MBA-BTech Students Business Trend: भारत के कॉलेजों में करियर को लेकर युवाओं की सोच तेजी से बदल रही है। पहले जहां एमबीए और बीटेक करने वाले छात्रों की प्राथमिकता बड़ी कंपनियों में नौकरी और लाखों-करोड़ों रुपये के पैकेज हासिल करना होती थी, वहीं अब कई युवा अपना कारोबार शुरू करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
वे केवल नौकरी पाने वाले नहीं, बल्कि दूसरों को रोजगार देने वाले उद्यमी बनना चाहते हैं। GUESSS इंडिया नेशनल सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 22 प्रतिशत से अधिक भारतीय छात्र पढ़ाई के दौरान या उसके तुरंत बाद अपना बिजनेस शुरू कर चुके हैं। यह आंकड़ा कॉलेज परिसरों में बढ़ती उद्यमिता की ओर संकेत करता है।
GUESSS सर्वे में सामने आया युवाओं का नया ट्रेंड
GUESSS इंडिया नेशनल सर्वे रिपोर्ट, जिसे IIT मंडी और रेवा यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु का समर्थन मिला है, भारतीय छात्रों के बीच उद्यमिता की बढ़ती रुचि को रेखांकित करती है। रिपोर्ट के अनुसार, 22 प्रतिशत से अधिक छात्र पढ़ाई के दौरान या तुरंत बाद अपना कारोबार शुरू कर चुके हैं। यह बदलाव ऐसे समय में दिखाई दे रहा है, जब युवाओं के सामने पारंपरिक नौकरी के साथ स्टार्टअप और स्वरोजगार जैसे विकल्प भी मौजूद हैं। हालांकि, यह आंकड़ा सभी भारतीय छात्रों की पसंद या भविष्य के करियर का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
बीटेक छात्र AI और ऐप, MBA-BTech वाले बिजनेस मॉडल पर कर रहे काम
इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के छात्रों के बीच बिजनेस शुरू करने के तरीके भी बदल रहे हैं। तकनीकी कौशल रखने वाले बीटेक छात्र ऐप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सॉफ्टवेयर और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड जैसे विचारों पर काम कर रहे हैं। वहीं, एमबीए छात्र शुरुआती दौर के स्टार्टअप में सह-संस्थापक बनने या अपना बिजनेस मॉडल तैयार करने में रुचि दिखा रहे हैं।
इन युवाओं के लिए कारोबार केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि अपने आइडिया को बाजार तक पहुंचाने का अवसर भी है। हालांकि, स्टार्टअप शुरू करने की इच्छा और सफल कारोबार खड़ा करने के बीच लंबा अंतर होता है। बाजार की जरूरत समझना, ग्राहकों का भरोसा जीतना और सही टीम बनाना इसके अहम हिस्से हैं।
कॉलेजों में इनक्यूबेशन सेंटर से मिल रही मदद
कॉलेजों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप से जुड़े कार्यक्रमों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो रही है। ऐसे केंद्रों के जरिए छात्रों को बिजनेस प्लान बनाने, शुरुआती प्रोटोटाइप तैयार करने और संभावित निवेशकों से संपर्क करने का अवसर मिल सकता है। कुछ संस्थान विशेषज्ञों की सलाह और नेटवर्किंग के मौके भी उपलब्ध कराते हैं।
इसके अलावा, सरकारी स्टार्टअप योजनाओं और वित्तीय सहायता के विकल्पों से भी नए कारोबार शुरू करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, हर छात्र या स्टार्टअप को फंडिंग मिलना सुनिश्चित नहीं है। छात्रों को किसी भी योजना का लाभ लेने से पहले पात्रता, नियम और शर्तों की जांच करनी चाहिए।
पढ़ाई के साथ बिजनेस शुरू करना कितना चुनौतीपूर्ण?
कॉलेज के दौरान कारोबार शुरू करना सुनने में आकर्षक लग सकता है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी हैं। पढ़ाई और बिजनेस के बीच समय बांटना, शुरुआती पूंजी जुटाना, बाजार में प्रतिस्पर्धा का सामना करना और ग्राहकों तक पहुंच बनाना आसान नहीं होता। कई स्टार्टअप शुरुआती दौर में अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर पाते।
ऐसे में छात्रों के लिए जरूरी है कि वे बाजार की जरूरतों को समझकर अपने आइडिया की जांच करें और सीमित स्तर पर प्रयोग करें। अलग-अलग कौशल वाले दोस्तों के साथ टीम बनाना भी उपयोगी हो सकता है। तकनीकी विशेषज्ञता के साथ वित्त, मार्केटिंग और ग्राहक प्रबंधन की समझ कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद करती है।
नौकरी या अपना कारोबार, युवा चुन रहे नए रास्ते
युवाओं के बीच उद्यमिता की बढ़ती रुचि का अर्थ यह नहीं है कि नौकरी का महत्व कम हो गया है। बड़ी कंपनियों में काम करना आज भी अनुभव, आर्थिक स्थिरता और कौशल विकास का महत्वपूर्ण रास्ता है। वहीं, अपना कारोबार शुरू करने वाले युवाओं को अधिक जिम्मेदारी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।
बदलाव यह है कि अब कई छात्र करियर के लिए केवल कैंपस प्लेसमेंट पर निर्भर नहीं रहना चाहते। वे नौकरी और उद्यमिता, दोनों को संभावित विकल्प के रूप में देख रहे हैं। GUESSS सर्वे के आंकड़े इसी बदलती सोच की ओर संकेत करते हैं।








