Study Tips: पढ़ाई में मन लगाएं, टॉप स्कोरर बन जाएं, अपनाएं ये 10 आसान तरीके

New Delhi: आज के दौर में पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं। सोशल मीडिया, दोस्तों का शोर और ऑनलाइन गेम्स जैसे कई कारण मन को भटकाते हैं। लेकिन, अगर आप परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो पढ़ाई में मन लगाना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं 10 आसान और प्रभावी तरीकों से, जो आपकी पढ़ाई को बनाएंगे मजेदार और सफल। पढ़ाई के लिए सही माहौल बनाएं पढ़ाई का माहौल आपकी एकाग्रता की नींव है। ऐसी जगह चुनें जो शांत और आरामदायक हो। एक अच्छी कुर्सी और टेबल का इंतजाम करें, जहां किताबें व्यवस्थित रहें। कमरे के बाहर “परेशान न करें” का बोर्ड लगाएं और परिवार से अनुरोध करें कि वे पढ़ाई के समय आपको न बुलाएं। पढ़ाई को बनाएं रोज की आदत पढ़ाई को बोझ न समझें, बल्कि इसे अपने दैनिक रूटीन का हिस्सा बनाएं। एक टाइम टेबल बनाएं और उसका सख्ती से पालन करें। हर दिन पढ़ाई के लिए समय निकालें और इसे उत्साह के साथ करें। 45 मिनट से ज्यादा लगातार न पढ़ें, ताकि दिमाग तरोताजा रहे। भटकाव से बचें सोशल मीडिया, मोबाइल, और गेम्स पढ़ाई के सबसे बड़े दुश्मन हैं। इनसे दूरी बनाएं। पढ़ाई शुरू करने से पहले फोन को साइलेंट मोड पर रखें या दूसरी जगह रख दें। इससे आपका कीमती समय बचेगा और आप पढ़ाई पर बेहतर फोकस कर पाएंगे। समझदारी से पढ़ें पढ़ाई का मतलब केवल किताबें रटना नहीं, बल्कि समझना है। हर दिन का लक्ष्य तय करें और उसे पूरा करने के बाद खुद को प्रोत्साहित करें। सकारात्मक सोच रखें और खाली समय में प्रेरणादायक किताबें पढ़ें। धीरे-धीरे पढ़ें, लेकिन समझकर पढ़ें। अनुशासन का जादू पढ़ाई में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है अनुशासन। अगर मन भटकने लगे, तो उसे तुरंत नियंत्रित करें। अपने स्टडी टेबल पर एक नोट चिपकाएं “मैं पढ़ाई के समय सिर्फ पढ़ाई करूंगा!” पढ़ाई को मजेदार बनाएं, इसे बोझ न समझें। ब्रेक लें, तरोताजा रहें लगातार पढ़ाई से दिमाग थक जाता है। हर 45-60 मिनट में 5-10 मिनट का ब्रेक लें। इस दौरान कुछ हल्का-फुल्का करें, जैसे टहलना या पानी पीना। यह दिमाग को ताजगी देगा और पढ़ाई को याद रखने में मदद करेगा। अपनी प्रगति का आकलन करें समय-समय पर अपनी पढ़ाई की प्रगति जांचें। क्या आपने अपने लक्ष्य पूरे किए? अगर नहीं, तो कारण जानें और सुधार करें। इससे आपको प्रेरणा मिलेगी और आप पढ़ाई में और बेहतर करेंगे। अपने शरीर को समझें हर किसी का पढ़ाई का समय और तरीका अलग होता है। कुछ लोग सुबह तरोताजा होकर पढ़ते हैं, तो कुछ रात में ज्यादा फोकस कर पाते हैं। अपने शरीर की लय को समझें और उसी समय पढ़ाई करें, जब आपका दिमाग सबसे ज्यादा सक्रिय हो। नींद को दें प्राथमिकता अच्छी नींद पढ़ाई के लिए अमृत है। 7-8 घंटे की नींद आपके दिमाग को तेज करती है और याददाश्त को मजबूत बनाती है। थके हुए दिमाग से पढ़ाई मुश्किल हो जाती है, इसलिए पर्याप्त नींद जरूर लें। स्वस्थ खानपान का ध्यान रखें पढ़ाई में मन लगाने के लिए स्वस्थ शरीर जरूरी है। फल, सब्जियां, और पौष्टिक आहार खाएं। ज्यादा तला-भुना या मीठा खाने से बचें, क्योंकि यह दिमाग और शरीर को सुस्त करता है। इन 10 तरीकों को अपनाकर आप पढ़ाई में न केवल मन लगा पाएंगे, बल्कि परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन करेंगे। तो, आज से ही शुरू करें और बनें टॉप स्कोरर।
RPF Constable Result 2025: रेलवे पुलिस कांस्टेबल भर्ती रिजल्ट जारी होने के बाद अब आगे क्या? यहां जानें सबकुछ

