों के लिए संबंधित क्षेत्र की जानकारी, काम का अनुभव और बातचीत करने की क्षमता भी जरूरी है। इसलिए भाषा चुनने से पहले अपनी रुचि, पढ़ाई और भविष्य की योजना पर ध्यान दें। सही अभ्यास और दूसरी स्किल के साथ नई भाषा आपके लिए करियर के नए दरवाजे खोल सकती है।

Tourism Courses: घूमने-फिरने का है शौक? इन कोर्स से बनाएं टूरिज्म में करियर, लाखों तक कमाई के मिलेंगे मौके

Tourism Courses: अगर आपको घूमने-फिरने का शौक है और आप इसी पसंद को अपने करियर में बदलना चाहते हैं, तो ट्रैवल एंड टूरिज्म का क्षेत्र आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह इंडस्ट्री भारत ही नहीं, विदेशों में भी रोजगार के कई अवसर देती है। इस क्षेत्र में आने के लिए छात्र डिग्री, डिप्लोमा और मैनेजमेंट से जुड़े कोर्स कर सकते हैं। हालांकि, सही कोर्स चुनने के साथ कम्युनिकेशन स्किल और काम का अनुभव भी जरूरी है। ट्रैवल एंड टूरिज्म में कौन-से कोर्स कर सकते हैं? ट्रैवल एंड टूरिज्म में करियर बनाने के लिए छात्र इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड मैनेजमेंट (IITTM) का विकल्प चुन सकते हैं। यह संस्थान पर्यटन मंत्रालय के तहत आता है और इसके नोएडा, ग्वालियर समेत अलग-अलग जगहों पर केंद्र हैं। यहां बीबीए इन ट्रैवल एंड टूरिज्म जैसे कोर्स किए जा सकते हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र में एमबीए और डिप्लोमा कोर्स भी उपलब्ध हैं। अगर आप ग्रेजुएशन कर रहे हैं या पूरा कर चुके हैं, तो अपनी योग्यता और करियर के लक्ष्य के अनुसार टूरिज्म में मास्टर्स या डिप्लोमा करने पर विचार कर सकते हैं। कितनी है कोर्स की फीस? ट्रैवल एंड टूरिज्म की पढ़ाई का खर्च संस्थान और कोर्स के हिसाब से अलग-अलग होता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, IITTM में तीन साल के बीबीए इन ट्रैवल एंड टूरिज्म कोर्स की फीस करीब 3 लाख रुपये तक हो सकती है। वहीं, दिल्ली यूनिवर्सिटी में इससे जुड़े कोर्स का खर्च लगभग 58 हजार रुपये बताया गया है। अगर आप डिप्लोमा करना चाहते हैं, तो कई संस्थानों में एक साल का कोर्स करने का विकल्प मिलता है। इसकी फीस करीब 20 हजार से 1 लाख रुपये तक हो सकती है। विशेषज्ञ डिप्लोमा के बजाय डिग्री को प्राथमिकता देने की सलाह भी देते हैं। हालांकि, कोर्स का चुनाव अपनी जरूरत, बजट और करियर के लक्ष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। विदेशी भाषा सीखने से बढ़ सकते हैं मौके इस इंडस्ट्री में केवल डिग्री हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। छात्रों को अपनी पर्सनालिटी, अंग्रेजी बोलने और लोगों से बातचीत करने की क्षमता पर भी काम करना चाहिए। अगर आप विदेश में नौकरी करना चाहते हैं, तो फ्रेंच, जर्मन या जापानी