Comscore Analytics
Section-Specific Split Button

अब भाषा नहीं बनेगी रुकावट… BUMS की पढ़ाई हिंदी में कराने वाला देश का पहला राज्य बनेगा मध्य प्रदेश

अब हिंदी में भी होगी BUMS (Img: AI Generated Image)

Bhopal: यूनानी चिकित्सा शिक्षा को ज्यादा आसान और सभी छात्रों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य जल्द ही बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (BUMS) की पढ़ाई के लिए हिंदी पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने वाला देश का पहला राज्य बनने जा रहा है।

अब तक इस कोर्स की किताबें केवल उर्दू में उपलब्ध थीं, जिससे उर्दू न जानने वाले छात्रों को पढ़ाई में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में छात्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

उर्दू न जानने वाले छात्रों के लिए बड़ी राहत (BUMS)

भोपाल स्थित प्रदेश के एकमात्र सरकारी यूनानी मेडिकल कॉलेज में हर साल ऐसे छात्रों की संख्या बढ़ रही है, जिन्हें उर्दू भाषा का ज्ञान नहीं है। ऐसे विद्यार्थियों के लिए विषय समझना और परीक्षा की तैयारी करना चुनौती बन जाता था। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने यूनानी मेडिकल की किताबों का हिंदी में अनुवाद कराने का फैसला लिया है।

बदलते नियमों के बाद बढ़ी गैर-उर्दू छात्रों की संख्या (BUMS)

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2022-23 के बाद दाखिला नियमों में बदलाव किया गया था। पहले BUMS कोर्स में प्रवेश के लिए दसवीं कक्षा में उर्दू विषय पढ़ना अनिवार्य था, लेकिन अब यह शर्त हटा दी गई है। इसके बाद से गैर-उर्दू भाषी छात्रों ने भी इस कोर्स में रुचि दिखानी शुरू कर दी।

सत्र 2025-26 में कॉलेज की 75 सीटों में से 15 सीटों पर ऐसे छात्रों ने प्रवेश लिया, जिन्हें उर्दू नहीं आती। यह संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे हिंदी पाठ्यपुस्तकों की जरूरत और भी ज्यादा महसूस की गई।

SC, ST और OBC छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा (BUMS)

आयुष विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस फैसले से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की भागीदारी भी बढ़ेगी। अभी तक भाषा की बाधा के कारण कई योग्य छात्र इस कोर्स से दूर रह जाते थे।

सरकार का कहना है कि प्रदेश में यूनानी डॉक्टरों के कई पद खाली हैं। अगर अधिक छात्र इस क्षेत्र में आएंगे तो भविष्य में इन रिक्त पदों को भरने में भी आसानी होगी।

यूनानी शिक्षा का दायरा होगा और बड़ा

अब तक यूनानी चिकित्सा की पढ़ाई को उर्दू भाषा तक सीमित माना जाता था। इसके कारण कई मेधावी छात्र केवल भाषा की वजह से इस क्षेत्र में कदम नहीं रख पाते थे। हिंदी में किताबें उपलब्ध होने के बाद यह स्थिति बदलने की उम्मीद है।

Previous Post
Next Post

Advertisement

कैटेगरी

Advertisement

error: Content is protected !!