नई दिल्ली: रेलवे पुलिस बल (RPF) में कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2025 का रिजल्ट आखिरकार जारी हो चुका है, जिससे लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म हुआ। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने इस भर्ती के लिए कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) का परिणाम आधिकारिक वेबसाइट rrb.digialm.com और क्षेत्रीय RRB वेबसाइट्स पर अपलोड कर दिया है। जिन उम्मीदवारों ने 2 मार्च से 20 मार्च 2025 तक आयोजित CBT परीक्षा में हिस्सा लिया था, वे अब अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। इस भर्ती के माध्यम से RPF में 4208 कांस्टेबल पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, आरपीएफ कांस्टेबल भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 15 अप्रैल को शुरू हुई थी और 14 मई तक चली थी। इस भर्ती के लिए कुल 45.30 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, लेकिन केवल 22.96 लाख उम्मीदवार ही CBT परीक्षा में शामिल हुए। 11 दिनों तक तीन शिफ्टों में आयोजित इस परीक्षा के बाद, 42,143 उम्मीदवारों को शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) और शारीरिक मापतौल परीक्षा (PMT) के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। ये भी पढ़ें- DU Admission 2025: दिल्ली विश्वविद्यालय ने लॉन्च किया CSAS पोर्टल, UG-PG दाखिले के लिए शुरू प्रक्रिया कैसे चेक करें रिजल्ट? उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट https://www.rrbcdg.gov.in या अपनी क्षेत्रीय RRB वेबसाइट पर जाकर रिजल्ट देख सकते हैं। होमपेज पर “CEN RPF 02/2024 (Constable): CBT Result & Cut Off Score” लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद एक पीडीएफ फाइल खुलेगी, जिसमें CBT में शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के रोल नंबर होंगे। अपने रोल नंबर को खोजने के लिए “Ctrl + F” का उपयोग करें और पीडीएफ को डाउनलोड कर लें। यह सुनिश्चित करें कि आपका रोल नंबर लिस्ट में है, क्योंकि केवल शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवार ही अगले चरण में हिस्सा ले सकेंगे। क्या होगा अगला चरण? शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को अब पीईटी और पीएमटी के लिए बुलाया जाएगा। इस चरण की तारीख और एडमिट कार्ड जल्द ही आरआरबी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। पीईटी में उम्मीदवारों की शारीरिक क्षमता, जैसे दौड़, लंबी कूद और ऊंची कूद का परीक्षण होगा। पीएमटी में उनकी ऊंचाई, वजन और छाती का माप लिया जाएगा। इसके बाद, सफल उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन (DV) के लिए बुलाया जाएगा। आरआरबी ने स्पष्ट किया है कि PET/PMT और डीवी में बुलाए जाने का मतलब अंतिम चयन नहीं है। अगर किसी उम्मीदवार के दस्तावेजों में विसंगति पाई गई या गलत जानकारी दी गई, तो उनकी उम्मीदवारी किसी भी चरण में रद्द हो सकती है। उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को PET/PMT और डीवी का शेड्यूल एसएमएस, ईमेल और वेबसाइट नोटिफिकेशन के माध्यम से मिलेगा। उम्मीदवारों को सत्यापन के दिन सभी मूल दस्तावेज, जैसे शैक्षिक प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और जाति प्रमाण पत्र, साथ लाने होंगे।
DU Admission 2025: दिल्ली विश्वविद्यालय ने लॉन्च किया CSAS पोर्टल, UG-PG दाखिले के लिए शुरू प्रक्रिया