जैसी विदेशी भाषाएं सीखना फायदेमंद हो सकता है। पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप करने से भी काम का अनुभव मिलता है। इससे ग्राहकों की जरूरत समझने, उनकी समस्याएं सुलझाने और यात्राओं को बेहतर तरीके से संभालने की क्षमता विकसित होती है। विदेश में पढ़ाई के भी हैं विकल्प ट्रैवल एंड टूरिज्म की पढ़ाई भारत के अलावा दूसरे देशों में भी की जा सकती है। इस क्षेत्र के लिए नीदरलैंड के होटल स्कूल द हेग, फ्रांस के वॉटल और स्विट्जरलैंड के ले रोश, ग्लियोन तथा सी रिट्ज जैसे संस्थानों के विकल्प बताए जाते हैं। इसके अलावा न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में भी पर्यटन से जुड़े कोर्स किए जा सकते हैं। विदेश में पढ़ाई का फैसला लेने से पहले संस्थान, कोर्स, फीस और अपनी जरूरतों की जांच करना जरूरी है। कहां मिल सकती है नौकरी? ट्रैवल एंड टूरिज्म की पढ़ाई के बाद बड़ी ट्रैवल एजेंसियों, टूर ऑपरेटर कंपनियों और एडवेंचर टूरिज्म से जुड़ी कंपनियों में काम करने के अवसर मिल सकते हैं। स्पिरिचुअल टूरिज्म और क्रूज लाइनर से जुड़े काम भी इस क्षेत्र के विकल्प हैं। इस इंडस्ट्री में इनबाउंड और आउटबाउंड टूरिज्म की भी अहम भूमिका है। इनबाउंड टूरिज्म में विदेश से भारत आने वाले पर्यटकों की यात्रा और उनसे जुड़ी सेवाओं का काम होता है। वहीं, आउटबाउंड टूरिज्म में भारत से विदेश जाने वाले यात्रियों की यात्रा की व्यवस्था शामिल होती है। अनुभव और अच्छे संपर्क बनने के बाद इस क्षेत्र में अपना ट्रैवल बिजनेस शुरू करने का विकल्प भी मौजूद है। कितनी मिल सकती है सैलरी? विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में ट्रैवल एंड टूरिज्म क्षेत्र में शुरुआती सैलरी करीब 30 हजार रुपये प्रतिमाह हो सकती है। वहीं, विदेश में काम करने पर शुरुआती वेतन लगभग 1.5 लाख से 3 लाख रुपये प्रतिमाह तक बताया जाता है। हालांकि, ये अनुमानित आंकड़े हैं। वास्तविक सैलरी देश, कंपनी, पद, योग्यता और अनुभव के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। करियर के लिए कौन-सी स्किल्स हैं जरूरी? ट्रैवल एंड टूरिज्म एक सर्विस आधारित इंडस्ट्री है। इसलिए इसमें ग्राहकों की बात ध्यान से सुनना, उनकी जरूरतों को समझना और यात्रा की सही योजना बनाना जरूरी होता है। अच्छा व्यवहार, धैर्य, शांत स्वभाव और बेहतर कम्युनिकेशन स्किल इस क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जिन्हें जल्दी गुस्सा आता है या जो दूसरों की बात सुनने में परेशानी महसूस करते हैं, उन्हें इस क्षेत्र की चुनौतियों को समझकर ही करियर चुनना चाहिए। कुल मिलाकर, अगर आपको यात्रा, लोगों से बातचीत और प्लानिंग करना पसंद है, तो ट्रैवल एंड टूरिज्म में करियर के कई रास्ते खुल सकते हैं।

