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Trending Topic: गोरखपुर में 2000 युवकों को मिलेगी नौकरी, ये बड़ी कंपनी करने वाली है 700 करोड़ का निवेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर में 700 करोड़ रूपये के निवेश से नया संयंत्र खुलने जा रहा है, जिससे यहां के लगभग 2000 लोगों को नौकरियां मिलेगी। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज की पूरी रिपोर्ट गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर में दिग्गज कंपनी आदित्य बिरला ग्रुप 700 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। इस निवेश के जरिये कंपनी गोरखपुर औद्योगिक इकाई क्षेत्र (गीड़ा) में पेंट का कारखाना लगाएगी। कहा जा रहा है कि इस पेंट कारखाने के लिये आदित्य बिरला ग्रुप को 70 से 80 एकड़ जमीन की जरूरत है और गीडा अधिकारियों ने इसके लिये कंपनी को भीटी रावत क्षेत्र में जमीन देने की घोषणा की है। आदित्य बिरला ग्रुप के इस भारी भरकम निवेश और औद्योगिक संयंत्र से से 2000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही कई अप्रत्यक्ष रोजगार भी इस कंपनी के जरिये पैदा किये जाएंगे। गोरखपुर में नये औद्योगिक संयंत्र की स्थापना से आसपास के लोगों को बड़ी संख्या में रोजगार मिलने की संभावना जतायी जा रही है।    जानकारी के मुताबिक इस पेंट कारखाने के सिलसिले में आदित्य बिरला ग्रुप की टीम फरवरी माह में ही गोरखपुर आई थी। कंपनी ने तब गोरखपुर के जिलाधिकारी के विजयेंद्र पांडियन और गीडा के तत्कालीन सीईओ संजीव रंजन से मिलकर पेंट की फैक्ट्री लगाने का प्रस्ताव शासन को दिया था। इसके साथ ही भारी भरकम निवेश की भी घोषणा की गई थी। कहा जा रहा है कि प्रशासन ने कंपनी के इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। पिछले महीने यह आदित्य बिरला ग्रुप की टीम पूरे प्रोजेक्ट के साथ गोरखपुर पहुंची थी जिसमें निवेश की राशि और अन्य मुद्दों पर बात की गई। कंपनी ने प्रशासन को अपना प्रोजेक्ट का पूरा प्रस्ताव भी दिया। अब गीडा अधिकारियों ने इन्हें भीटी रावत क्षेत्र में जमीन देने की बात की है और भरोसा भी दे दिया है। इस प्रोजेक्ट के बारे में गीडा के नए सीईओ पवन अग्रवाल का कहना है कि ग्रुप को जो भी जमीन चाहिए हमने दिखा दी है और इनको जितनी जमीन चाहिए उपलब्ध करा दी जाएगी। 

Trending Topic: UPSSSC की ओर से जूनियर इंजीनियर परीक्षा में बीटेक वालों को भी मौका देने के लिए अभ्यर्थियों ने उठाई मांग, जानिए वजह

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित जूनियर इंजीनियर भर्ती परीक्षा में बीटेक की डिग्री वालों को मौका नहीं दिए जानें पर कुछ अभ्यर्थियों ने एग्जाम रद्द करने की मांग की है। नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित जूनियर इंजीनियर भर्ती परीक्षा में डिप्लोमा वालों को तो शामिल होने का अवसर मिला, लेकिन बीटेक की डिग्री हासिल करने वालों को इस भर्ती में शामिल होने का मौका नहीं दिया गया है। बीटेक डिग्री धारकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए मांग की है कि जूनियर इंजीनियर परीक्षा 2016 और 2018 को स्थगित या रद्द किया जाए। बीटेक अभ्यर्थियों ने भर्ती में भेदभाव का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए गुहार लगाई है। 10 लाख से अधिक बीटेके डिग्रीधारी यूपी में हैं बेरोजगार। प्रतियोगी छात्रों ने मुख्य मंत्री को भेजे गए पत्र में लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए एक अहम फैसले में कहा कि उच्च शिक्षा या योग्यता को नौकरी पाने के लिए अवगुण या दोष नहीं माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने जेई पदों के लिए बीटेक डिग्री धारकों को शामिल करने के आदेश के साथ यही भी उल्लेख किया है कि जेई पदों के लिए डिग्री धारकों को बाहर निकालने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि जेई पदोन्नति के बाद 50 फीसदी एई के पदों पर नियुक्त होते हैं, जिसके लिए डिग्रीधारी होना आवश्यक है।

