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MBBS दाखिले के नियमों में बड़ा बदलाव, PwBD छात्रों के लिए NMC की नई गाइडलाइन जारी

MBBS दाखिले के नियमों में बड़ा बदलाव (Img: AI Generated Image)

New Delhi: मेडिकल शिक्षा (MBBS) में दाखिले को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने दिव्यांग यानी PwBD (Persons with Benchmark Disabilities) अभ्यर्थियों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। नए नियमों के तहत अब किसी उम्मीदवार को केवल दिव्यांगता के आधार पर एमबीबीएस में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

एनएमसी ने साफ किया है कि किसी भी उम्मीदवार की पात्रता का फैसला उसकी कार्यात्मक क्षमता (Functional Competency), आवश्यक सहायता और एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने की क्षमता को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

दिव्यांग उम्मीदवारों को मिलेगा समान अवसर

नई गाइडलाइन में कहा गया है कि दिव्यांग छात्रों को मेडिकल शिक्षा (MBBS) में बराबरी का मौका, सम्मान और भेदभाव मुक्त वातावरण मिलना चाहिए। हालांकि, एनएमसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसलिए उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनकी वास्तविक क्षमताओं और जरूरतों के आधार पर किया जाएगा।

दाखिले के लिए जरूरी होंगे ये दस्तावेज

PwBD आरक्षण का लाभ लेने के लिए उम्मीदवारों को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें शामिल हैं-

वैध विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (UDID)
स्वयं प्रमाणित शपथपत्र (Self-certified Affidavit)
मेडिकल असेसमेंट बोर्ड द्वारा जारी पात्रता प्रमाणपत्र

हालांकि, एनएमसी ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ UDID कार्ड होने से एमबीबीएस प्रवेश का फैसला नहीं होगा। उम्मीदवार का पूरा मेडिकल मूल्यांकन किया जाएगा।

मेडिकल असेसमेंट सेंटर की संख्या बढ़ाई गई

नई व्यवस्था के तहत दिव्यांग उम्मीदवारों के मूल्यांकन के लिए मेडिकल असेसमेंट सेंटर की संख्या बढ़ाई गई है। पहले जहां 16 केंद्र थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर 61 कर दी गई है। मेडिकल असेसमेंट बोर्ड हर उम्मीदवार का व्यक्तिगत और वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन करेगा। इसमें उम्मीदवार की कार्य क्षमता, जरूरी सहायता, आधुनिक चिकित्सा और पुनर्वास सुविधाओं को ध्यान में रखा जाएगा।

तीन श्रेणियों में होगा फैसला

मेडिकल असेसमेंट बोर्ड जांच के बाद उम्मीदवार के संबंध में तीन तरह के निर्णय लेगा-

पात्र (Eligible)
जरूरी सुविधाओं के साथ पात्र (Eligible with Reasonable Accommodation)
अपात्र (Ineligible)

अगर किसी उम्मीदवार को अपात्र घोषित किया जाता है तो बोर्ड को उसका कारण लिखित रूप में बताना होगा।

फैसले से असंतुष्ट उम्मीदवार कर सकेंगे अपील

अगर कोई उम्मीदवार मेडिकल असेसमेंट बोर्ड के फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वह स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) द्वारा बनाए गए अपीलीय प्राधिकरण के सामने अपील कर सकता है। जरूरत पड़ने पर दोबारा मेडिकल मूल्यांकन भी कराया जा सकता है। काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया के लिए अपीलीय प्राधिकरण का निर्णय अंतिम माना जाएगा।

मेडिकल कॉलेजों को भी निभानी होगी जिम्मेदारी

नई गाइडलाइन के अनुसार मेडिकल कॉलेजों को दिव्यांग छात्रों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।

कॉलेजों को-

दिव्यांग अनुकूल (Barrier-free) परिसर तैयार करना होगा।
पढ़ाई के लिए आसान और सुलभ माहौल बनाना होगा।
PwBD छात्रों की सहायता के लिए नोडल अधिकारी या विशेष इकाई बनानी होगी।
शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था करनी होगी।
पुराने नियमों की जगह लागू होगी नई गाइडलाइन

एनएमसी ने स्पष्ट किया है कि एमबीबीएस प्रवेश से जुड़े PwBD उम्मीदवारों के लिए पहले जारी सभी पुराने निर्देश अब नई गाइडलाइन के अनुसार माने जाएंगे।

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