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शिक्षा का गिरता स्तर और बढ़ती फीस: नीति-निर्माताओं में इच्छा शक्ति का अभाव या असंवेदनशील दृष्टिकोण?

देश में स्कूल से लेकर कॉलेज समेत हर शिक्षण संस्थान में लगातार फीस बढ़ोत्तरी एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है लेकिन इसके साथ शिक्षा का गिरता स्तर भी चिंताजनक है। पढ़िये प्रो. (डॉ.) सरोज व्यास का यह ब्लॉग नई दिल्ली: “शिक्षा के गिरते स्तर और बढ़ती फीस के लिए ज़िम्मेदार कौन” ? लेख द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मन की व्यथा को विचारशील विवेकी पाठकों तक प्रेषित करने मात्र से क्या आपका कर्तव्य पूरा हो गया? क्या केवल प्रश्नचिन्ह लगाना पर्याप्त है? क्या आपके पास कोई सुझाव है? सहयोगी डॉ. गीता ने पूछा – समस्या के साथ समाधान होने चाहिये, ऐसा आप कहती है। मैंने कहा-समाधान और सुझाव हैं, लेकिन कोई समझना ही नहीं चाहता। “भारत की 28वीं शिक्षा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी (26 मई 2014-5 जुलाई 2016) से लेकर दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सीसोदिया (14 फरवरी 2015–28 फरवरी 2023) तक से अथक प्रयासों के बाद मिलने का समय लेने में तो सफल हो गयी, किन्तु हाथ लगी केवल “घंटों की प्रतीक्षा और निराशा”। सांत्वना थी अथवा प्रोत्साहन नहीं जानती लेकिन उसने कहा – कोई बात नहीं, फिर  भी लिखिए शायद किसी को कुछ समझ में आ जाए । आपको लेखन के माध्यम से जन सामान्य की आवाज़ उठानी चाहिए। जैसे आप यशपाल कमेटी का उल्लेख कर रही है, भविष्य में कोई आपके सुझावों का उद्धरण दे सकता है। केवल त्रुटियों एवं असफलताओं की चर्चा मेरी मंशा नहीं हैं, लेख के माध्यम से धरातलीय स्तर पर सुझाव देने का दु:स्साहस कर रही हूँ । दिन-प्रतिदिन संस्थानों के अध्यक्षों, निदेशकों, प्राचार्यों और शिक्षक समुदाय के समक्ष आने वाली चुनौतियों तथा कठिनाइयों की ओर सत्ता और शीर्षासन पर विराजमान शिक्षा मंत्रियों, विश्वविद्यालय के कुलपतियो एवं तथाकथित नीति-निर्माता शिक्षाविदों को ध्यान देने की आवश्यकता है। बस्ते का बोझ कम नहीं हुआयशपाल कमेटी 1993 की रिपोर्ट का शीर्षक ‘शिक्षा बिना बोझ के’ था, इससे पूर्व नरेन्द्र देव समिति – 1947, राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 1986, में भी इस सम्बन्ध में सुझाव दिए गये थे। शिक्षा मंत्रालय शैक्षिक गुणवत्ता के लिए प्रतिबद्ध है और आवंटित बजट धनराशि को ख़र्च भी कर रहा है। फिर क्यों आज तक इन सिफारिशों को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया ? क्या सरकारों द्वारा गठित समितियों, कमेटियो और आयोगों का गठन केवल हितधारकों (स्टेकहोल्डर) के मुहं पर ताला लगाने के लिए किया जाता है कि देखिए सरकार कितनी संजीदा है। यदि यह सच नहीं है तो सुझावों की अनदेखी क्यों? सूर्या फाउंडेशन के संस्थापक एवं चैयरमैन, पद्मश्री जयप्रकाश जी के नेतृत्व एवं प्रो. एच एल शर्मा जी के मार्गदर्शन में पहली से पाँचवी तक, एक कक्षा-एक किताब को सूर्या भारती के शिक्षाविदों ने वर्ष 2000 में ही तैयार कर दिया था। अन्य शिक्षाविदों और समाज सेवी संस्थाओं द्वारा भी निरंतर इस क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। सभी के द्वारा समय-समय पर महामहिम राष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री जी और शिक्षा मंत्रियों के संज्ञान में भी इसे लाया गया है। नि: स्वार्थ किए गये प्रयास एवं परिश्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा तो होती है, लेकिन नियमों को कठोरता से लागू किए जाने की दिशा में कोई ठोस क़दम नहीं उठाये जाते । यदि उठाये जाते तो पुन: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बस्ते का बोझ कम कैसे हो ? सम्बन्ध में सुझाव/सिफारिश देने की आवश्यकता नहीं होती। सुझावसही अर्थों में पुस्तके अध्यापकों के लिए सूचनाओं का संग्रह और सैद्धांतिक दिशा-निर्देशिका होती है, लेकिन शैक्षिक व्यवस्था ऐसी है कि विद्यार्थियों के बस्ते में अध्ययन सामग्री (पुस्तकें) रटने के लिए ठूस दी जाती है।