New Delhi: देशभर के मेडिकल छात्रों की प्राथमिकताओं में एक बड़ा और दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है। नीट पीजी 2026 के पहले राउंड की काउंसलिंग के आंकड़े बताते हैं कि देश के सबसे होनहार और उच्च रैंक वाले युवा डॉक्टरों के बीच अब रेडियोलॉजी के मुकाबले ‘जनरल मेडिसिन’ पहली पसंद बन गई है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) द्वारा जारी राउंड 1 की फाइनल अलॉटमेंट लिस्ट के अनुसार, इस साल टॉप रैंकर्स ने जनरल मेडिसिन को बड़े पैमाने पर चुना है, जिससे दोनों स्पेशलिटीज के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से बढ़ गया है।
NEET PG Counselling: जनरल मेडिसिन और रेडियोलॉजी में मुकाबला
नीट पीजी 2026 के पहले राउंड में कुल 63,177 एमडी-एमएस सीटों के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया संपन्न हुई। इसमें टॉप 100 उम्मीदवारों में से 51 ने एमडी मेडिसिन को चुना, जबकि रेडियोडायग्नोसिस चुनने वाले छात्रों की संख्या 28 रही। दोनों के बीच 23 सीटों का यह बड़ा अंतर पिछले साल यानी 2025 (जहां 46 ने मेडिसिन और 40 ने रेडियोलॉजी चुना था) की तुलना में काफी ज्यादा है।
अगर बात करें टॉप 501 अलॉटमेंट्स की, तो अकेले 233 उम्मीदवारों ने जनरल मेडिकल कोर्स का चुनाव किया। इसके बाद 149 सीटों के साथ एमडी रेडियोडायग्नोसिस दूसरा सबसे पसंदीदा कोर्स रहा। इन दोनों प्रमुख स्पेशलिटीज को मिलाकर टॉप 501 में से कुल 382 सीटें अलॉट हुईं, जो कुल आवंटन का लगभग 76.2 प्रतिशत हिस्सा है। इस प्रकार, जनरल मेडिसिन में रेडियोलॉजी के मुकाबले लगभग 1.6 गुना ज्यादा सीटें अलॉट की गईं।
NEET PG Counselling में सबसे ज्यादा चुने गए प्रमुख कोर्सेज की स्थिति
एमडी जनरल मेडिसिन: 233
एमडी रेडियोडायग्नोसिस (रेडियोलॉजी): 149
एमडी डर्मेटोलॉजी: 37
एमएस जनरल सर्जरी: 25
एमएस ओब्स्टेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी: 15
(NBEMS) जनरल मेडिसिन: 10
एमडी न्यूक्लियर मेडिसिन: 9
एमडी पीडियाट्रिक्स: 7
एमडी ऑर्थोपेडिक्स: 6
(NBEMS) रेडियोडायग्नोसिस: 6
NEET PG Counselling में इन प्रमुख विषयों के अलावा बाकी बचे उम्मीदवार एनस्थिसियोलॉजी, ऑप्थैल्मोलॉजी और अन्य कोर्सों में बंटे हुए हैं।
डॉक्टरों की पसंद में बदलाव के पीछे की वजहें
मेडिकल शिक्षा एक्सपर्ट्स और रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारियों का मानना है कि युवा डॉक्टर अब पीजी कोर्स को अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि एक लॉन्चपैड या ट्रांजिट स्टेशन के रूप में देख रहे हैं। एमडी मेडिसिन पूरा करने के बाद छात्रों के लिए कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और क्रिटिकल केयर जैसी सुपर-स्पेशलिटीज के दरवाजे खुल जाते हैं। यह करियर फ्लैक्सिबिलिटी उन छात्रों को आकर्षित करती है जो शुरुआती दौर में अपने विकल्प खुले रखना चाहते हैं।
दूसरी ओर, हालांकि रेडियोलॉजी आज भी एक लोकप्रिय विषय है, लेकिन मेडिकल इमेजिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता दखल छात्रों के मन में भविष्य को लेकर असमंजस पैदा कर रहा है। इसके अलावा, भारी-भरकम खर्च पर रेडियोलॉजी उपकरण स्थापित करने की चुनौती और लंबे समय तक ऑक्यूपेशनल रेडिएशन का खतरा जैसी व्यावहारिक परेशानियां भी छात्रों के फैसले को प्रभावित कर रही हैं। साथ ही, देश भर में जनरल मेडिसिन की सीटें 4,000 से अधिक हैं जबकि रेडियोलॉजी की सीटें करीब 1,200 ही हैं, जिससे जनरल मेडिसिन में पसंदीदा कॉलेज मिलने की संभावना भी अधिक होती है।
NEET PG Counselling और ऐसे ही जानकारी और टिप्स के लिये युवा डाइनामाइट न्यूज़ को पढ़ते रहें।