Trending Topic: सीबीएसई 12वीं बोर्ड एग्जाम रद्द होंगे या नहीं? सोमवार को होगा अब फैसला

कक्षा बारहवीं बोर्ड परीक्षा को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई को टाल दिया गया है। इसका फैसला अब सोमवार को किया जाएगा। नई दिल्लीः देश में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है। कई लोग परीक्षाएं रद्द करने की मांग कर रहे हैं। सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के एग्जाम रद्द होंगे या नहीं? इसका फैसला अब सोमवार को किया जाएगा। आपको बता दें की देश में कोरोना लहर को कारण सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। एडवोकेट ममता शर्मा ने केंद्र, सीबीएसई और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) को सीबीएसई और आईसीएसई कक्षा 12वीं की परीक्षाओं को रद्द करने का निर्देश देने की मांग की थी। इस याचिका के बाद सीबीएसई कक्षा 12वीं की परीक्षा रद्द करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन और दायर किया गया है। सीबीएसई 12वीं परीक्षाओं को लेकर 300 छात्र भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना को पत्र लिखकर कर परीक्षाएं रुकवाने की मांग कर चुके हैं। छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश से यह भी मांग की वह केंद्र सरकार को इस संबंध में निर्देश दे कि वैकल्पिक असेसमेंट योजना उपलब्ध कराई जाए।

Trending Topic: जानिये Twitter के इस नये ट्रेंड के बारे में, ‘बहाना नहीं बहाली चाहिए’ हो रहा ट्रेंड क्यों है चर्चा में

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट Twitter पर रविवार दोपहर से ‘बहाना नहीं बहाली चाहिए’ लगातार ट्रेंड हो रहा है, अब तक बड़ी संख्या में इस हैशटेग पर Tweet हो चुके हैं। डाइनामाइट न्यूज रिपोर्ट में जानिये इस ट्रेंड के बारे में नई दिल्ली: माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर आज दोपहर बाद से ‘बहाना नहीं बहाली चाहिए’ लगातार ट्रेंड हो रहा है। खबर लिखे जाने के वक्त तक इस हैश टैग पर एक लाख से अधिक ट्विट किये जा चुके थे। ‘बहाना नहीं बहाली चाहिए’ हैश टैग पर ट्विट करने वालों में अधिकतर युवा है, जो देश में बढ़ती बेरोजगारी की समस्या पर सरकार का ध्यान आकर्षित करा रहे हैं। युवाओं के संगठन ‘युवा हल्ला बोल’ द्वारा ट्विटर पर चलाये जा रहे इस हैशटैग पर देश भर के युवा यूजर्स सरकार पर तंज भी कस रहे हैं। उनका कहना है कि विभिन्न राज्यों में खाली पड़े लाखों शिक्षकों समेत तमाम सरकारी पदों पर योग्य और शिक्षित युवाओं को तुरंत बहाल करना चाहिये और इसके लिये सरकार को अब किसी तरह का बहाना नहीं बनाना चाहिये। डाइनामाइट न्यूज़ से बातचीत में ‘युवा हल्ला बोल’ से जुड़े गोविंद मिश्रा का कहना है कि यूपी-बिहार समेत उत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों में पिछले चार सालों से कई सरकारी पद खाली है। यूपीपीएससी समेत कई विभागों से संबंधित सरकारी नियुक्तियों के लिये या तो परीक्षाएं आयोजित नहीं की जा रही हैं या फिर ये पद विभिन्न कारणों से खाली है। इसी तरह शिक्षकों के भी लाखों पद है, जिन पर सरकार नियुक्तियां नहीं कर रही है। गोविंद मिश्रा का कहना है कि सरकारी पदों पर नियुक्तियां न होने के कारण लाखों की तादाद में युवाओं के बीच बेरोजगारी बढ़ती जा रही है।

