अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रों के प्रदर्शन के बीच प्रशासन का बड़ा फैसला, प्रो. मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी बने नए प्रॉक्टर
अलीगढ़: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लंबे समय से लंबित छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है। इससे करीब 8 साल से छात्रसंघ चुनाव का इंतजार कर रहे छात्रों में नई उम्मीद जगी है। वहीं, कैंपस में जारी तनाव और छात्रों के प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नईमा खातून ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए प्रॉक्टर को भी बदल दिया है।
छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग स्वीकार, छात्रों में जगी उम्मीद
AMU परिसर में पिछले कई दिनों से छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी था। छात्रों का कहना था कि लंबे समय से चुनाव नहीं होने के कारण छात्रसंघ प्रतिनिधित्व और उनकी समस्याओं को उठाने के लिए लोकतांत्रिक मंच प्रभावित हुआ है।
प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग स्वीकार कर ली है। इस फैसले को कैंपस में छात्र राजनीति की वापसी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, चुनाव की तारीख और पूरी प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक कार्यक्रम सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
प्रो. मोहम्मद नवेद खान की जगह प्रो. नफीस अहमद को जिम्मेदारी
छात्रों के प्रदर्शन के बीच कुलपति प्रो. नईमा खातून ने प्रॉक्टर के पद पर भी बदलाव किया है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी ऑफिस मेमो के मुताबिक, राजनीति विज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी को AMU का नया प्रॉक्टर नियुक्त किया गया है।
उन्होंने प्रो. मोहम्मद नवेद खान की जगह ली है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से दो साल या अगले आदेश तक के लिए की गई है।
कैंपस में तनाव के बीच प्रशासनिक फेरबदल
AMU में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन पिछले कई दिनों से चर्चा में है। प्रदर्शनकारी छात्र चुनाव कराने की मांग पर जोर दे रहे थे। ऐसे में प्रशासन की ओर से मांग स्वीकार किए जाने और प्रॉक्टर बदले जाने को कैंपस की मौजूदा परिस्थितियों के बीच अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
अब छात्रों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चुनाव की तारीख घोषित करने और चुनाव प्रक्रिया शुरू करने पर रहेगी। यदि चुनाव का कार्यक्रम जारी होता है, तो करीब आठ साल बाद AMU में छात्रसंघ चुनाव का रास्ता खुल सकता है