पाठ्य पुस्तके विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में रखी जाये, विद्यार्थी सर्वप्रथम अध्यापक द्वारा दिए जाने वाली विषयक जानकारी को सुनें, उसे दोहराये, ग्रहण किए गये ज्ञान को लिखे और तदुपरांत पढ़कर उस पर चिंतन-मनन करें। शिक्षा के सभी स्तरों पर पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगात्मक प्रशिक्षण पर अधिकाधिक बल दिया जाए, क्योंकि व्यवसाय और रोजगार के लिए यह आवश्यक है। पाठ्यक्रम का निर्माण मांग और पूर्ति के नियमानुसार हितधारकों के प्रतिनिधियों (शिक्षार्थी, शिक्षक, अभिभावक, नीति-निर्माता और अनुभवी शिक्षाविद) से विचार-विमर्श करके किया जाए। बढ़ती फीस के लिए ज़िम्मेदार कौन?इस यक्ष प्रश्न का उत्तर देना सामर्थ्य से बाहर है, किन्तु मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों की लाचारी मन को द्रवित कर देती है। 2-3 संतानों को पढ़ाना, दो समय की रोटी की व्यवस्था में लगे माता-पिता के लिए बहुत बड़ी चुनौती है, एक बच्चे की फीस लाखों में कहाँ से लाये । प्रतिस्पर्धा की दौड़ में शैक्षिक गुणवत्ता की चर्चा व्यर्थ है। जिस गति से फीस में बढ़ोतरी हुई है, उससे अधिक गति से शैक्षिक बेरोजगारी बढ़ी है। उदाहरण के लिए यदि गुरु गोबिन्द सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के फीस संरचना (structure) का तुलनात्मक विश्लेषण कर लिया जाए तो जमीन-आसमान का अंतर स्पष्ट हो जायेगा । सुधी पाठकों के लिए दो लिंक साझा कर रही हूँ। http://ipu.ac.in/norms/statues/s27-27.pdf http://www.ipu.ac.in/pubinfo2024/nt300424548%20(2).pdf सुझावस्वायत संस्थाओं (विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय) की फीस मान्यता देने वाली (Affiliating body) संस्थाओं के माध्यम से ऑन लाइन हो सकती है। छात्रवृतियाँ देने की अपेक्षा एडमिशन के समय ही फीस माफ़ अथवा कम की जा सकती है। पाठ्यक्रम की अवधि के अनुसार शिक्षण सामग्री को दो भागों (सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक) में विभाजित किया जाए तथा सैद्धांतिक शिक्षण के लिए फीस की 50% राशि ही शिक्षण संस्थाओं को दी जाए। प्रयोगात्मक शिक्षण-प्रशिक्षण सम्बंधित संस्थाओं में नि: शुल्क करवाया जाए । मेरा यह सुझाव “हींग लगे ना फिटकरी, रंग आए चोखा” कहावत को चरितार्थ करता है। इससे अभिभावकों को केवल आधी फीस ही देनी होगी तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को वर्ष दो वर्ष के लिए अवैतनिक जनशक्ति (Manpowar) मिलेगी। नौकरी के लिए इच्छुक युवाओं को रुचि और कौशल के आधार पर नौकरियां, स्व रोजगार हेतु प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन तथा उच्च शिक्षा के लिए उपाधि प्राप्त हो सकेगी। विकसित भारत @2047 के विजन की पूर्ण सफलता के लिए कमेटियों के गठन, सुझावों और लेख से बात नहीं बनेगी। सत्तारुढ़ राजनेताओं एवं नीति-निर्माताओं की इच्छा शक्ति और मानवीय संवेदना को झकझोरने का समय आ गया है। (लेखिका प्रो. (डॉ.) सरोज व्यास, वर्तमान में  फेयरफील्ड तकनीक एवं प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली , निदेशक के पद पर कार्यरत है ।)

