जॉब इंटरव्यू से नेटवर्किंग तक: ये 7 सेकंड बना सकते हैं आपको सक्सेसफुल प्रोफेशनल

New Delhi: आज की तेज-तर्रार प्रोफेशनल दुनिया में हर किसी के पास समय की भारी कमी है। जॉब इंटरव्यू हो, क्लाइंट मीटिंग या फिर कोई नेटवर्किंग इवेंट लोग आपके बारे में राय बनाने में ज्यादा वक्त नहीं लगाते। मनोवैज्ञानिकों और करियर एक्सपर्ट्स के अनुसार, किसी भी नए व्यक्ति को आंकने में हमारा दिमाग औसतन केवल 7 सेकंड लेता है। यही 7 सेकंड ‘फर्स्ट इंप्रेशन’ का गोल्डन रूल कहलाता है। इन शुरुआती पलों में आपकी डिग्री, स्किल्स या सालों का अनुभव सामने नहीं आता, बल्कि आपकी पर्सनालिटी, कॉन्फिडेंस और प्रोफेशनल अपील बिना शब्दों के बोलती है। यह समय खुद को साबित करने का नहीं, बल्कि खुद को सही तरीके से प्रस्तुत करने का होता है। अगर इन 7 सेकंड में आप भरोसा और पॉजिटिविटी जगा पाए, तो बातचीत का बाकी हिस्सा आपके लिए आसान हो जाता है। नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन की ताकत फर्स्ट इंप्रेशन का खेल ज्यादातर नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन पर टिका होता है। आपका पहनावा, चलने का तरीका, मुस्कान, आई कॉन्टैक्ट और यहां तक कि आपकी एक्सेसरीज भी एक मजबूत संदेश देती हैं। ये सभी फैक्टर मिलकर सामने वाले के दिमाग में आपकी एक इमेज बना देते हैं या तो एक प्रोफेशनल और भरोसेमंद व्यक्ति की, या फिर एक अनतैयार और लापरवाह इंसान की। वेशभूषा: भरोसे की पहली सीढ़ी शुरुआती 7 सेकंड में कपड़े सबसे पहले नोटिस किए जाते हैं। प्रेस किए हुए, साफ-सुथरे और सही फिटिंग वाले कपड़े प्रोफेशनलिज्म दिखाते हैं। इंडस्ट्री के हिसाब से नेवी ब्लू, ग्रे और ब्लैक जैसे गहरे रंग गंभीरता और आत्मविश्वास का संकेत देते हैं। जूते पॉलिश किए हुए हों और एक्सेसरीज सीमित व क्लासिक ये छोटी बातें बड़ा असर डालती हैं। बॉडी लैंग्वेज सीधे खड़े या बैठे रहना, कंधों को पीछे रखना और सिर ऊपर रखना आत्मविश्वास का प्रतीक है। इसके उलट झुकी हुई मुद्रा असुरक्षा दर्शाती है। बातचीत के दौरान बार-बार हाथ-पैर हिलाना या बालों से खेलना घबराहट दिखाता है, जिससे बचना जरूरी है। आई कॉन्टैक्ट और स्माइल सामने वाले की आंखों में देखकर बात करना यह दिखाता है कि आप ईमानदार और अटेंटिव हैं। वहीं हल्की और स्वाभाविक मुस्कान माहौल को सहज बनाती है। यह आपको फ्रेंडली और अप्रोचेबल बनाती है, जो किसी भी प्रोफेशनल मीटिंग में फायदेमंद है। हैंडशेक और आवाज का असर आमने-सामने की मुलाकात में हैंडशेक अब भी अहम है। न बहुत ढीला, न बहुत कड़ा संतुलित हैंडशेक आत्मविश्वास और सम्मान दोनों दिखाता है। साथ ही आपकी आवाज का टोन साफ, शांत और मध्यम पिच का होना चाहिए। पहला परिचय छोटा लेकिन स्पष्ट रखें। बारीकियां जो फर्क डालती हैं साफ-सुथरे नाखून, सलीके से सेट किए बाल और हल्की खुशबू आपकी पर्सनालिटी को निखारती है। जरूरत से ज्यादा तेज परफ्यूम नेगेटिव असर भी डाल सकता है। साथ ही आपका पोर्टफोलियो या नोटबुक भी व्यवस्थित होनी चाहिए। कुल मिलाकर ये 7 सेकंड आपके करियर की दिशा तय कर सकते हैं। अगर आपने इन पलों में खुद को सही ढंग से प्रस्तुत कर लिया, तो आधी जंग वहीं जीत ली समझिए।
छात्र बार-बार पढ़ा हुआ भूल रहे? ये साइंटिफिक स्टडी टेक्निक्स बदल देंगी आपकी तैयारी