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय ने स्नातक और स्नातकोत्तर कोर्सेज में दाखिले के लिए अपनी बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया शुरू कर दी है। डीयू ने अपने कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (CSAS) पोर्टल 2025 को लॉन्च कर दिया है, जिसके माध्यम से इच्छुक छात्र-छात्राएं दाखिले के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, इस पोर्टल का उद्घाटन डीयू के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता, डीन एडमिशन प्रोफेसर हनीत गांधी और स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक प्रो. पायल मांगो ने किया। यह पोर्टल दाखिला प्रक्रिया को और अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। रजिस्ट्रेशन का पहला चरण शुरू हो चुका है और छात्र-छात्राएं अब इस पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। कितना लगेगा आवेदन शुल्क? इस रजिस्ट्रेशन शुल्क इस बार भी सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए 250 रुपये, जबकि एससी, एसटी और दिव्यांग छात्रों के लिए 100 रुपये निर्धारित किया गया है। डीन एडमिशन प्रोफेसर हनीत गांधी ने बताया कि दूसरा चरण तब शुरू होगा, जब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी-यूजी) के परिणाम घोषित होंगे। परिणाम घोषित होने के बाद, छात्र अपने सीयूईटी स्कोर को CSAS पोर्टल पर अपलोड करेंगे, जिसके आधार पर सीट आवंटन होगा। कितनी सीटें होंगी उपलब्ध? डीयू के 69 कॉलेजों और संस्थानों में कुल 71,624 स्नातक सीटें उपलब्ध हैं, जिनमें 79 स्नातक प्रोग्राम और 186 बीए कोर्स कॉम्बिनेशन शामिल हैं। विश्वविद्यालय में कुल 1,550 से अधिक कोर्स कॉम्बिनेशन उपलब्ध हैं। दाखिले के लिए 12वीं पास होना अनिवार्य है और चयन पूरी तरह सीयूईटी-यूजी के स्कोर पर आधारित होगा। एनटीए ने जून 2025 के पहले सप्ताह तक सीयूईटी परीक्षा आयोजित की थी और इसके परिणाम अब जुलाई में आने की उम्मीद है। शुरू होंगे दो नए स्नातकोत्तर कोर्स बता दें कि इस साल डीयू ने दो नए स्नातकोत्तर कोर्स एमए टूरिज्म और एमए हिंदी जर्नलिज्म, जिनमें प्रत्येक में 50 सीटें होंगी शुरू करने की घोषणा की है। इसके अलावा, एमए इंग्लिश जर्नलिज्म कोर्स को भी जल्द शुरू करने की योजना है। इस साल पीजी कोर्सेज में सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए एक अतिरिक्त सीट आरक्षित की गई है। इसके साथ ही, दाखिला प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए कुछ संशोधन किए गए हैं, जिसमें ऑटो एकसेप्ट मोड लागू करना शामिल है ताकि कोई भी आवेदक सीट आवंटन से वंचित न रहे। डीयू के नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड (NCWEB) के माध्यम से दिल्ली एनसीटी की महिला उम्मीदवारों के लिए दाखिला प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी, जो 12वीं के मेरिट स्कोर पर आधारित होगी। CSAS पोर्टल मोबाइल पर भी काम करता है, लेकिन बेहतर अनुभव के लिए लैपटॉप या डेस्कटॉप का उपयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं शैक्षणिक सत्र 1 अगस्त से शुरू होगा। दाखिला शर्तों में भी बदलाव किए गए हैं। एनटीए द्वारा प्रस्तावित विषयों की सूची में बदलाव को ध्यान में रखते हुए, डीयू ने अधिकांश प्रोग्राम्स की पात्रता शर्तों को संशोधित किया है। अब उम्मीदवार एक भाषा + तीन विषय या दो भाषाओं + दो विषयों का चयन कर सकते हैं और सर्वश्रेष्ठ स्कोर पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा, बीएससी (ऑनर्स) प्रोग्राम्स के लिए भाषाओं में न्यूनतम 30% अंक की अनिवार्यता को हटा दिया गया है।