NEET UG : दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए शुरू हुई प्रक्रिया, जानें क्या है डीयू का पहला एक्शन

डीयू ने नीट यूजी काउंसलिंग के लिए एक कदम आगे बढ़ा दिया है। छात्रों को डीयू में दाखिले का बेसब्री से इंतजार था। जिसकों लेकर डीयू ने भी काम शूरू कर दिया है। पढ़िये युवा डाइनामाइट की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने नीट यूजी काउंसलिंग के माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीडब्ल्यू (सशस्त्र बलों के कर्मियों के बच्चे, विधवाएं) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए दस्तावेज जमा करने की विंडो खोल दी है। सबमिशन पोर्टल पर चिकित्सा विज्ञान संकाय की वेबसाइट के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। आधिकारिक नोटिस के अनुसार, नीट यूजी परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले और 85% दिल्ली कोटा के तहत 2024-25 शैक्षणिक सत्र में विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश चाहने वाले CW श्रेणी के उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से CW रियायतों के लिए अपनी पात्रता साबित करने वाले प्रासंगिक दस्तावेज जमा करने होंगे।

UGC: खाली बची सीटों को इस तरह भरेंगे विश्वविद्यालय, जानें आपके काम की खबर

अगर आप भी कॉलेज में दाखिला लेना चाहते हैं तो आपके लिए यूजीसी की तरफ से नई घोषणा की गई है। अगर किसी की रैंक कम आई है या सीयूईटी की परीक्षा नहीं दी है तो उन्हें एक और मौका दिया जा रहा है। पढ़िये युवा डाइनामाइट की खास रिपोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विश्वविद्यालयों को स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी है। आयोग ने कहा है कि यदि प्रवेश के नियमित दौर के बाद सीटें रिक्त रह जाती हैं, तो विश्वविद्यालय स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित कर सकते हैं। आपको बताते चलें कि कुछ विश्वविद्यालय का कहना था कि उन्हें सीयूईटी में भाग लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। वहीं मामले को संज्ञान में लेते हुए यूसीजी ने विश्वविद्यालयों को बची हुई सीटे भरने के लिए खुद की परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी है। अब वे खुद की परीक्षा आयोजित कर बच्चों का चयन कर सकते हैं। वहीं छात्रों को भी इस नियम के आने के बाद एक और मौका मिल जाएगा। इसके साथ ही जो छात्र किसी एक विश्वविद्याल की प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाया वह दूसरे वि.वि में जाकर परीक्षा दे सकते हैं।

विश्वविद्यालयों की UG/PG सीटें अब नहीं रहेंगी खाली, CUET के बाद प्रवेश परीक्षा कराने की UGC ने दी छूट