JEE Advanced date 2021: इस दिन होगी जेईई एडवांस्ड परीक्षा, सरकार ने बदला ये नियम

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने जेईई एडवांस्ड परीक्षा 2021 की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इस साल से एग्जाम के लिए एक खास नियम का बदलाव किया गया है। यहां जानें पूरी जानकारी। नई दिल्लीः आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने जेईई एडवांस्ड परीक्षा 2021 की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही एक खास नियम में भी बदलाव हुआ है। केंद्रीय मंत्री निशंक ने जानकारी देते हुए बताया कि 3 जुलाई 2021 को इसकी तारीख सुनिश्चित की गई है। साथ ही बताया कि आईआईटी में प्रवेश के लिए 75 फीसदी अंकों की अनिवार्यता संबंधी शर्त को भी इस बार हटा लिया गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस साल परीक्षा का आयोजन आईआईटी खड़गपुर द्वारा किया जाएगा। बता दें कि जेईई एडवांस्ड परीक्षा के जरिए देश के प्रतिष्ठित 23 आईआईटी संस्थानों में एडमिशन मिलता है। JEE मेंस में अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को जेईई एडवांस्ड देने का मौका मिलता है।

Trending Topics: अब 4 साल में मिलेगी डीयू से डिग्री, ये है वजह

नई दिल्लीः नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद अब डीयू पर तीन साल की जगह चार साल में अंडरग्रेजुएट कोर्सेस की डिग्री देने की तैयारी कर रहा है। डीयू के तीन साल के ऑनर्स कोर्सेस को चार साल का बनाया जाएगा। यानी स्टूडेंट्स को तीन साल में ऑनर्स की डिग्री नहीं मिल पाएगी। हालांकि डीयू शिक्षक संघ इसका विरोध कर रहा है। यूनिवर्सिटी ने सितंबर 2020 में नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के लिए एक समिति बनाई थी।

CBSE Board Exam 2021: वायरल एग्‍जाम डेट्स को लेकर बोर्ड ने जारी किया नोटिस, जानिए क्या कहा

इस समय सोशल मीडिया पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की डेटशीट काफी वायरल हो रही है। इसको लेकर अब बोर्ड ने एक नोटिस जारी किया है। जानिए क्या कहा है बोर्ड ने उस नोटिस में। नई दिल्लीः कुछ समय से सोशल मीडिया पर CBSE कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड की थ्‍योरी और प्रैक्टिकल परीक्षाओं की डेट/ महीने की जानकारी वाली पोस्‍ट सर्कुलेट हो रही है। जिसे लेकर बोर्ड ने एक नोटिस निकाला है। नोटिस में ये कहा लिखा गया है कि- छात्रों, शिक्षकों, स्कूलों और अभिभावकों को सचेत किया है कि बोर्ड की तरफ से एग्‍जाम की डेट्स या महीने की कोई जानकारी जारी नहीं की गई है। नोटिस में बोर्ड ने कहा कि सर्कुलेट हो रही सूचना सही नहीं है और इससे स्कूलों, छात्रों और अभिभावकों में घबराहट पैदा हो सकती है। गुरुवार को नोटिस जारी करके कहा गया है कि- CBSE के संज्ञान में यह आया है कि दसवीं और बारहवीं बोर्ड की परीक्षाओं और प्रैक्टिकल परीक्षाओं की डेट की जानकारी कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और न्यूज़ पेपर्स में जारी की जा रहा है। चूंकि ये जानकारी सही नहीं है, इसलिए, यह छात्रों और अभिभावकों में घबराहट पैदा कर सकती है।

