Delhi University: दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान किसी विषय में फेल होना छात्रों के लिए चिंता की बात हो सकती है। कई बार छात्रों को डर रहता है कि एक विषय में बैक आने से उनकी पूरी डिग्री पर असर पड़ेगा। लेकिन ऐसा सीधे तौर पर नहीं होता। बैक आने पर छात्र को संबंधित पेपर दोबारा पास करने का मौका दिया जाता है।
हालांकि, इसका मतलब यह भी नहीं है कि बैकलॉग को लंबे समय तक टाला जा सकता है। छात्रों को यूनिवर्सिटी के तय नियमों और समयसीमा के भीतर अपने सभी लंबित पेपर क्लियर करने होते हैं।
मार्कशीट में ER लिखा हो तो क्या समझें?
अगर छात्र किसी विषय में जरूरी पासिंग मार्क्स हासिल नहीं कर पाता या परीक्षा में शामिल नहीं होता, तो मार्कशीट में ER यानी Essential Repeat दर्ज हो सकता है। इसका सीधा मतलब है कि छात्र को उस विषय की परीक्षा दोबारा देनी होगी। कई मामलों में बैक आने के बावजूद छात्र अगले सेमेस्टर में पढ़ाई जारी रख सकता है। लेकिन डिग्री पूरी करने के लिए संबंधित विषय को पास करना जरूरी रहता है।
Subject Back और Year Back में फर्क
सब्जेक्ट बैक और ईयर बैक को एक जैसा समझना सही नहीं है। अगर छात्र एक या कुछ विषयों में फेल होता है और प्रमोशन से जुड़ी शर्तें पूरी करता है, तो उसे आगे की पढ़ाई जारी रखने का मौका मिल सकता है।
वहीं, जब किसी सेमेस्टर में फेल हुए विषयों की संख्या तय सीमा से ज्यादा हो जाती है और छात्र प्रमोशन की शर्त पूरी नहीं करता, तो ईयर बैक की स्थिति बन सकती है। ऐसे में छात्र को उसी वर्ष की पढ़ाई दोहरानी पड़ सकती है।
बैक पेपर के लिए है ऑड-ईवन नियम
बैक परीक्षा को लेकर सेमेस्टर के हिसाब से भी व्यवस्था है। फर्स्ट और थर्ड सेमेस्टर से जुड़े बैकलॉग की परीक्षा अगले वर्ष के संबंधित ऑड सेमेस्टर में दी जा सकती है। इसी तरह सेकंड और फोर्थ सेमेस्टर के बैक ईवन सेमेस्टर में क्लियर करने का मौका मिलता है।
यानी बैक पेपर कब दिया जा सकता है, यह सेमेस्टर के हिसाब से तय होता है। छात्रों के लिए परीक्षा फॉर्म और यूनिवर्सिटी की आधिकारिक जानकारी पर नजर रखना जरूरी है।
कितने साल में खत्म करनी होगी डिग्री? (Delhi University)
तीन साल के अंडरग्रेजुएट कोर्स जैसे BA, BSc और BCom को पूरा करने के लिए अधिकतम पांच साल की अवधि बताई गई है। वहीं दो साल के मास्टर कोर्स के लिए चार साल की अवधि होती है।
इस तय अवधि के भीतर छात्रों को सभी बैकलॉग क्लियर करने होते हैं। समयसीमा के अंदर कोर्स पूरा नहीं होने पर डिग्री जारी होने में समस्या आ सकती है और एनरोलमेंट भी समाप्त हो सकता है।
प्रमोशन के नियम भी समझें (Delhi University)
सिर्फ बैक क्लियर करना ही काफी नहीं है। अगले वर्ष प्रमोशन के लिए भी निर्धारित शैक्षणिक शर्तें पूरी करनी होती हैं। पहले और दूसरे सेमेस्टर के कुल पेपरों में कम से कम 50 प्रतिशत पेपर पास करना जरूरी होता है।
अगर छात्र यह शर्त पूरी नहीं करता, तो उसे अगले वर्ष प्रमोशन नहीं मिल सकता। ऐसी स्थिति में ईयर रिपीट करने और लंबित पेपर पास करने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए DU छात्रों के लिए बैक आने पर घबराने के बजाय सबसे जरूरी बात है कि वे अपने ER, प्रमोशन और बैकलॉग क्लियर करने की समयसीमा को ध्यान से समझें।








