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ज्वलंत मुद्दा: धांधली के कारण एक और अहम भर्ती परीक्षा रद्द, लाखों युवा अभ्यर्थी का करियर प्रभावित

उत्तर प्रदेश में कथित धांधली को लेकर बीते वर्षों में अब तक कई परीक्षाएं रद्द हो चुकी है। इसी क्रम में अब एक परीक्षा रद्द कर दी गई है, जिसके कारण राज्य के 9.50 लाख युवा उम्मीदवारों का करियर प्रभावित हो गया है। लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के कारण बीते वर्षों में कई परीक्षाएं रद्द की जा चुकी है। इसी क्रम में अब एक और भर्ती परीक्षा धांधली की भेंट चढ़ गई है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित की गई ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी सहित 1953 पदों की भर्ती परीक्षा को धांधली के कारण रद्द कर दिया गया है। परीक्षा के रद्द होने के कारण इसमें शामिल हुए 9.50 लाख युवा अभ्यर्थियों का करियर प्रभावति हो गया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने साल 2018 में ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी और समाज कल्याण पर्यवेक्षक के 1953 पदों पर भर्ती निकाली थी। इस परीक्षा के लिये लगभग 14 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिसमें में लगभग 9.50 लाख अभ्यर्थी इस परीक्षा मैं शामिल हुए थे। राज्य भर में 16 जिलों के 572 केंद्रों पर आयोजित की गई इस परीक्षा का परिणाम डेढ़ वर्ष पहले ही जारी हो चुका था। लेकिन अब इसमें धांधली उजागर हुई है, जिसके बाद परीक्षा को निरस्त कर दिया गया है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में इस परीक्षा में धांधली पाई गई, जिसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। एसआईटी द्वारा मामले की जांच जारी है। इसके साथ ही आयोग ने भविष्य में होने वाली तीन और परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित करने का फैसला लिया है।  बता दें कि आयोग द्वारा 30 मई 2018 को इस भर्ती परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी किया था। आवेदन की आखिरी तारीख 29 जून 2018 निर्धारित की गई थी। 14 लाख उम्मीदवारों वाली इस भर्ती परीक्षा में जनरल वर्ग के लिए 1056 सीटें, ओबीसी वर्ग के लिए- 484 सीटें और एससी वर्ग के लिए- 386 सीटें आरक्षित थी। परीक्षा रद्द होने के साथ 9.50 लाख युवा प्रभावित हो गये हैं।   

Trending Topic: जानिये Twitter के इस नये ट्रेंड के बारे में, ‘बहाना नहीं बहाली चाहिए’ हो रहा ट्रेंड क्यों है चर्चा में

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट Twitter पर रविवार दोपहर से ‘बहाना नहीं बहाली चाहिए’ लगातार ट्रेंड हो रहा है, अब तक बड़ी संख्या में इस हैशटेग पर Tweet हो चुके हैं। डाइनामाइट न्यूज रिपोर्ट में जानिये इस ट्रेंड के बारे में नई दिल्ली: माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर आज दोपहर बाद से ‘बहाना नहीं बहाली चाहिए’ लगातार ट्रेंड हो रहा है। खबर लिखे जाने के वक्त तक इस हैश टैग पर एक लाख से अधिक ट्विट किये जा चुके थे। ‘बहाना नहीं बहाली चाहिए’ हैश टैग पर ट्विट करने वालों में अधिकतर युवा है, जो देश में बढ़ती बेरोजगारी की समस्या पर सरकार का ध्यान आकर्षित करा रहे हैं। युवाओं के संगठन ‘युवा हल्ला बोल’ द्वारा ट्विटर पर चलाये जा रहे इस हैशटैग पर देश भर के युवा यूजर्स सरकार पर तंज भी कस रहे हैं। उनका कहना है कि विभिन्न राज्यों में खाली पड़े लाखों शिक्षकों समेत तमाम सरकारी पदों पर योग्य और शिक्षित युवाओं को तुरंत बहाल करना चाहिये और इसके लिये सरकार को अब किसी तरह का बहाना नहीं बनाना चाहिये। डाइनामाइट न्यूज़ से बातचीत में ‘युवा हल्ला बोल’ से जुड़े गोविंद मिश्रा का कहना है कि यूपी-बिहार समेत उत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों में पिछले चार सालों से कई सरकारी पद खाली है। यूपीपीएससी समेत कई विभागों से संबंधित सरकारी नियुक्तियों के लिये या तो परीक्षाएं आयोजित नहीं की जा रही हैं या फिर ये पद विभिन्न कारणों से खाली है। इसी तरह शिक्षकों के भी लाखों पद है, जिन पर सरकार नियुक्तियां नहीं कर रही है। गोविंद मिश्रा का कहना है कि सरकारी पदों पर नियुक्तियां न होने के कारण लाखों की तादाद में युवाओं के बीच बेरोजगारी बढ़ती जा रही है।