UPSSSC का बड़ा अपडेट, वीडीओ भर्ती में प्रवेश पत्र शुल्क जमा करने की प्रक्रिया शुरू, इस दिन होगी परीक्षा

नई दिल्लीः ग्राम पंचायत अधिकारी यानी VDO ने कुछ समय पहले 1468 पदों पर भर्ती निकाली थी, जिसमें अब प्रवेश पत्र के लिए शुल्क जमा होने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बता दें कि यह भर्ती उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के द्वारा हो रही है। डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, भर्ती के लिए लिखित परीक्षा 27 अप्रैल को होगी। जिसमें प्रवेश पत्र की जरूरत होती है और इसके लिए आपको फीस जमा करनी होगी। आयोग के सचिव अवनीश सक्सेना ने बताया कि भर्ती में 66691 अभ्यर्थी लिखित परीक्षा के लिए शार्ट लिस्ट किए गए हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रवेश पत्र के लिए अभ्यर्थी को पहले ऑनलाइन शुल्क जमा करना होगा, तभी उन्हें परीक्षा में बैठने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रवेश पत्र जारी करने की सूचना जल्द ही वेबसाइट पर दी जाएगी। आइए आपको भर्ती से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातते हैं। भर्ती से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें भर्ती बोर्ड: यह भर्ती उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित की जा रही है। परीक्षा का नाम: UPSSSC VDO परीक्षा, जिसे UP ग्राम विकास अधिकारी परीक्षा भी कहा जाता है। शैक्षणिक योग्यता: कैंडिडेट के पास 12वीं पास और CCC सर्टिफिकेट होना चाहिए। ऑफिशियल नोटिफिकेशन: UPSSSC जल्द ही VDO भर्ती 2025 के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगा। जो इसी हफ्ते तक हो सकती है। आवेदन प्रक्रिया: इच्छुक उम्मीदवार UPSSSC की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय की पीएचडी परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जारी, इस तारीख को होगी परीक्षा

लखनऊ विश्वविद्यालय में 7 और 8 दिसंबर को होने वाली पीएचडी प्रवेश परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी हो गये हैं। प्रवेश समन्वयक अनित्य गौरव ने बताया कि प्रवेश पत्र अभ्यर्थी अपने लॉग इन आईडी का इस्तेमाल कर डाउनलोड कर सकेंगे। लखनऊ: राजधानी के लखनऊ विश्वविद्यालय में 7 और 8 दिसंबर को होने वाली पीएचडी प्रवेश परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी हो गये हैं। अभ्यर्थी लखनऊ विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। इस दौरान प्रवेश समन्वयक अनित्य गौरव ने बताया कि प्रवेश पत्र अभ्यर्थी अपने लॉग इन आईडी का इस्तेमाल कर डाउनलोड कर सकेंगे। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षालखनऊ विश्वविद्यालय के लॉ, एजुकेशन और वेस्टर्न हिस्ट्री विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के प्रवेश पत्र जारी कर दिया गया है। वहीं परीक्षा 15 दिसंबर को होगी। परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रणाली के 40 सवाल होंगे। फिर परीक्षा की मेरिट के आधार पर साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। टैबलेट के लिए 10 तक होगी केवाईसीलखनऊ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को टैबलेट और स्मार्टफोन के लिए 10 दिसंबर तक केवाईसी कराना होगा। केवाईसी के लिए विद्यार्थियों को डिजीशक्ति पोर्टल पर जाना होगा। केवाईसी अपडेट करने वाले विद्यार्थियों को टैबलेट और स्मार्टफोन दिए जाएंगे।
UPPSC 2024 : यूपीपीएससी शिक्षक प्रवेश पत्र जारी, ऐसे करें डाउनलोड