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों और सम्बद्ध/घटक महाविद्यालयों में CUET के आधार पर UG/PG दाखिले को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs) जारी किए हैं। नई दिल्ली: NTA द्वारा आयोजित CUET UG/PG 2024 में प्राप्त स्कोर के आधार पर केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने जा रहे हैं छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खबर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों और सम्बद्ध/घटक महाविद्यालयों में UG/PG दाखिले को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs) जारी किए हैं। इस सम्बन्ध में UGC अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार द्वारा आज, 1 अगस्त को साझा की गई जानकारी के मुताबिक CUET स्कोर के आधार पर दाखिले के बाद बची रह गई UG/PG कोर्सेस की सीटों को भरने के लिए विश्वविद्यालय अतिरिक्त मानकों का प्रयोग कर सकते हैं, जिसमें अलग प्रवेश परीक्षा में शामिल हैं। UGC द्वारा केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए तैयार की गई SOPs में कहा गया है कि यदि किसी कोर्स की सीटें बची रह जाती हैं तो इसके लिए संस्थान द्वारा निम्नलिखित मानक अपनाए जा सकते हैं:- • विश्वविद्यालय अपने स्तर पर प्रवेश परीक्षा का आयोजन कर सकते हैं या विश्वविद्यालय के सम्बन्धित द्वारा छंटनी परीक्षा (Screening Test) का आयोजन किया जा सकता है। • विश्वविद्यालय छात्र-छात्राओं का दाखिला योग्यता परीक्षा (Qualifying Exam) के प्राप्तांकों के आधार पर भी कर सकते हैं। CUET UG PG 2024: सीयूईटी के अंक ही मुख्य आधार हालांकि, स्टूडेंट्स को ध्यान देना चाहिए कि UGC की तरफ से जारी SOPs में कहा गया है कि सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों व सम्बद्ध/घटक महाविद्यालयों में UG/PG दाखिले के लिए मुख्य आधार CUET के अंक ही होंगे। ऐसे में यदि CUET से बची सीटों के लिए यदि प्रवेश परीक्षा का आयोजन भी किया जाता है तो अंतिम चयन सूची (Merit List) तैयार करने में CUET और प्रवेश परीक्षा दोनों के अंकों का प्रयोग किया जाएगा। CUET UG PG 2024: खाली रह जाती थीं सीटें UGC अध्यक्ष ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में CUET के आधार पर UG/PG दाखिले के लिए आयोजित काउंसलिंग के 3-4 राउंड के बाद भी सीटें खाली रह जाने की सूचनाएं UGC को प्राप्त हो रही थीं। आयोग ने माना कि किसी भी शैक्षणिक वर्ष में रिक्त सीटें न सिर्फ संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दी जा रही उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा से कई छात्र-छात्राएं वंचित हो जा रहे थे। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए SOPs तैयार की गई हैं।

CBSE Compartment Result: सीबीएसई बोर्ड 10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षाओं के नतीजे जल्द कर सकता है घोषित

जो स्टूडेंट्स CBSE द्वारा 15 से 22 जुलाई तक आयोजित सेकेंडरी की कंपार्टमेंट परीक्षाओं या 15 जुलाई को आयोजित सीनियर सेकेंडरी की कंपार्टमेंट परीक्षाओं (CBSE 12th Compartment Result 2024) में सम्मिलित हुए थे वे जल्द ही अपना परिणाम ऑनलाइन देख सकेंगे। नई दिल्ली: CBSE बोर्ड से 10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट/सप्लीमेंट्री परीक्षाओं में सम्मिलित हुए 2.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं के लिए महत्वपूर्ण अपडेट। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा वर्ष 2023-24 के लिए सेकेंडरी (कक्षा 10) और सीनियर सेकेंडरी (कक्षा 12) के छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित कंपार्टमेंट परीक्षाओं के नतीजों की घोषणा जल्द ही की जा सकती है। बोर्ड द्वारा परिणाम जारी किए जाने की तिथि व समय को लेकर कोई भी जानकारी आधिकारिक तौर पर साझा नहीं की गई है, लेकिन खबरों के मुताबिक CBSE 10वीं, 12वीं Supplementary रिजल्ट कभी भी जारी कर सकता है। CBSE Board Compartment Result 2024: ऐसे डाउनलोड करें रिवाइज्ड मार्कशीटऐसे में जो स्टूडेंट्स CBSE द्वारा 15 से 22 जुलाई तक आयोजित सेकेंडरी की कंपार्टमेंट परीक्षाओं या 15 जुलाई को आयोजित सीनियर सेकेंडरी की कंपार्टमेंट परीक्षाओं में सम्मिलित हुए थे, वे जल्द ही अपना परिणाम देख सकेंगे। इसके लिए छात्र-छात्राओं को बोर्ड के आधिकारिक रिजल्ट पोर्टल results.cbse.nic.in पर विजिट करना होगा और फिर अपने सम्बन्धित क्लास के कंपार्टमेंट रिजल्ट लिंक पर क्लिक करना होगा। फिर नए पेज पर स्टूडेंट्स अपना रोल नंबर और अन्य डिटेल भरकर सबमिट करके अपना परिणाम और संशोधित अंत तालिका (Revised Mark Sheet) स्क्रीन पर देख सकेंगे। बता दें कि CBSE बोर्ड ने वर्ष 2023-24 के लिए 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन फरवरी में किए जाने के बाद नतीजों की घोषणा मई को की थी। इन नतीजों में जिन स्टूडेंट्स की कंपार्टमेंट आई थी, उनके लिए कंपार्टमेंट एग्जाम जुलाई के तीसरे सप्ताह में आयोजित किए गए थे। इन परीक्षाओं के परिणामों का इंतजार अब सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी के स्टूडेंट्स कर रहे हैं, जो कि जल्द ही समाप्त होने जा रहा है।