New Delhi: आज के सोशल मीडिया युग में छात्रों के लिए पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई करना चुनौती बन गया है। मोबाइल नोटिफिकेशन, मल्टीटास्किंग और लगातार बदलती डिजिटल आदतें स्टूडेंट्स के फोकस को प्रभावित कर देती हैं। कई छात्र पढ़ाई तो शुरू करते हैं, लेकिन कुछ देर बाद ही पढ़ा हुआ भूल जाते हैं और दोबारा मन लगाने में दिक्कत महसूस करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण है पढ़ाई में एकाग्रता की कमी। ऐसे में अगर आप भी किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और पढ़ते समय ध्यान भटकता है, तो कुछ साइंटिफिक तकनीकें आपके लिए बेहद कारगर साबित हो सकती हैं। मल्टीटास्किंग को कहें ‘ना’ अक्सर देखा गया है कि छात्र एक साथ कई काम करने की कोशिश करते हैं जैसे पढ़ाई के साथ सोशल मीडिया चलाना या संगीत सुनना। अध्ययन बताते हैं कि मल्टीटास्किंग ब्रेन की सूचना प्रोसेसिंग क्षमता को कम कर देती है और ध्यान बार-बार भटकता है। इसलिए पढ़ाई के दौरान केवल एक ही विषय पर फोकस करें। यह तरीका न केवल एकाग्रता बढ़ाता है, बल्कि याददाश्त को भी मजबूत बनाता है। पोमोडोरो टेक्निक अपनाएं पढ़ाई में मन लगाने और मानसिक थकान को रोकने के लिए पोमोडोरो टेक्निक बहुत प्रभावी मानी जाती है। इस तकनीक में 30–40 मिनट लगातार पढ़ने के बाद 5 मिनट का छोटा ब्रेक लिया जाता है। ये छोटे-छोटे ब्रेक ब्रेन को रेस्ट देते हैं और दोबारा ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं। खास बात यह है कि यह तकनीक लंबे समय तक पढ़ाई को आसान और प्रभावी बनाती है। माइंड मैपिंग से याददाश्त बढ़ाएं माइंड मैपिंग एक विजुअल लर्निंग तकनीक है, जो जटिल विषयों को सरल और यादगार बनाती है। किसी भी टॉपिक को चित्रों, रंगों और आरेखों की मदद से नोट करना ब्रेन के विजुअल सेक्शन को एक्टिव करता है। यह तरीका न केवल फोकस बढ़ाता है, बल्कि रिविजन को भी आसान बनाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह तकनीक बेहद उपयोगी है। खुद का ध्यान रखना भी जरूरी पढ़ाई की तकनीकों जितनी महत्वपूर्ण हैं, उतना ही जरूरी है अपने शरीर और दिमाग का ध्यान रखना। गलत डाइट और नींद की कमी एकाग्रता को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार डाइट में फल, डार्क चॉकलेट और नट्स जैसे ब्रेन-बूस्टिंग फूड्स शामिल करने चाहिए। साथ ही रोजाना 7–8 घंटे की नींद लेना जरूरी है। नींद की कमी से फोकस कमजोर होता है और पढ़ा हुआ लंबे समय तक याद नहीं रहता। फ्लैशकार्ड बनाकर पढ़ाई को मज़बूत करें हाल के वर्षों में फ्लैशकार्ड टेक्निक छात्रों के बीच बहुत लोकप्रिय हुई है। इस तकनीक में महत्वपूर्ण बिंदुओं को छोटे कार्ड में लिखकर किताबों या नोटबुक में लगा दिया जाता है। यह तरीका रिविजन को तेज, आसान और लंबे समय तक याद रखने में सक्षम बनाता है। खासकर साइंस, जीके और भाषाओं की तैयारी के लिए यह तकनीक बेहद प्रभावी है।
Career Tips: इन 7 इंजीनियरिंग कोर्सों में करियर बनाएं और पाएं लाखों की सैलरी

New Delhi: इंजीनियरिंग एक ऐसा क्षेत्र है, जो लगातार नई तकनीकों और विकास के साथ बदलता रहता है। आज के समय में इंजीनियरिंग के कई क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं, जिनमें विशेषज्ञता की मांग और सैलरी पैकेज दोनों ही ज्यादा हैं। यदि आप एक इंजीनियरिंग छात्र हैं और अच्छे भविष्य की तलाश कर रहे हैं, तो आपको सबसे ज़्यादा डिमांडिंग इंजीनियरिंग कोर्सों के बारे में जानना जरूरी है। ये कोर्स आपको एक हाई लेवल पैकेज और एक अच्छी नौकरी दिलाने में मदद करेगी। चलिए फिर एक-एक करके सभी कोर्स के बारे में जानते हैं। 1. कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग (CSE) एक ऐसा कोर्स है जो हर साल अधिक से अधिक छात्रों को आकर्षित कर रहा है। यह कोर्स आपको सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे उभरते हुए क्षेत्रों में विशेषज्ञता देता है। सैलरी पैकेज की बात करें तो, सीएसई के इंजीनियरों को भारत में औसतन 8-20 लाख रुपए तक की सैलरी मिलती है। प्रमुख कंपनियां जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न यहां बड़े पैमाने पर भर्ती करती हैं। 2. इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (EEE) कोर्स भी हमेशा से एक बेहतरीन करियर विकल्प रहा है। यह कोर्स आपको पावर सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस और सर्किट डिज़ाइन में गहरी जानकारी प्रदान करता है। इस क्षेत्र में अच्छे सैलरी पैकेज की संभावनाएं बहुत अधिक हैं और टॉप कंपनियों जैसे ABB, Siemens और Honeywell इसमें हायरिंग करती हैं। सैलरी पैकेज 6-15 लाख रुपए प्रति वर्ष तक हो सकता है। 3. मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आजकल, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI/ML) इंजीनियरिंग कोर्स की डिमांड बहुत बढ़ गई है। यह कोर्स उन छात्रों के लिए है जो डेटा साइंस और सॉफ़्टवेयर इंजीनियरिंग में रुचि रखते हैं। AI और ML के इंजीनियर दुनिया के सबसे ज़्यादा सैलरी पाने वाले पेशेवरों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सैलरी 10-30 लाख रुपए तक पहुंच सकती है और बहुत सारी कंपनियां इस क्षेत्र में नए स्टार्टअप्स और प्रौद्योगिकियों पर काम कर रही हैं। 4. सिविल इंजीनियरिंग सिविल इंजीनियरिंग भारत के सबसे पुरानी और लोकप्रिय इंजीनियरिंग शाखाओं में से एक है। इस क्षेत्र में काम करने वाले इंजीनियरों की डिमांड अभी भी बहुत अधिक है, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में। प्रमुख कंपनियों में L&T, DLF और TATA Projects शामिल हैं। यहां सैलरी 6-12 लाख रुपए प्रति वर्ष तक होती है, लेकिन अनुभव बढ़ने पर यह पैकेज और भी बढ़ सकते हैं। 5. केमिकल इंजीनियरिंग केमिकल इंजीनियरिंग भी एक अच्छा करियर विकल्प हो सकता है, खासकर उन छात्रों के लिए जो रासायनिक प्रक्रियाओं और उत्पादन के प्रति रुचि रखते हैं। इस क्षेत्र में कार्यरत कंपनियां जैसे Reliance, IOCL और BPCL उच्च सैलरी पैकेज की पेशकश करती हैं। औसतन सैलरी 7-15 लाख रुपए प्रति वर्ष होती है। 6. बायोटेक्नोलॉजी बायोटेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग करियर के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। यह कोर्स आपको चिकित्सा, कृषि और पर्यावरण के क्षेत्रों में काम करने का अवसर प्रदान करता है। बायोटेक्नोलॉजी इंजीनियरों के लिए सैलरी 8-18 लाख रुपए प्रति वर्ष तक हो सकती है और कई कंपनियां इस क्षेत्र में रिसर्च और विकास के लिए छात्रों को हायर करती हैं। 7. रोबोटिक्स इंजीनियरिंग रोबोटिक्स इंजीनियरिंग एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसमें आप रोबोट डिजाइन, निर्माण और संचालन से जुड़े कौशल प्राप्त करते हैं। इस क्षेत्र में सैलरी पैकेज 8-20 लाख रुपए तक हो सकता है। प्रमुख कंपनियां जैसे Boston Dynamics और iRobot इस क्षेत्र में काम कर रही हैं।
अमेरिका में तेजी से बढ़ रही ये 5 नौकरियां, डॉक्टर-इंजीनियर नहीं हैं टॉप पर

New Delhi: अमेरिका की सरकारी एजेंसी Bureau of Labor Statistics (BLS) ने 2024–34 तक की जॉब रिपोर्ट जारी करते हुए उन नौकरियों की सूची पेश की है जिनकी मांग अगले दशक में तेजी से बढ़ेगी। इस रिपोर्ट की खास बात यह है कि टॉप ग्रोथ वाली नौकरियों में न डॉक्टर शामिल हैं और न ही पारंपरिक इंजीनियरिंग प्रोफेशन। यह संकेत देता है कि अमेरिका में करियर का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और स्किल-आधारित नौकरियों की मांग बढ़ रही है। नई टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी और डेटा-ड्रिवन इंडस्ट्रीज़ के बढ़ते उपयोग ने ऐसे करियर बनाए हैं जिनके लिए लंबी