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने तकनीकी शिक्षा शिक्षक सेवा परीक्षा 2024 (Technical Education Teacher Service Exam 2024) के लिए प्रवेश पत्र जारी कर दिए हैं। विभिन्न विषयों में lecturer की 1,370 रिक्तियों के लिए परीक्षा आयोजित की जाती है। उम्मीदवार अपने प्रवेश पत्र UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in से डाउनलोड कर सकते हैं। नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने तकनीकी शिक्षा शिक्षक सेवा परीक्षा 2024 (Technical Education Teacher Service Exam 2024) के लिए प्रवेश पत्र जारी कर दिए हैं। जो उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होंगे, वे अपने लॉगिन क्रेडेंशियल (login credentials) का उपयोग करके आधिकारिक वेबसाइट पर अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षा के दिन केंद्र पर अपना एडमिट कार्ड (Admit Card) प्रस्तुत करना होगा। एडमिट कार्ड के साथ, उन्हें दो पासपोर्ट आकार की फोटो और एक वैध ID प्रूफ की मूल और एक फोटोकॉपी भी जमा करनी होगी। विभिन्न विषयों में व्याख्याता (lecturer) की 1,370 रिक्तियों के लिए परीक्षा आयोजित की जाती है। जिन उम्मीदवारों ने इन पदों के लिए आवेदन किया था, वे अपने प्रवेश पत्र UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in से डाउनलोड कर सकते हैं। 90 मिनट पहले करें परीक्षा केंद्रों पर रिपोर्टपरीक्षा 20 अक्टूबर 2024 (रविवार) को दो सत्रों में होगी। पहला सुबह 9:00 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरा दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक। इस परीक्षा के विषयों में लेक्चरर फार्मेसी, आर्किटेक्चर, टेक्सटाइल केमिस्ट्री, टेक्सटाइल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (Industrial and control में विशेषज्ञता के साथ), टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल डिजाइन प्रिंटिंग और कालीन प्रौद्योगिकी शामिल हैं। अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से 90 मिनट पहले लखनऊ जिले में अपने संबंधित परीक्षा केंद्रों पर रिपोर्ट करना आवश्यक है। प्रवेश निर्धारित समय से 45 मिनट पहले बंद हो जाएगा। एडमिट कार्ड ऐसे करें डाउनलोडचरण 1: UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।चरण 2: “Click here to Download Admit Card” पर क्लिक करें।चरण 3: अपना पंजीकरण नंबर, जन्म तिथि और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करें।चरण 4: भविष्य के संदर्भ के लिए एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और सहेज कर रखें।
यूपी के बलिया इंटर काँलेज में नहीं बनेगा मेडिकल काँलेज, जानिये बड़ी वजह

बलिया में राजकीय इंटर कॉलेज बलिया के मैदान में मेडिकल कॉलेज का निर्माण होना सुनिश्चित किया गया था। लेकिन अब वह मेडिकल कॉलेज वहां पर नहीं बनेगा। बलिया: राजकीय इंटर कॉलेज (Inter College) बलिया (Ballia) के मैदान में मेडिकल कॉलेज (Medical College) के निर्माण को ग्रहण लग गया है। इंटर कॉलेज के ग्राउंड मेंअब वह मेडिकल कॉलेज नहीं बनेगा, बल्कि राजकीय इंटर कॉलेज अपने यथावत भूमि स्थान पर चलेगा। यह निर्णय मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) शासन की अध्यक्षता में 5 अगस्त 2024 की हुई बैठक में लिया गया है। जिसके बाद एक बार फिर मेडिकल कॉलेज के निर्माण (Construction) पर ग्रहण लग गया है। बैठक में लिया गया बड़ा निर्णय डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक मेडिकल कॉलेज प्रारम्भ कराये जाने के संबंध में मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में 05 अगस्त 2024 को संपन्न हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राजकीय इंटर कॉलेज अपनी भूमि पर यथावत चलता रहेगा। किसको मिलेगी भूमि वर्तमान जिला कारागार को स्थानान्तरित करके नई जगह पर बनाया जाना प्रस्तावित है। इस कारण जिला कारागार की भूमि पर मेडिकल कॉलेज बनाया जाना उचित होगा। उक्त भूमि कैबिनेट के अनुमोदनोपरांत चिकित्सा शिक्षा विभाग को निःशुल्क हस्तान्तरित की जाएगी। मिलेंगी बेहतर सुविधाएं पुराना पुरुष अस्पताल, महिला अस्पताल वर्तमान स्थान पर यथावत चलता रहेगा। शहर के मुख्य मार्ग पर मेडिकल कॉलेज स्थापित होने के लिए उक्त स्थल को प्राथमिकता प्रदान की गयी है। जिससे आवागमन व आमजन को बेहतर सुविधा मिल पाएगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि वर्तमान कारागार को चिन्हित स्थान पर स्थानान्तरित किया जाये और तदोपरान्त वर्तमान कारागार के भवन का ध्वस्तीकरण एवं उसके मलबे का निस्तारण सक्षम स्तर से अनुमोनदनोपरान्त नियमानुसार चिकित्सा शिक्षा विभाग अथवा लोक निर्माण विभाग के माध्यम से कराया जाये।
दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में छात्रों की मौत को लेकर कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, जानें पूरा अपडेट

ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी। मामले में पुलिस ने कोचिंग सेंटर संचालकों को गिरफ्तार किया था। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: छात्रों की मौत के मामले में बेसमेंट के सह मालिकों की जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मामला सीबीआई के हाथों में दे दिया है। मामले की जांच अब सीबीआई के द्वारा की जाएगी। युवा डाइनामाइट संवाददाता के अनुसार दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को उस कोचिंग सेंटर के बेसमेंट के चार सह-मालिकों की जमानत याचिका का निपटारा कर दिया। जहां पिछले महीने सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी करने वाले तीन विद्यार्थियों की डूबने से मौत हो गई थी। अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील पर गौर किया कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है
दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले को लिए महत्वपूर्ण घोषणा, जानें पूरा अपडेट

दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने वालों के लिए वि.वि की तरफ से जरूरी तारीख का ऐलान कर दिया गया है। जिन छात्रों को दाखिला हो गया है वे इस डेट से कॉलेज जा सकेंगे। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक के नए बैच की कक्षाएं 29 अगस्त से शुरू होने जा रही है। नए एडमिशन वाले छात्रों को 29 अगस्त से कॉलेज जाना शुरू करना है। युवा डाइनामाइट संवाददाता के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय ने शनिवार को 2024-2025 सत्र में प्रवेश लेने वाले स्नातक के प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए बहुप्रतीक्षित शैक्षणिक कैलेंडर जारी कर दिया। जिसके अनुसार स्नातक के नए बैच की कक्षाएं 29 अगस्त से शुरू होंगी। आपको बताते चलें कि हर साल दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले बच्चों की लाइन लगी रहती है। विश्वविद्यालय की तरफ से स्नातक में दाखिले पूरे कर लिए गए हैं। वहीं अब छात्रों के लिए शैक्षणिक कैलेंडर जारी कर दिया गया है।
शिक्षा का गिरता स्तर और बढ़ती फीस: नीति-निर्माताओं में इच्छा शक्ति का अभाव या असंवेदनशील दृष्टिकोण?

