New Delhi: कहते हैं कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती और जो लोग लगातार प्रयास करना जानते हैं, वे एक न एक दिन इतिहास जरूर रचते हैं। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए उम्मीदवारों को दिन-रात एक करके पढ़ाई करनी पड़ती है।
हर साल लाखों युवा इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सफलता केवल उन्हीं को मिलती है जिनके इरादे फौलादी होते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आईएएस (IAS) अधिकारी अर्पिता थुबे की है, जिन्होंने साबित कर दिया कि अगर संकल्प दृढ़ हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
इंजीनियरिंग से सिविल सेवा तक का सफर
मूल रूप से महाराष्ट्र के ठाणे की रहने वाली अर्पिता थुबे बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज थीं। उन्होंने अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में हमेशा बेहतरीन एकेडमिक रिकॉर्ड बनाए रखा। अर्पिता ने मुंबई के प्रतिष्ठित सरदार पटेल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में अपनी बी.टेक (B.Tech) की डिग्री पूरी की थी।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने देश की सेवा करने और सिविल सर्वेंट बनने का मन बना लिया था, जिसके बाद उन्होंने पूरी शिद्दत से यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।
पहले ही प्रयास में लगा बड़ा झटका
साल 2019 में अर्पिता ने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी थी। बड़ी उम्मीदों के साथ बैठी अर्पिता को पहले ही प्रयास में एक बड़ा झटका लगा, जब वह प्रीलिम्स (प्रारंभिक परीक्षा) भी क्वालीफाई नहीं कर पाईं। इस असफलता से वह काफी निराश हुईं, लेकिन उन्होंने हार मानने की बजाय अपनी कमियों को पहचानने का प्रयास किया। उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और दोगुनी ताकत के साथ दोबारा तैयारी में जुट गईं।
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आईपीएस बनने के बाद भी लक्ष्य पर टिकी रहीं नजरें
अर्पिता की कड़ी मेहनत साल 2020 के दूसरे प्रयास में रंग लाई। इस बार उन्होंने शानदार वापसी करते हुए देश भर में 383वीं रैंक हासिल की। इस रैंक के साथ उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए हो गया। हालांकि, अर्पिता का असली सपना एक आईएएस अधिकारी बनने का था।
अपने इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी के साथ तैयारी जारी रखी। साल 2021 में उन्होंने अपना तीसरा प्रयास किया, लेकिन इस बार वह अपने मनमुताबिक रैंक हासिल करने से चूक गईं।
ड्यूटी से ब्रेक लिया और आखिरी प्रयास में रचा इतिहास
लगातार मिल रही चुनौतियों के बावजूद अर्पिता का संकल्प अडिग रहा। साल 2022 में अपने चौथे और आखिरी प्रयास के लिए उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया। अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह फोकस करने के लिए उन्होंने आईपीएस की ड्यूटी से ब्रेक (छुट्टी) ले लिया। उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा रिवीजन और मॉक टेस्ट पर लगाई।
उनकी यह तपस्या सफल रही और यूपीएससी 2022 के नतीजों में उन्होंने 214वीं रैंक हासिल कर आखिरकार अपना आईएएस बनने का ख्वाब पूरा कर लिया। वर्तमान में अर्पिता महाराष्ट्र के नासिक उपमंडल में आईटीडीपी (ITDP) परियोजना अधिकारी-सह-सहायक कलेक्टर के रूप में तैनात हैं।