Digital Business: न जेब में पैसे, न कोडिंग की टेंशन! AI से कमाई के ये 7 तरीके स्टूडेंट्स की बदल सकते हैं जिंदगी

Digital Business: आज के समय में पढ़ाई के साथ कुछ कमाने की चाह रखने वाले स्टूडेंट्स के लिए इंटरनेट ने कई नए रास्ते खोल दिए हैं। अब ऑनलाइन काम शुरू करने के लिए बड़ी रकम लगाने या कोडिंग सीखने की जरूरत हर बार नहीं पड़ती। Artificial Intelligence यानी AI की मदद से मोबाइल या लैपटॉप पर ही कई तरह के डिजिटल काम किए जा सकते हैं। कंटेंट लिखने, डिजाइन बनाने, फोटो एडिट करने और वीडियो तैयार करने जैसे कामों में AI टूल्स मदद कर सकते हैं। अगर आप भी अपनी पढ़ाई के साथ कमाई करना चाहते हैं, तो ये 7 तरीके आपके लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। 1. AI से बनाएं डिजाइन और डिजिटल आर्ट (Digital Business) अगर आपको क्रिएटिव काम पसंद हैं, तो AI की मदद से लोगो, पोस्टर, सोशल मीडिया ग्राफिक्स और टी-शर्ट डिजाइन तैयार कर सकते हैं। Canva, Leonardo AI और Kittl जैसे टूल्स इसमें मदद करते हैं। अपने डिजाइन Redbubble, Printful या Etsy जैसी वेबसाइट्स पर बेचने का विकल्प भी है। इसके लिए डिजाइन को बेहतर बनाने के साथ ग्राहकों की पसंद समझना जरूरी है। 2. फोटो एडिटिंग को बनाएं कमाई का जरिया फोटो को आकर्षक बनाने और उनमें सुधार करने के लिए AI आधारित टूल्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। Wixel, Adobe Firefly और Remove.bg जैसे टूल्स से फोटो एडिटिंग का काम आसान हो सकता है। स्टूडेंट्स इन्फ्लुएंसर्स, ब्लॉगर्स और छोटे कारोबारियों को यह सर्विस दे सकते हैं। थोड़ी प्रैक्टिस के बाद Instagram या Fiverr पर अपनी प्रोफाइल बनाकर क्लाइंट तलाशे जा सकते हैं। 3. अपने ज्ञान से तैयार करें ऑनलाइन कोर्स अगर किसी विषय पर आपकी अच्छी पकड़ है, तो उसे ऑनलाइन कोर्स का रूप दे सकते हैं। डिजिटल मार्केटिंग, फिटनेस और फोटोग्राफी जैसे विषयों पर कोर्स तैयार करने में ChatGPT और Synthesia मदद कर सकते हैं। इनसे कंटेंट, वीडियो लेक्चर और क्विज बनाने में आसानी हो सकती है। तैयार कोर्स Udemy या Skillshare जैसे प्लेटफॉर्म पर डालकर कमाई का रास्ता तलाश सकते हैं। 4. AI की मदद से लिखें और बेचें ईबुक (Digital Business) ईबुक तैयार करने के लिए अब हर बार पेशेवर लेखक होना जरूरी नहीं है। ChatGPT और Jasper AI जैसे टूल्स से किताब की रूपरेखा, शीर्षक और शुरुआती ड्राफ्ट तैयार किया जा सकता है। हालांकि, किताब को उपयोगी बनाने के लिए अपने अनुभव, नए विचार और सही जानकारी जोड़ना जरूरी है। इसके बाद Amazon Kindle Direct Publishing (KDP) पर ईबुक प्रकाशित करके बिक्री से रॉयल्टी कमाने का मौका मिल सकता है। 5. बिना चेहरा दिखाए चलाएं YouTube चैनल कैमरे के सामने आने में झिझक होती है, तो फेसलेस YouTube चैनल एक विकल्प हो सकता है। Synthesia और Pictory जैसे टूल्स की मदद से वीडियो, AI अवतार और वॉयसओवर तैयार किए जा सकते हैं। स्टूडेंट्स मोटिवेशन, टेक्नोलॉजी या पढ़ाई से जुड़े वीडियो बना सकते हैं। चैनल से कमाई के लिए YouTube Ads और Sponsorship के विकल्प हैं, लेकिन इसके लिए दर्शक जुटाने और प्लेटफॉर्म की शर्तें पूरी करने की जरूरत होती है। 6. सोशल मीडिया मैनेजमेंट से पाएं क्लाइंट छोटे कारोबारियों और इन्फ्लुएंसर्स को सोशल मीडिया पर नियमित पोस्ट और कंटेंट की जरूरत होती है। स्टूडेंट्स ChatGPT से कैप्शन और नए आइडिया तैयार कर सकते हैं, जबकि Wixel से पोस्ट डिजाइन बनाने में मदद मिल सकती है। Metricool जैसे टूल्स से पोस्ट की परफॉर्मेंस और रिपोर्टिंग पर नजर रखी जा सकती है। शुरुआत में छोटे क्लाइंट्स के साथ काम करके अनुभव और अपना नेटवर्क बढ़ाया जा सकता है। 7. SEO सर्विस देकर करें कमाई (Digital Business) वेबसाइट को Google सर्च में बेहतर जगह दिलाने के लिए SEO यानी सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की जरूरत होती है। अगर आपको कीवर्ड और वेबसाइट की बुनियादी समझ है, तो Semrush, Ahrefs और Neuron Writer जैसे टूल्स से विश्लेषण करना सीख सकते हैं। इसके बाद ब्लॉग्स और छोटी कंपनियों को वेबसाइट सुधारने से जुड़ी सेवाएं दे सकते हैं। प्रोजेक्ट के हिसाब से भुगतान मिलने की संभावना रहती है। AI से कमाई के साथ करियर बनाने का भी मौका AI टूल्स स्टूडेंट्स के लिए सिर्फ पढ़ाई में मदद करने का जरिया नहीं हैं, बल्कि नई डिजिटल स्किल सीखने का अवसर भी देते हैं। डिजाइनिंग, कंटेंट, वीडियो और SEO जैसे कामों से अनुभव हासिल करके आगे चलकर अपनी एजेंसी, ब्रांड या ऑनलाइन बिजनेस शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, केवल AI टूल इस्तेमाल करने से कमाई की गारंटी नहीं मिलती। अच्छी क्वालिटी का काम, नियमित अभ्यास, ग्राहकों की जरूरत समझना और लगातार सीखना जरूरी है। पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए छोटे स्तर से शुरुआत करना बेहतर रहेगा।

UP PET 2026: जारी हुई एग्जाम सिटी स्लिप, परीक्षा देने जाने से पहले ऐसे जानें अपना शहर

