Career Guidance: आज के समय में पढ़ाई को बेहतर भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी माना जाता है। माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए मेहनत करते हैं, युवा कई साल तक कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते हैं और बेहतर नौकरी के सपने देखते हैं। लेकिन जब डिग्री हाथ में आने के बाद भी नौकरी नहीं मिलती, तो ये सपने चिंता और निराशा में बदलने लगते हैं। सवाल यह है कि आखिर डिग्री हासिल करने के बावजूद युवा बेरोजगार क्यों रह जाते हैं? क्या समस्या शिक्षा व्यवस्था में है, नौकरी के सीमित अवसरों में या फिर पढ़ाई और बाजार की जरूरतों के बीच बढ़ती दूरी में? पढ़ाई पूरी, फिर भी नौकरी नहीं:
युवाओं के सामने क्यों बढ़ रही है रोजगार की चुनौती?
इस सवाल का जवाब सरकारी आंकड़ों में भी दिखाई देता है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, 2023-24 में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर 10.2 प्रतिशत थी। इसी अवधि में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के स्नातक युवाओं की बेरोजगारी दर 13 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि, स्नातकों में बेरोजगारी दर 2017-18 के 17.2 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 13 प्रतिशत हुई थी। यानी स्थिति में सुधार के बावजूद नौकरी की तलाश कर रहे डिग्रीधारकों की चुनौती बनी हुई है। (Career Guidance)
डिग्री और नौकरी के बीच क्यों बढ़ रही है दूरी?
बेरोजगारी की एक बड़ी वजह पढ़ाई और कंपनियों की जरूरतों के बीच तालमेल की कमी मानी जाती है। कॉलेजों में कई पाठ्यक्रम अब भी सैद्धांतिक ज्ञान पर अधिक जोर देते हैं, जबकि कंपनियां ऐसे उम्मीदवार चाहती हैं जिन्हें काम का व्यावहारिक अनुभव हो। कंप्यूटर का ज्ञान, डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल, कम्युनिकेशन स्किल और समस्या सुलझाने की क्षमता जैसी योग्यताएं नौकरी पाने में अहम भूमिका निभाती हैं। (Career Guidance)
ऐसे में केवल डिग्री हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं रह जाता। उदाहरण के तौर पर, बीकॉम करने वाले छात्र को अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, एक्सेल और टैक्स से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी की जरूरत हो सकती है। इसी तरह, पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले छात्र के लिए लेखन, वीडियो एडिटिंग और डिजिटल मीडिया की समझ उपयोगी साबित हो सकती है। (Career Guidance)
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट की इंडिया एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024 में भी युवाओं के रोजगार से जुड़ी चुनौतियों और शिक्षा, कौशल तथा नौकरी के बीच संबंध का विश्लेषण किया गया है। (Career Guidance)
अनुभव की मांग और नौकरियों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा
नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के सामने दूसरी बड़ी चुनौती अनुभव की है। कई कंपनियां शुरुआती पदों पर भी इंटर्नशिप या पहले से काम करने का अनुभव मांगती हैं। इससे फ्रेशर्स के लिए पहली नौकरी हासिल करना मुश्किल हो सकता है। जिन छात्रों को पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट या व्यावहारिक प्रशिक्षण का मौका नहीं मिलता, उन्हें दूसरे उम्मीदवारों के मुकाबले परेशानी हो सकती है। (Career Guidance)
इसके अलावा, सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं की संख्या भी बड़ी है, जबकि किसी भर्ती में पद सीमित होते हैं। ऐसे में कई उम्मीदवार सालों तक परीक्षाओं की तैयारी करते रहते हैं और निजी क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों के लिए जरूरी कौशल विकसित करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। दूसरी ओर, निजी नौकरियों में कम शुरुआती वेतन, लंबे काम के घंटे और अपने शहर से दूर जाकर काम करने जैसी परिस्थितियां भी कुछ युवाओं के फैसले को प्रभावित करती हैं। (Career Guidance)
क्या सिर्फ डिग्री से मिल सकती है नौकरी?
बदलते रोजगार बाजार में डिग्री के साथ कौशल और अनुभव का महत्व बढ़ रहा है। छात्रों के लिए जरूरी है कि वे अपनी पढ़ाई के दौरान ही इंटर्नशिप करें, छोटे प्रोजेक्ट बनाएं और अपने क्षेत्र से जुड़े डिजिटल टूल्स सीखें। उन्हें रिज्यूमे तैयार करने, इंटरव्यू देने और नौकरी के लिए आवेदन करने का तरीका भी समझना चाहिए। (Career Guidance)
सरकार की ओर से स्किल इंडिया मिशन और नेशनल करियर सर्विस जैसी पहलें कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन और रोजगार से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संचालित की जा रही हैं। हालांकि, इन पहलों का लाभ उठाने के साथ-साथ प्रशिक्षण की गुणवत्ता और वास्तविक नौकरियों से उसके जुड़ाव पर भी ध्यान देना जरूरी है।
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परीक्षा पास करने के बजाय काम करने के लिए भी तैयार
आखिरकार, डिग्री होने के बाद भी बेरोजगार रह जाना केवल किसी एक युवा की कमी का नतीजा नहीं है। इसके पीछे शिक्षा की गुणवत्ता, व्यावहारिक कौशल, रोजगार के अवसर, भर्ती प्रक्रिया और नौकरी की शर्तों जैसे कई कारण हो सकते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए जरूरी है कि पढ़ाई को रोजगार की जरूरतों से जोड़ा जाए और युवाओं को ऐसी शिक्षा मिले, जो उन्हें सिर्फ परीक्षा पास करने के बजाय काम करने के लिए भी तैयार करे। (Career Guidance)