ज्वलंत मुद्दाः समाज में महिलाओं की स्थिति आज भी एक बड़ा मुद्दा

आज के समय में भारत में भले ही महिलाओं की स्थिति थोड़ा बहुत बदलाव आया है, लेकिन ये अभी भी एक बड़ा मुद्दा है। एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण के कदम उठा रही है तो दूसरी ओर घर से बाहर निकलने वाली महिलाओं की सुरक्षा भी चिंताजनक होती जा रही है। नई दिल्लीः हाल ही में एक विदेशी संस्थान की रिपोर्ट के मुताबिक भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक देश बताया गया है। इस सर्वे में महिलाओं का स्वास्थ्य, शिक्षा, उनके साथ होने वाली यौन हिंसा, हत्या और भेदभाव जैसे कुछ पैमाने थे, जिन पर दुनिया के 193 देशों का आकलन किया गया था। भारत हर पैमाने में पीछे था। वहां औरतों के स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति सबसे खराब थी। सवाल अब ये उठता है कि कब जाकर भारत में महिलाओं की स्थिती में हदलाव होंगे। सरकार एक तरफ महिला सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं की सुरक्षा ही एक बड़ा सवाल बन रहा है। महिलाओं की स्थिति बदली है, मगर अभी भी इसमें सुधार की जरूरत है। समाज की सोच बदलनी होगी। आज भी समाज में जेंडर एक बड़ा मुद्दा है। महिलाओं की सुरक्षा की बात यह साबित करती है कि हम संवेदनशील नहीं हो सके हैं।

ज्वलंत मुद्दाः स्कूल खुलने के बाद क्यों ठप हो रही बच्चों की पढ़ाई?

लॉकडाउन में देश की अर्थव्यवस्था के साथ बच्चों के भविष्य पर भी भारी असर पड़ा है। सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा का लाभ बहुत ही कम बच्चों को मिल सकी है। नई दिल्लीः कोरोना काल के कारण बच्चों की शिक्षा पर भी काफी असर पड़ा है। लॉकडाउन लगने के बाद पढ़ाई-लिखाई का ऑनलाइन का फायदा गांव में सिर्फ कुछ ही बच्चों को मिल पा रहा है। वहीं अब कई जगहों पर स्कूल भी खोल दिए गए हैं। जिसकी वजह से उन बच्चों की पढ़ाई पर काफी असर देखने को मिल रहा है, जो घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई करना चाहते हैं। सरकारी स्कूलों में 25 से 30 प्रतिशत बच्चों को ही वर्तमान में ऑनलाइन पढ़ाई का मिल पा रहा है। जब स्कूलों में शिक्षकों को बुलाया जाने लगा तो व्हाट्सएप ग्रुपों पर निष्क्रिय हो गए। कुछ शिक्षक व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाई करा रहे हैं लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है।

ज्वलंत मुद्दाः नई शिक्षा नीति 2020- आखिर क्यों पड़ी इसकी जरूरत

भारत में लंबे समय के बाद शिक्षा नीति में बड़े बदलाव किए गए हैं। इस नीति में बदलाव के बाद अब ये सवाल खड़े हो रहे हैं कि इस बदलाव की क्यों जरूरत पड़ी और क्या खास है इस नई नीति में.. नई दिल्लीः देश में मौजूदा शिक्षा नीति को अंतिम बार 1992 में अपडेट किया गया था। इस नीति का उद्देश्य स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा को तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षाओं को दायरे में लाना है। छात्र को बचपन से ही उसके हुनर और दिलचस्पी के हिसाब शिक्षा देना है। ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ साथ किसी लाइफ स्‍क‍िल से सीधा जोड़ा जा सके। ऐसा माना जा रहा है कि देश में रट्टू तोते वाली शिक्षा व्यवस्था से पढाई करने पर बच्चों को शिक्षा से लाभ मिलना बंद हो जाता है। यही कारण है कि भारत में समय समय पर शिक्षा नीति को बदला जाता रहा है। अभी तक हमारे देश में स्कूली पाठ्यक्रम 10+2 के हिसाब से चलता है लेकिन अब नई शिक्षा नीति में इसे खत्म कर 5+ 3+ 3+ 4 के फार्मेट को मंजूरी दी गयी है। जिसका मतलब प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, फिर तीसरी से पांचवीं तक दूसरा हिस्सा, छठी से आठवीं तक तीसरा हिस्सा और नौंवी से 12 तक आखिरी हिस्सा होगा।