New Delhi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर नया अपडेट जारी किया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष कक्षा 10 में तीसरी भाषा (R3) की कोई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। इस विषय का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर होने वाली आंतरिक परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। बोर्ड ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डालना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना है।
स्कूल स्तर पर होगा मूल्यांकन
CBSE के अनुसार, तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूलों द्वारा आयोजित इंटरनल टेस्ट के माध्यम से किया जाएगा। यानी छात्रों को इस विषय के लिए अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। बोर्ड का कहना है कि यह व्यवस्था छात्रों के लिए आसान और संतुलित शिक्षा प्रणाली तैयार करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
नौवीं में फेल होने पर भी मिलेगा प्रमोशन
बोर्ड ने CBSE छात्रों को एक और बड़ी राहत दी है। यदि कोई छात्र कक्षा 9 में तीसरी भाषा (R3) विषय में पास नहीं हो पाता है, तब भी उसे कक्षा 10 में प्रमोट कर दिया जाएगा। हालांकि, छात्र को कक्षा 10 के दौरान इस विषय को पास करना अनिवार्य होगा। यानी प्रमोशन तो मिलेगा, लेकिन तीसरी भाषा की पढ़ाई जारी रखनी होगी।
CBSE के नए बैच पर लागू होंगे अलग नियम
CBSE ने यह भी बताया कि सत्र 2026-27 से कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। जब यही छात्र आगे चलकर कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब उन्हें तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी। यानी भविष्य में इस नीति को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह लागू किया जाएगा।
CBSE छात्रों पर बोझ नहीं बढ़ाना है उद्देश्य
बोर्ड ने साफ किया है कि थ्री लैंग्वेज पॉलिसी का मकसद छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक बोझ डालना नहीं है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विभिन्न भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और छात्रों में बहुभाषी क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से लागू की गई है। फिलहाल छात्रों को राहत देते हुए बोर्ड परीक्षा से छूट दी गई है, जबकि आगे आने वाले बैचों के लिए नए नियम लागू किए जाएंगे।
निष्कर्ष
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