SSC Job: एसएससी में निकली बंपर भर्ती, बढ़ाई गई पदों की संख्या, जानें पूरा अपडेट

एसएससी एमटीएस में बड़े स्तर पर भर्ती निकली है। विभाग की तरफ से पदों की संख्या भी बढ़ाई जा चुकी है। युवा डाइनामाइट लाया है आपके लिए भर्ती की पूरी जानकारी। पढ़िये ये विशेष रिपोर्ट नई दिल्ली: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने सूचित किया है कि एसएससी एमटीएस 2024 के माध्यम से भरे जाने वाले मल्टी टास्किंग स्टाफ (गैर-तकनीकी) रिक्तियों की संख्या पहले अधिसूचित 4,887 रिक्तियों से बढ़ाकर 6,144 कर दी गई है। सीआईबीसी और सीबीएन में 3,439 हवलदार रिक्तियों के साथ, कुल संख्या अब 9,583 है। कर्मचारी चयन आयोग ने मल्टी टास्किंग स्टाफ, सीआईबीसी और सीबीएन में हवलदार के पदों पर की जानें वाली भर्ती के लिए रिक्तियों की संख्या बढ़ा दी है। उम्मीदवार इन बंपर पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आपको बताते चलें कि पहले 4887 पदों पर भर्तियां निकाली गई थी जिनकी संख्या अब बढ़ा दी गई है। जो उम्मीदवार इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं वे SSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन दे सकते हैं.

Government Job:पीएनएसटी और जीएनएमटीएसटी में मांगे गए आवेदन, सिंतबर में होगी परीक्षा

अगर आप भी सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आपके लिए काम की खबर है। जानें किस विभाग में किस पद पर निकली है भर्ती। पढ़िये युवा डाइनामाइट न्यूज की पूरी रिपोर्ट नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में शासन ने सरकारी नौकरी का पिटारा खोल दिया है। शासन ने पीएनएसटी और जीएनएमटीएसटी के लिए आवेदन मांगे है। उम्मीदवार 14 अगस्त तक फॉर्म भरकर पद के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसके बाद विभाग द्वारा सितंबर में परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। परीक्षा के बाद चयनित लोगों को नौकरी मिलेगी। युवा डाइनामाइट के अनुसार मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड ( एमपीईएसबी ) ने प्री-नर्सिंग चयन परीक्षा (पीएनएसटी)- 2024 और जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी चयन परीक्षा (जीएनएमटीएसटी) 2024 की अधिसूचना जारी कर दी है। परीक्षा के लिए आवेदन विंडो 31 जुलाई से 14 अगस्त तक खुली रहेगी। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाकर आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। परीक्षा 4 सितंबर और 5 सितंबर को दो पालियों में आयोजित होगी। पहली पाली सुबह 9 से 11 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक।