UP PET 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए जरूरी खबर है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) 2026 की एग्जाम सिटी स्लिप जारी कर दी है। जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया था, वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाकर अपने परीक्षा जिले की जानकारी देख सकते हैं। आयोग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, परीक्षा अक्टूबर और नवंबर 2026 में आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा प्रदेश के 60 जिलों में तीन दिनों तक चलेगी। हर दिन दो पालियों में पेपर होगा। ऐसे में उम्मीदवारों के लिए समय रहते अपना परीक्षा शहर जानना जरूरी है, ताकि आने-जाने की तैयारी पहले से की जा सके। ऐसे चेक करें अपनी एग्जाम सिटी स्लिप अगर आपने भी PET 2026 के लिए आवेदन किया है, तो इन आसान स्टेप्स की मदद से अपने परीक्षा जिले की जानकारी देख सकते हैं। सबसे पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाएं। होम पेज पर दिए गए एग्जामिनेशन सेक्शन पर क्लिक करें। PET 2026 की परीक्षा से संबंधित लिंक खोलें। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें। मांगी गई अन्य जानकारी, जैसे जेंडर और सिक्योरिटी कोड भरें। सभी विवरण भरने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें। आपकी एग्जाम सिटी स्लिप स्क्रीन पर दिखाई देगी। इसे डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रख लें। कब होगी परीक्षा, कितने बजे से शुरू होगा पेपर? UPSSSC PET 2026 की लिखित परीक्षा तीन तारीखों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा प्रदेश के 60 जनपदों में होगी और हर दिन दो पालियां निर्धारित हैं। पहली पाली: सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक। दूसरी पाली: दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक। एग्जाम सिटी स्लिप को एडमिट कार्ड न समझें उम्मीदवार एक जरूरी बात का ध्यान रखें। एग्जाम सिटी स्लिप और एडमिट कार्ड अलग-अलग दस्तावेज हैं। सिटी स्लिप से केवल यह पता चलता है कि परीक्षा किस जिले में होगी। इसके आधार पर परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा। एडमिट कार्ड अलग से जारी किया जाएगा। उसमें परीक्षा केंद्र का पूरा पता, रिपोर्टिंग टाइम और जरूरी निर्देश दिए जाएंगे। आयोग एडमिट कार्ड जारी करने की तारीख की जानकारी अलग से देगा। PET स्कोर से आगे बढ़ेगी भर्ती की राह उत्तर प्रदेश में विभिन्न विभागों के ग्रुप सी पदों पर भर्ती के लिए PET स्कोर का इस्तेमाल किया जाता है। इस स्कोर के आधार पर संबंधित भर्ती के नियमों के अनुसार उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा, स्किल टेस्ट या शारीरिक दक्षता परीक्षा जैसे अगले चरणों के लिए बुलाया जा सकता है।

INS Mangrol: समंदर में भारत की ताकत को मिलेगी नई धार, जानिए इस स्वदेशी युद्धपोत की 5 बड़ी खूबियां

INS Mangrol: भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में एक और कदम उठाया गया है। स्वदेशी युद्धपोत INS Mangrol (P82) को मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल कर लिया गया है। माहे श्रेणी का यह तीसरा पनडुब्बी रोधी युद्धपोत है, जिसे खास तौर पर तटीय इलाकों और कम गहरे समुद्र में काम करने के लिए तैयार किया गया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में 80 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। इस कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन ने की। इस युद्धपोत का डिजाइन और निर्माण कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने किया है। इसके निर्माण में भारतीय रक्षा उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) ने भी योगदान दिया है। INS Mangrol की 5 खास बातें 1. कम गहरे समुद्र में करेगा काम INS Mangrol एक एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है। इसे तटीय क्षेत्रों और कम गहरे पानी में पनडुब्बियों से पैदा होने वाले खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने के लिए बनाया गया है। 2. 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। यह भारत में रक्षा उपकरणों के निर्माण और मेक इन इंडिया पहल को मजबूती देने की दिशा में अहम कदम है। 3. कोचीन शिपयार्ड में हुआ निर्माण INS Mangrol को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने तैयार किया है। इसके निर्माण में देश के रक्षा उद्योगों और MSME क्षेत्र की भागीदारी भी रही है, जिससे स्वदेशी निर्माण क्षमता को बढ़ावा मिलता है। 4. पनडुब्बियों के खतरों पर रखेगा नजर इस युद्धपोत में आधुनिक सेंसर, सोनार और हथियार प्रणालियां लगी हैं। इनकी मदद से यह पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने और उनकी निगरानी करने में सक्षम है। इसके अलावा, यह समुद्री निगरानी और कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों में भी उपयोगी साबित हो सकता है। 5. गुजरात के तटीय शहर के नाम पर रखा गया नाम INS Mangrol का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के तटीय शहर मंगरोल के नाम पर रखा गया है। यह शहर मछली पकड़ने के प्रमुख बंदरगाह के रूप में जाना जाता है। नया युद्धपोत पुराने INS Mangrol (M85) की विरासत को भी आगे बढ़ाता है, जो अप्रैल 2004 तक भारतीय नौसेना में सेवा दे रहा था।

error: Content is protected !!