डिग्री की जरूरत नहीं पड़ती। भारतीय युवाओं के लिए यह रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन प्रोफेशन में स्किल्ड वर्कफोर्स की कमी है और 1–2 साल की ट्रेनिंग भी अच्छी कमाई दिला सकती है। पवन टरबाइन सेवा तकनीशियन BLS रिपोर्ट में सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रोफेशन पवन टरबाइन सेवा तकनीशियन बताया गया है। इस नौकरी में बड़े पवन टरबाइनों की जांच, मरम्मत और नियमित मेंटेनेंस शामिल होता है। अमेरिका में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे इस प्रोफेशन की मांग में विस्फोटक बढ़ोतरी हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार इसकी ग्रोथ लगभग 50% है और सालाना कमाई करीब 60,000 डॉलर तक पहुंचती है। इस नौकरी के लिए 1–2 साल का डिप्लोमा या टेक्निकल ट्रेनिंग पर्याप्त होती है, जिससे यह बजट-फ्रेंडली करियर ऑप्शन बन जाता है। आने वाले समय में अमेरिका का ग्रीन एनर्जी मार्केट और बढ़ने वाला है, जिससे इस सेक्टर में नौकरियां लगातार बढ़ेंगी। सोलर पैनल इंस्टॉलर दूसरा बड़ा करियर सोलर पैनल इंस्टॉलर है। अमेरिका के कई राज्य तेजी से क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ रहे हैं, जिसके कारण सोलर इंस्टॉलेशन से संबंधित नौकरियों की मांग तेजी से बढ़ी है। इस नौकरी में घरों और कमर्शियल बिल्डिंग्स पर सोलर पैनल इंस्टॉल करना और उनका मेंटेनेंस करना शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी ग्रोथ 40% से भी अधिक है और सालाना सैलरी लगभग 50,000 डॉलर मिलती है। सोलर इंस्टॉलेशन सर्टिफिकेट और बेसिक ट्रेनिंग इस करियर में प्रवेश के लिए पर्याप्त हैं। क्लीन एनर्जी मिशन को देखते हुए यह नौकरी आने वाले वर्षों में और भी स्थिर और सुरक्षित मानी जा रही है। नर्सिंग विशेषज्ञ अमेरिका का हेल्थकेयर सेक्टर दुनिया के सबसे बड़े सेक्टरों में से है और इसमें Nurse Practitioner (NP) की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। ये पेशेवर मरीजों की जांच, इलाज और कई मामलों में दवाओं का प्रिस्क्रिप्शन भी देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार इसकी ग्रोथ लगभग 40% है और सैलरी 120,000 डॉलर से भी ऊपर पहुंच जाती है। अमेरिका में बढ़ती बुजुर्ग आबादी और डॉक्टरों की कमी इसे और भी अहम बनाती है। इस करियर के लिए BSN के बाद MSN या NP स्पेशलाइजेशन की आवश्यकता होती है। हेल्थकेयर में लगातार बढ़ती जरूरत इसे आने वाले वर्षों में स्थिर और उच्च-आय वाला करियर बनाती है। डेटा वैज्ञानिक डिजिटल दुनिया में डेटा को नया ईंधन माना जाता है और इसी वजह से डेटा साइंटिस्ट की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह पेशेवर कंपनियों के लिए डेटा एनालिसिस, AI-ML मॉडल और बिजनेस सॉल्यूशन्स पर काम करते हैं। रिपोर्ट में इसकी ग्रोथ 34% बताई गई है और सैलरी 1 लाख डॉलर से अधिक होती है। डेटा साइंस, कंप्यूटर साइंस, B.Tech या ऑनलाइन सर्टिफिकेट भी इस करियर में प्रवेश कराने में मदद कर सकते हैं। AI, बिग डेटा और मशीन लर्निंग की बढ़ती उपयोगिता के कारण डेटा साइंटिस्ट की भूमिका भविष्य में और भी मजबूत होगी। साइबर सुरक्षा विश्लेषक ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर हमलों में तेजी से बढ़ोतरी होने के कारण सूचना सुरक्षा विश्लेषक या साइबर सिक्योरिटी एनालिस्ट की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ रही है। ये एक्सपर्ट कंपनियों के नेटवर्क की सुरक्षा, साइबर अटैक रोकने और सिस्टम की खामियों को पहचानने का काम करते हैं। BLS रिपोर्ट के अनुसार इसकी ग्रोथ 29% है और सालाना सैलरी लगभग 110,000 डॉलर तक पहुंचती है। साइबर सिक्योरिटी, Ethical Hacking, CEH और CompTIA Security+ जैसे कोर्स इस करियर के लिए बेहद उपयोगी हैं। बढ़ते साइबर अटैक इसे भविष्य का सबसे सुरक्षित और उच्च-आय वाला करियर बनाते हैं।