BHU के पीएचडी में सिर्फ नेट और जेआरएफ उत्तीर्ण छात्र ही ले सकेंगे दाखिला

यूपी के बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के पीएचडी में एडमिशन अब नये तरीके से एडमिशन होगा। केवल नेट और जेआरएफ उत्तीर्ण छात्र ही विश्वविद्यालय के पीएचडी में एडमिशन ले सकेंगे। वाराणसी: बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के पीएचडी में एडमिशन अब नये नियमों के आधार पर होगा। अब सिर्फ नेट और जेआरएफ उत्तीर्ण छात्र ही विश्वविद्यालय के पीएचडी में एडमिशन ले सकेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पहले से ही नोटिफिकेशन जारी कर चुका है। BHU के परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर जे पी सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में पीएचडी में एडमिशन यूजीसी के गाइडलाइन के मुताबिक ही होगा। इससे पहले बीएचयू के पीएचडी में प्रवेश के लिए पहले विश्वविद्यालय एंट्रेंस टेस्ट RET का आयोजन करता था और उसके जरिये ही पीएचडी में प्रवेश लेता था। पीएचडी में इतनी सीटेंबता दें कि BHU में अलग-अलग विषयों में पीएचडी के लिए 1400 से ज्यादा सीटें है। सभी सीटों पर पीएचडी में प्रवेश के लिये मेरिट नेट के 70 फीसदी अंक और इंटरव्यू के 30 फीसदी नम्बरों के आधार पर तय होगा। प्रोफेसर जे पी सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय यूजीसी नेट परीक्षा पास करने वाले छात्रों को तीन भागों में बांटा जाएगा। उसके बाद जीआरएफ, असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी इन तीन कैटेगिरी के लिए योग्य माना जाएगा। वहीं विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के पीएचडी में प्रवेश यूजीसी नेट नहीं बल्कि एग्रीकल्चर सर्विस रिक्रूटमेंट बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा के स्कोर बोर्ड के आधार पर किया जाएगा।

IAS Coaching: आईएएस कोचिंग हब राजेंद्र नगर में फिर दरिया बनीं सड़कें, कई सेंटर्स में घुसा पानी

ओल्ड राजेंद्र नगर में जहां पिछले सप्ताह एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भर जाने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी वहां बुधवार शाम को भारी बारिश के बाद फिर से जलभराव हो गया। नई दिल्ली: दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर के कोचिंग सेंटर राव आईएएस स्टडी सर्किल के बेसमेंट में जलभराव का पानी घुसने की वजह से तीन छात्रों की डूबकर हुई मौत के बाद भी इस सड़क के हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ हैं। यहां पर अतिरिक्त पंप और सुपर सकर मशीन से नाले की सफाई की गई थी, लेकिन कोई इंतजाम काम नहीं आए। हालांकि बारिश तेज होते ही एमसीडी के कर्मचारी अलर्ट होकर मौके पर तो पहुंच गए, लेकिन जलभराव को नहीं रोक पाए। सड़क पर कमर तक भरा पानी बड़ा बाजार मार्ग से लेकर सतपाल भाटिया मार्ग पर कमर तक पानी भर गया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि जलभराव की मात्रा 27 जून की घटना से भी ज्यादा थी। यही वजह रही कि कोचिंग सेंटर राव आईएएस स्टडी सर्किल में फिर पानी पहले भूतल और फिर बेसमेंट में घुस गया। जलभराव के बीच छात्र घटनास्थल पर प्रदर्शन करते हुए नजर आए, जबकि स्थानीय लोग फिर उसी मार्ग को देखने पहुंचे। हालांकि जलभराव की वजह से कोचिंग सेंटर राव आईएएस स्टडी सर्किल के बड़ा बाजार मार्ग और सतपाल भाटिया मार्ग पर यातायात नहीं चल रहा था। जिन लोगों को अपने घर या दुकान तक जाना था, वह जलभराव से गुजरते हुए नजर आए। हालांकि मौके पर दिल्ली पुलिस के जवान मौजूद थे, जो लोगों को जलभराव वाले स्थान पर जाने से रोक रहे थे। साथ ही प्रवेश और निकास को भी जलभराव होने के बाद बंद कर दिया गया था। https://youtu.be/knk0pyuelbo दुकानों से लेकर कोचिंग सेंटर में भरा पानी बारिश कम होने के बाद यहां के लोग अपनी दुकानों से लेकर कोचिंग सेंटर में बाल्टी व वाइपर से पानी निकालते हुए नजर आए। अधिकारियों के अनुसार शंकर रोड पर ढलान है, जिससे शंकर रोड, न्यू राजेंद्र नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर का यह सतपाल भाटिया मार्ग सड़क पर जमा होने वाले पानी की वजह दरिया में तब्दील हो जाता है। ऐसी ही स्थिति करोल बाग मेट्रो स्टेशन की ओर से पूसा रोड पर होती है, जहां ढलान की वजह से पानी जमा होकर बड़ा बाजार मार्ग पर हो जाता है। दोनों ओर से आने वाले पानी से भारी जलभराव हो जाता है।