CBSE Board Exam 2021: वायरल एग्‍जाम डेट्स को लेकर बोर्ड ने जारी किया नोटिस, जानिए क्या कहा

इस समय सोशल मीडिया पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की डेटशीट काफी वायरल हो रही है। इसको लेकर अब बोर्ड ने एक नोटिस जारी किया है। जानिए क्या कहा है बोर्ड ने उस नोटिस में। नई दिल्लीः कुछ समय से सोशल मीडिया पर CBSE कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड की थ्‍योरी और प्रैक्टिकल परीक्षाओं की डेट/ महीने की जानकारी वाली पोस्‍ट सर्कुलेट हो रही है। जिसे लेकर बोर्ड ने एक नोटिस निकाला है। नोटिस में ये कहा लिखा गया है कि- छात्रों, शिक्षकों, स्कूलों और अभिभावकों को सचेत किया है कि बोर्ड की तरफ से एग्‍जाम की डेट्स या महीने की कोई जानकारी जारी नहीं की गई है। नोटिस में बोर्ड ने कहा कि सर्कुलेट हो रही सूचना सही नहीं है और इससे स्कूलों, छात्रों और अभिभावकों में घबराहट पैदा हो सकती है। गुरुवार को नोटिस जारी करके कहा गया है कि- CBSE के संज्ञान में यह आया है कि दसवीं और बारहवीं बोर्ड की परीक्षाओं और प्रैक्टिकल परीक्षाओं की डेट की जानकारी कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और न्यूज़ पेपर्स में जारी की जा रहा है। चूंकि ये जानकारी सही नहीं है, इसलिए, यह छात्रों और अभिभावकों में घबराहट पैदा कर सकती है।

ज्वलंत मुद्दाः समाज में महिलाओं की स्थिति आज भी एक बड़ा मुद्दा

आज के समय में भारत में भले ही महिलाओं की स्थिति थोड़ा बहुत बदलाव आया है, लेकिन ये अभी भी एक बड़ा मुद्दा है। एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण के कदम उठा रही है तो दूसरी ओर घर से बाहर निकलने वाली महिलाओं की सुरक्षा भी चिंताजनक होती जा रही है। नई दिल्लीः हाल ही में एक विदेशी संस्थान की रिपोर्ट के मुताबिक भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक देश बताया गया है। इस सर्वे में महिलाओं का स्वास्थ्य, शिक्षा, उनके साथ होने वाली यौन हिंसा, हत्या और भेदभाव जैसे कुछ पैमाने थे, जिन पर दुनिया के 193 देशों का आकलन किया गया था। भारत हर पैमाने में पीछे था। वहां औरतों के स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति सबसे खराब थी। सवाल अब ये उठता है कि कब जाकर भारत में महिलाओं की स्थिती में हदलाव होंगे। सरकार एक तरफ महिला सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं की सुरक्षा ही एक बड़ा सवाल बन रहा है। महिलाओं की स्थिति बदली है, मगर अभी भी इसमें सुधार की जरूरत है। समाज की सोच बदलनी होगी। आज भी समाज में जेंडर एक बड़ा मुद्दा है। महिलाओं की सुरक्षा की बात यह साबित करती है कि हम संवेदनशील नहीं हो सके हैं।

ज्वलंत मुद्दाः स्कूल खुलने के बाद क्यों ठप हो रही बच्चों की पढ़ाई?