देश में स्कूल से लेकर कॉलेज समेत हर शिक्षण संस्थान में लगातार फीस बढ़ोत्तरी एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है लेकिन इसके साथ शिक्षा का गिरता स्तर भी चिंताजनक है। पढ़िये प्रो. (डॉ.) सरोज व्यास का यह ब्लॉग नई दिल्ली: “शिक्षा के गिरते स्तर और बढ़ती फीस के लिए ज़िम्मेदार कौन” ? लेख द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मन की व्यथा को विचारशील विवेकी पाठकों तक प्रेषित करने मात्र से क्या आपका कर्तव्य पूरा हो गया? क्या केवल प्रश्नचिन्ह लगाना पर्याप्त है? क्या आपके पास कोई सुझाव है? सहयोगी डॉ. गीता ने पूछा – समस्या के साथ समाधान होने चाहिये, ऐसा आप कहती है। मैंने कहा-समाधान और सुझाव हैं, लेकिन कोई समझना ही नहीं चाहता। “भारत की 28वीं शिक्षा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी (26 मई 2014-5 जुलाई 2016) से लेकर दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सीसोदिया (14 फरवरी 2015–28 फरवरी 2023) तक से अथक प्रयासों के बाद मिलने का समय लेने में तो सफल हो गयी, किन्तु हाथ लगी केवल “घंटों की प्रतीक्षा और निराशा”। सांत्वना थी अथवा प्रोत्साहन नहीं जानती लेकिन उसने कहा – कोई बात नहीं, फिर भी लिखिए शायद किसी को कुछ समझ में आ जाए । आपको लेखन के माध्यम से जन सामान्य की आवाज़ उठानी चाहिए। जैसे आप यशपाल कमेटी का उल्लेख कर रही है, भविष्य में कोई आपके सुझावों का उद्धरण दे सकता है। केवल त्रुटियों एवं असफलताओं की चर्चा मेरी मंशा नहीं हैं, लेख के माध्यम से धरातलीय स्तर पर सुझाव देने का दु:स्साहस कर रही हूँ । दिन-प्रतिदिन संस्थानों के अध्यक्षों, निदेशकों, प्राचार्यों और शिक्षक समुदाय के समक्ष आने वाली चुनौतियों तथा कठिनाइयों की ओर सत्ता और शीर्षासन पर विराजमान शिक्षा मंत्रियों, विश्वविद्यालय के कुलपतियो एवं तथाकथित नीति-निर्माता शिक्षाविदों को ध्यान देने की आवश्यकता है। बस्ते का बोझ कम नहीं हुआयशपाल कमेटी 1993 की रिपोर्ट का शीर्षक ‘शिक्षा बिना बोझ के’ था, इससे पूर्व नरेन्द्र देव समिति – 1947, राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 1986, में भी इस सम्बन्ध में सुझाव दिए गये थे। शिक्षा मंत्रालय शैक्षिक गुणवत्ता के लिए प्रतिबद्ध है और आवंटित बजट धनराशि को ख़र्च भी कर रहा है। फिर क्यों आज तक इन सिफारिशों को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया ? क्या सरकारों द्वारा गठित समितियों, कमेटियो और आयोगों का गठन केवल हितधारकों (स्टेकहोल्डर) के मुहं पर ताला लगाने के लिए किया जाता है कि देखिए सरकार कितनी संजीदा है। यदि यह सच नहीं है तो सुझावों की अनदेखी क्यों? सूर्या फाउंडेशन के संस्थापक एवं चैयरमैन, पद्मश्री जयप्रकाश जी के नेतृत्व एवं प्रो. एच एल शर्मा जी के मार्गदर्शन में पहली से पाँचवी तक, एक कक्षा-एक किताब को सूर्या भारती के शिक्षाविदों ने वर्ष 2000 में ही तैयार कर दिया था। अन्य शिक्षाविदों और समाज सेवी संस्थाओं द्वारा भी निरंतर इस क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। सभी के द्वारा समय-समय पर महामहिम राष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री जी और शिक्षा मंत्रियों के संज्ञान में भी इसे लाया गया है। नि: स्वार्थ किए गये प्रयास एवं परिश्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा तो होती है, लेकिन नियमों को कठोरता से लागू किए जाने की दिशा में कोई ठोस क़दम नहीं उठाये जाते । यदि उठाये जाते तो पुन: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बस्ते का बोझ कम कैसे हो ? सम्बन्ध में सुझाव/सिफारिश देने की आवश्यकता नहीं होती। सुझावसही अर्थों में पुस्तके अध्यापकों के लिए सूचनाओं का संग्रह और सैद्धांतिक दिशा-निर्देशिका होती है, लेकिन शैक्षिक व्यवस्था ऐसी है कि विद्यार्थियों के बस्ते में अध्ययन सामग्री (पुस्तकें) रटने के लिए ठूस दी जाती है।