Banking Job: बैंक में नौकरी पाने का सुनहरा अवसर, IBPS ने पीओ के 4455 पदों पर निकाली वैकेंसी

आईबीपीएस ने पीओ के 4455 पदों पर वैकेंसी निकाली है। इसके लिए आवेदन 1 अगस्त 2024 से शुरू हो गये हैं। ज्यादा जानकारी के लिये पढ़िये ये रिपोर्ट नई दिल्ली: बैंक में नौकरी पाने वाले लोगों के लिये बेहतरीन मौका है। आईबीपीएस ने पीओ के 4455 पदों पर वैकेंसी निकाली है। ये पद प्रोबेशनरी ऑफिसर्स/मैनेजमेंट ट्रेनीज के हैं। इसके लिए आवेदन 1 अगस्त 2024 से शुरू हो गये हैं। आईबीपीएस पीओ के इन पदों पर आवेदन आज यानी 1 अगस्त से शुरू हो रहे हैं। इसके आवेदन की आखिरी तारीख 21 अगस्त 2024 है। साथ ही आवेदन को प्रिंट करने की अंतिम तारीख 5 सितंबर 2024 है। वहीं ऑनलाइन फीस भी 1 से 21 अगस्त के बीच जमा की जा सकेगी। आवेदन केवल ऑनलाइन होंगे। आवेदन के लिये आईबीपीएस की ऑफिशियल वेबसाइट ibps.in. पर जाना होगा। इन पदों पर आवेदन करने के लिए कैंडिडेट को किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया होना अनिवार्य है। 20 से 30 साल तक के कैंडिडेट्स आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा का आयोजन प्रीलिम्स अक्टूबर महीने में और मेन्स नवंबर महीने में आयोजित होगा। वहीं इसका रिजल्ट दिसंबर 2024 या जनवरी 2025 में रिलीज किया जाएगा। इंटरव्यू जनवरी/फरवरी 2025 में हो सकते हैं और रिजल्ट अप्रैल 2025 में रिलीज किया जा सकता है। आवेदन शुल्क कितना देना होगाअप्लाई करने के लिए जनरल और ओबीसी कैटेगरी के कैंडिडेट को 850 रुपये शुल्क देना होगा। एससी, एसटी, पीएच कैटेगरी के कैंडिडेट्स को 175 रुपये देने होंगे। इन पदों पर कैंडिडेट का सेलेक्शन कई राउंड की परीक्षा पास करने के बाद होगा। आपको बता दें कि बैंक ऑफ इंडिया में 885 पद, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 2000 पद, कैनरा बैंक में 750 पद, इंडियन ओवरसीज बैंक में 260 पद, पंजाब नेशनल बैंक में 200 पद, पंजाब एंड सिंड बैंक में 360 पदों की वैकेंसी है। सेलेक्शन हरोने के बाद बेसिक पे 36,000 रुपये होगी। इसमें बाकी एउंस मिलाकर और कटौती करने के बाद कैंडिडे्टस को महीने के करीब 52 हजार रुपये इन हैंड सैलरी मिलेगी।

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