लॉकडाउन में देश की अर्थव्यवस्था के साथ बच्चों के भविष्य पर भी भारी असर पड़ा है। सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा का लाभ बहुत ही कम बच्चों को मिल सकी है। नई दिल्लीः कोरोना काल के कारण बच्चों की शिक्षा पर भी काफी असर पड़ा है। लॉकडाउन लगने के बाद पढ़ाई-लिखाई का ऑनलाइन का फायदा गांव में सिर्फ कुछ ही बच्चों को मिल पा रहा है। वहीं अब कई जगहों पर स्कूल भी खोल दिए गए हैं। जिसकी वजह से उन बच्चों की पढ़ाई पर काफी असर देखने को मिल रहा है, जो घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई करना चाहते हैं। सरकारी स्कूलों में 25 से 30 प्रतिशत बच्चों को ही वर्तमान में ऑनलाइन पढ़ाई का मिल पा रहा है। जब स्कूलों में शिक्षकों को बुलाया जाने लगा तो व्हाट्सएप ग्रुपों पर निष्क्रिय हो गए। कुछ शिक्षक व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाई करा रहे हैं लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है।

ज्वलंत मुद्दाः नई शिक्षा नीति 2020- आखिर क्यों पड़ी इसकी जरूरत

भारत में लंबे समय के बाद शिक्षा नीति में बड़े बदलाव किए गए हैं। इस नीति में बदलाव के बाद अब ये सवाल खड़े हो रहे हैं कि इस बदलाव की क्यों जरूरत पड़ी और क्या खास है इस नई नीति में.. नई दिल्लीः देश में मौजूदा शिक्षा नीति को अंतिम बार 1992 में अपडेट किया गया था। इस नीति का उद्देश्य स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा को तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षाओं को दायरे में लाना है। छात्र को बचपन से ही उसके हुनर और दिलचस्पी के हिसाब शिक्षा देना है। ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ साथ किसी लाइफ स्‍क‍िल से सीधा जोड़ा जा सके। ऐसा माना जा रहा है कि देश में रट्टू तोते वाली शिक्षा व्यवस्था से पढाई करने पर बच्चों को शिक्षा से लाभ मिलना बंद हो जाता है। यही कारण है कि भारत में समय समय पर शिक्षा नीति को बदला जाता रहा है। अभी तक हमारे देश में स्कूली पाठ्यक्रम 10+2 के हिसाब से चलता है लेकिन अब नई शिक्षा नीति में इसे खत्म कर 5+ 3+ 3+ 4 के फार्मेट को मंजूरी दी गयी है। जिसका मतलब प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, फिर तीसरी से पांचवीं तक दूसरा हिस्सा, छठी से आठवीं तक तीसरा हिस्सा और नौंवी से 12 तक आखिरी हिस्सा होगा।

ज्वलंत मुद्दाः आरक्षण के साथ और बिना आरक्षण, इन दो हिस्सों में बंटा भारत

भारत इस समय दो हिस्सों में बंटा हुआ, जिसमें एक आरक्षण के साथ है, जबकि एक बिना आरक्षण के। आज के समय में ये युवाओं के लिए एक अहम मुद्दा बना हुआ है, फिर चाहे बात नौकरी से जुड़ी हुई हो या पढ़ाई। पढ़ें युवा डाइनामाइट की ये विशेष खबर.. नई दिल्लीः आज के समय में देश में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर फैसला का इंतजार पूरा भारत कर रहा है। इन्हीं मुद्दों में से एक है आरक्षण का मुद्दा। संविधान की पांचवी अनुसूची में शेड्यूल ट्राइब्स परिषद के अंतर्गत शेड्यूल ट्राइब्स को विशेष अधिकार प्राप्त है। आरक्षण जैसी नीतियां सिर्फ भारत में नहीं और भी काफी देशों में हैं, जहां रंग, भाषा, धर्म के आधार पर आरक्षण दिया जाता है। आरक्षण इसलिए दिया जाता है कि जिन लोगों से उनकी पहचान के आधार पर भेदभाव करते हुए उनके अधिकारों से वंचित रखा गया हो, उनको मुख्यधारा में लाया जा सके। भारत में इस वक्त इस चीज को लेकर बहस रही है कि मेडिकल जैसी फिल्ड से (ओबीसी) के आरक्षण के कितने सीट हैं और असल में उन्हें कितनी सीटें दी जा रही हैं।

ज्वलंत मुद्दा: क्या चीनी सामान का बहिष्कार कर आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा?