पाठ्य पुस्तके विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में रखी जाये, विद्यार्थी सर्वप्रथम अध्यापक द्वारा दिए जाने वाली विषयक जानकारी को सुनें, उसे दोहराये, ग्रहण किए गये ज्ञान को लिखे और तदुपरांत पढ़कर उस पर चिंतन-मनन करें। शिक्षा के सभी स्तरों पर पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगात्मक प्रशिक्षण पर अधिकाधिक बल दिया जाए, क्योंकि व्यवसाय और रोजगार के लिए यह आवश्यक है। पाठ्यक्रम का निर्माण मांग और पूर्ति के नियमानुसार हितधारकों के प्रतिनिधियों (शिक्षार्थी, शिक्षक, अभिभावक, नीति-निर्माता और अनुभवी शिक्षाविद) से विचार-विमर्श करके किया जाए। बढ़ती फीस के लिए ज़िम्मेदार कौन?इस यक्ष प्रश्न का उत्तर देना सामर्थ्य से बाहर है, किन्तु मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों की लाचारी मन को द्रवित कर देती है। 2-3 संतानों को पढ़ाना, दो समय की रोटी की व्यवस्था में लगे माता-पिता के लिए बहुत बड़ी चुनौती है, एक बच्चे की फीस लाखों में कहाँ से लाये । प्रतिस्पर्धा की दौड़ में शैक्षिक गुणवत्ता की चर्चा व्यर्थ है। जिस गति से फीस में बढ़ोतरी हुई है, उससे अधिक गति से शैक्षिक बेरोजगारी बढ़ी है। उदाहरण के लिए यदि गुरु गोबिन्द सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के फीस संरचना (structure) का तुलनात्मक विश्लेषण कर लिया जाए तो जमीन-आसमान का अंतर स्पष्ट हो जायेगा । सुधी पाठकों के लिए दो लिंक साझा कर रही हूँ। http://ipu.ac.in/norms/statues/s27-27.pdf http://www.ipu.ac.in/pubinfo2024/nt300424548%20(2).pdf सुझावस्वायत संस्थाओं (विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय) की फीस मान्यता देने वाली (Affiliating body) संस्थाओं के माध्यम से ऑन लाइन हो सकती है। छात्रवृतियाँ देने की अपेक्षा एडमिशन के समय ही फीस माफ़ अथवा कम की जा सकती है। पाठ्यक्रम की अवधि के अनुसार शिक्षण सामग्री को दो भागों (सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक) में विभाजित किया जाए तथा सैद्धांतिक शिक्षण के लिए फीस की 50% राशि ही शिक्षण संस्थाओं को दी जाए। प्रयोगात्मक शिक्षण-प्रशिक्षण सम्बंधित संस्थाओं में नि: शुल्क करवाया जाए । मेरा यह सुझाव “हींग लगे ना फिटकरी, रंग आए चोखा” कहावत को चरितार्थ करता है। इससे अभिभावकों को केवल आधी फीस ही देनी होगी तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को वर्ष दो वर्ष के लिए अवैतनिक जनशक्ति (Manpowar) मिलेगी। नौकरी के लिए इच्छुक युवाओं को रुचि और कौशल के आधार पर नौकरियां, स्व रोजगार हेतु प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन तथा उच्च शिक्षा के लिए उपाधि प्राप्त हो सकेगी। विकसित भारत @2047 के विजन की पूर्ण सफलता के लिए कमेटियों के गठन, सुझावों और लेख से बात नहीं बनेगी। सत्तारुढ़ राजनेताओं एवं नीति-निर्माताओं की इच्छा शक्ति और मानवीय संवेदना को झकझोरने का समय आ गया है। (लेखिका प्रो. (डॉ.) सरोज व्यास, वर्तमान में फेयरफील्ड तकनीक एवं प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली , निदेशक के पद पर कार्यरत है ।)