New Delhi: अगर आपको मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाना है और अपराध से जुड़े मामलों की जांच में भी रुचि है, तो फॉरेंसिक मेडिसिन (Forensic Medicine) आपके लिए एक विकल्प हो सकता है। फॉरेंसिक डॉक्टर पोस्टमार्टम (Forensic Doctor Post-Mortems), चोटों की चिकित्सकीय जांच और मौत के कारणों का पता लगाने जैसे महत्वपूर्ण काम करते हैं। उनकी रिपोर्ट पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया में भी अहम भूमिका निभाती है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए 12वीं के बाद MBBS और फिर फॉरेंसिक मेडिसिन में MD की पढ़ाई करनी होती है। आइए जानते हैं कि 12वीं के बाद फॉरेंसिक डॉक्टर कैसे बन सकते हैं और इस क्षेत्र में नौकरी के क्या अवसर हैं।
12वीं के बाद क्या करना होगा?
फॉरेंसिक (Forensic) डॉक्टर बनने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार को 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) विषयों के साथ पढ़ाई करनी होगी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में MBBS में दाखिले के लिए NEET-UG परीक्षा पास करनी होती है। NEET-UG में प्राप्त अंकों और काउंसलिंग प्रक्रिया के आधार पर उम्मीदवारों को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलता है। MBBS की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही फॉरेंसिक मेडिसिन में विशेषज्ञता हासिल करने का रास्ता खुलता है।
MBBS के बाद करें MD की पढ़ाई
MBBS कोर्स की अवधि साढ़े चार साल होती है। इसके बाद उम्मीदवारों को एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करनी होती है। MBBS और इंटर्नशिप के बाद फॉरेंसिक मेडिसिन में विशेषज्ञ बनने के लिए MD (Forensic Medicine and Toxicology) किया जा सकता है। यह तीन साल का पोस्टग्रेजुएट कोर्स है। इसमें दाखिले के लिए आमतौर पर NEET-PG परीक्षा देनी होती है। MD की पढ़ाई के दौरान छात्रों को मेडिकल लीगल मामलों, पोस्टमार्टम, चोटों की जांच और टॉक्सिकोलॉजी जैसे विषयों की जानकारी दी जाती है।
कितनी मिल सकती है सैलरी?
फॉरेंसिक (Forensic) मेडिसिन के क्षेत्र में वेतन पद, योग्यता, अनुभव और नियुक्ति करने वाले संस्थान पर निर्भर करता है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए अलग-अलग वेतनमान निर्धारित होते हैं। हाल ही में हरियाणा सरकार की ओर से सीनियर साइंटिस्ट ऑफिसर के पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इस पद के लिए फॉरेंसिक साइंस में मास्टर डिग्री की योग्यता मांगी गई थी। चयनित उम्मीदवारों को पे लेवल-9 के तहत 53,000 रुपये से लेकर 1,67,300 रुपये तक वेतनमान दिया जाना था। हालांकि, यह पद फॉरेंसिक डॉक्टर का नहीं, बल्कि फॉरेंसिक साइंस से जुड़ा अलग पद है।
फॉरेंसिक डॉक्टर का क्या होता है काम?
फॉरेंसिक (Forensic) डॉक्टर का काम मेडिकल जांच के जरिए किसी मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाने में मदद करना है। उनके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
- संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामलों में पोस्टमार्टम करना।
- शरीर पर मौजूद चोटों और उनके संभावित कारणों की जांच करना।
- मौत की वजह और उससे जुड़ी चिकित्सकीय परिस्थितियों का पता लगाना।
- मेडिकल लीगल रिपोर्ट तैयार करना।
- पुलिस और जांच एजेंसियों को चिकित्सकीय तथ्यों की जानकारी देना।
- जरूरत पड़ने पर अदालत में विशेषज्ञ गवाही देना।
- मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाना और रिसर्च करना।
कितने साल में बन सकते हैं फॉरेंसिक डॉक्टर?
12वीं के बाद फॉरेंसिक (Forensic) डॉक्टर बनने के लिए MBBS, इंटर्नशिप और MD की पढ़ाई पूरी करनी होती है। MBBS में साढ़े चार साल, इंटर्नशिप में एक साल और MD में तीन साल लगते हैं। इस तरह कुल मिलाकर लगभग साढ़े आठ साल का समय लगता है। इस अवधि में NEET-UG और NEET-PG की तैयारी, परीक्षा और एडमिशन प्रक्रिया में लगने वाला अतिरिक्त समय शामिल नहीं है।
फॉरेंसिक डॉक्टर और फॉरेंसिक साइंटिस्ट में क्या अंतर है?
फॉरेंसिक डॉक्टर और फॉरेंसिक साइंटिस्ट दोनों अपराध से जुड़े मामलों की जांच में मदद करते हैं, लेकिन इनके काम और शैक्षणिक रास्ते अलग-अलग होते हैं। फॉरेंसिक (Forensic) डॉक्टर मेडिकल विशेषज्ञ होते हैं। वे पोस्टमार्टम, चोटों की जांच और मौत के कारणों का चिकित्सकीय विश्लेषण करते हैं। वहीं, फॉरेंसिक साइंटिस्ट प्रयोगशालाओं में DNA, फिंगरप्रिंट, खून के नमूने और दूसरे वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच करते हैं। फॉरेंसिक डॉक्टर बनने के लिए MBBS के बाद MD (Forensic Medicine and Toxicology) करना होता है, जबकि फॉरेंसिक साइंटिस्ट बनने के लिए आमतौर पर फॉरेंसिक साइंस में संबंधित स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री की जरूरत होती है।
कहां मिल सकती है नौकरी?
फॉरेंसिक (Forensic) मेडिसिन में MD पूरा करने के बाद उम्मीदवारों के पास सरकारी और निजी क्षेत्र में करियर के कई विकल्प हो सकते हैं। वे मेडिकल कॉलेजों, सरकारी अस्पतालों, फॉरेंसिक मेडिसिन विभागों और संबंधित चिकित्सा संस्थानों में काम कर सकते हैं। इसके अलावा, योग्य उम्मीदवार शिक्षण और शोध के क्षेत्र में भी करियर बना सकते हैं। अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ वरिष्ठ पदों पर काम करने के अवसर मिल सकते हैं। इस तरह, फॉरेंसिक मेडिसिन उन युवाओं के लिए एक विशेष करियर विकल्प है, जो चिकित्सा ज्ञान के जरिए कानूनी और जांच प्रक्रिया में योगदान देना चाहते हैं।
निष्कर्ष
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