अगर ये कहा जाए की भारत और भारत के लोगों में चीनी सामान ने अपनी एक अलग जगह बना ली है। ऐसे में चीनी सामानों को पूरी तरह से बहिष्कार करना एक बड़ा सवाल है। पढ़ें युवा डाइनामाइट न्यूज़ विशेष.. नई दिल्लीः देश में चीनी सामान के बहिष्कार का अभियान चल पड़ता है। सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट की भरमार हो जाती है जिसमें चीनी सामान नहीं खरीदने का आह्वान होता है। चीन को सबक सिखाने के लिए चीनी सामान का बहिष्कार किया जाएगा तो यह बात पूरी तरह से व्यावहारिक दिखाई नहीं देती है। अगर अपने घर में नजर डाले तो हमें ज्यादातर सामान चीन का ही मिलेगा। ऐसे में पूरी तरह से चीन के सामान का बहिष्कार करना एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

ज्वलंत मुद्दाः कोरोना का चीन और अमेरिका पर प्रभाव

एक तरफ कोरोना के कारण पूरी दुनिया संकट में है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर अमेरिका और चीन में भी पलटवार शुरू हो गया है। एक तरफ अमेरिका चीन पर कोरोना फैलाने का आरोप लगा रहा है, वहीं चीन भी अमेरिका को जवाब देने से पीछे नहीं हट रहा है। पढ़ें युवा डाइनामाइट विशेष.. नई दिल्लीः कोरोना वायरस ने अपनी चपेट में अब तक लाखों लोगों को लिया है। दुनिया का अधिकतर हिस्सों में कोरोना का कहर जारी है। इन दिनों चीन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का गुस्सा और जलन सातवें आसमान पर है। कोरोना के बहाने वो इसका खुलकर इज़हार कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर चीन भी अमेरिका को जवाब देने से बाज नहीं आ रहा है। इस महामारी के बादल छटने के बाद दुनिया की तस्वीर ही बदल जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका का सुपरपॉवर का तमगा भी छिन सकता है और दुनिया का पॉवर सेंटर वेस्ट से ईस्ट की तरफ हो जाए यानी चीन की तरफ। क्योंकि मौजूदा हालात को देखते हुए साफ है कि कोरोना से बचने के लिए दुनिया चीन की शरण में जा रही है।

ज्वलंत मुद्दाः नौकरी ढूंढते समय युवा इन बातों का रखें खास ध्यान

इस समय देश में नौकरी की काफी मार चल रही है। ऐसे में कई युवा नौकरी की तलाश कर रहे हैं। नौकरी ढूंढ रहे हैं। नौकरी ढूंढते समय कई युवा कुछ गलतियां कर बैठते है, जिससे बाद में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। युवा डाइनामाइट पर जानिए नौकरी ढूंढते समय कुछ खास बातें.. नई दिल्लीः बाजार की मौजूदा स्थितियों में बड़ी संख्या में लोग नौकरी गंवा रहे हैं। नौकरी न मिलने का एक और कारण जॉब सेलेक्शन की प्रक्रिया में कुछ गलतियां भी कर देते हैं। जानिए नौकरी ढूंढते समय कुछ खास बातों का। आप कहां और कैसे जॉब सर्च करते हैं, यह महत्वपूर्ण है। अगर आप आंख मूंदकर अनाप-शनाप तरीके से सीवी भेजते हैं या संस्थानों के कभी-कभार वैकेंसी के लिए चेक करते हैं तो नौकरी मिलने के आसार कम ही हैं। नौकरी की तलाश में अच्छा नेटवर्क काफी कारगर साबित हो सकता है। केवल नौकरी चले जाने पर ही नेटवर्क से संपर्क नहीं साधना चाहिए। नौकरी तलाशने की छटपटाहट में ज्यादातर लोगों को अपनी योग्यता से मिलता-जुलता जो भी पहला विकल्प दिखता, वे उसके लिए अप्लाई कर देते हैं। इससे उनकी कंज्यूजन का पता लगता है।

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