छात्रों के लिए साइंटिफिक तरीके: पढ़ाई में ध्यान लगाने और एकाग्रता बढ़ाने के 5 प्रभावी उपाय

New Delhi: सोशल मीडिया और मल्टीटास्किंग के बढ़ते प्रभाव के चलते छात्रों के लिए अपनी पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखना एक चुनौती बन गया है। हालांकि, कुछ छात्र पूरी एकाग्रता से पढ़ाई करते हैं, लेकिन अधिकांश का ध्यान बार-बार भटक जाता है, जिससे उनका अध्ययन प्रभावी नहीं हो पाता। अगर आप भी प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और पढ़ाई में मन नहीं लग पा रहा है, तो यहां कुछ साइंटिफिक तरीके बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी एकाग्रता को बढ़ा सकते हैं और बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। ये है साइंटिफिक स्टडी फोकस टेक्निक 1. मल्टीटास्किंग से बचेंकई छात्र एक समय में एक से अधिक काम करते हैं, जैसे कि पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया चेक करना। यह आपके ध्यान को भटकाता है और आपकी एकाग्रता कम करता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रहे, तो सिर्फ एक विषय पर फोकस करें। 2. पोमोडोरो टेक्निक का प्रयोग करेंयह एक बेहद कारगर तरीका है, जिसमें आप 30 से 40 मिनट तक पूरी एकाग्रता से पढ़ाई करते हैं और फिर 5 मिनट का ब्रेक लेते हैं। यह छोटा ब्रेक आपको ब्रेन आउट से बचने में मदद करता है और आपकी ऊर्जा को बनाए रखता है। 3. माइंड मैपिंग टेक्निक अपनाएंमाइंड मैपिंग एक तकनीक है जिसमें आप महत्वपूर्ण जानकारी को चित्रों और शॉर्ट नोट्स के जरिए व्यवस्थित करते हैं। यह तकनीक एकाग्रता को बढ़ाती है और कठिन विषयों को समझने में मदद करती है। 4. खुद का ख्याल रखेंशारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ब्रेन बूस्टिंग फूड्स जैसे फल, डार्क चॉकलेट और नट्स का सेवन करें, और हर दिन 7-8 घंटे की नींद लें। इससे आपका मानसिक विकास होगा और पढ़ाई में बेहतर ध्यान लग पाएगा। 5. फ्लैशकार्ड बनाएंफ्लैशकार्ड्स एक बेहतरीन तरीका है महत्वपूर्ण बिंदुओं को याद रखने का। यह तरीका आपके लिए रिविजन को आसान बनाता है और परीक्षा में जल्दी रिविजन करने में मदद करता है। इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर आप अपनी पढ़ाई को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं और बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
CBSE 10th-12th Exam 2026: 17 फरवरी से शुरू होंगी बोर्ड परीक्षाएं, जानें कैसे बनाएं परफेक्ट रिवीजन प्लान

New Delhi: जैसा कि आप जानते हैं कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सत्र 2025-26 की 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षाओं की फाइनल डेटशीट जारी कर दी है और अब छात्रों का पूरा ध्यान तैयारी और रिवीजन स्ट्रेटजी पर केंद्रित हो गया है। 17 फरवरी 2026 से बोर्ड परीक्षाओं का आगाज़ होगा और लाखों विद्यार्थी अपनी मेहनत को अंजाम देने की तैयारी में जुट गए हैं। इस बार बोर्ड ने छात्रों को पहले से ही पर्याप्त समय दिया है ताकि वे हर विषय की योजना बनाकर तैयारी कर सकें। अब सवाल यह है कि इस बचे हुए समय में कौन-सी स्ट्रेटजी अपनाई जाए जिससे अच्छे अंक हासिल किए जा सकें? कैसे करें तैयारी ? सीबीएसई के अनुसार, इस बार परीक्षाएं 17 फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच आयोजित की जाएंगी। डेटशीट जारी होते ही छात्रों के पास अब लगभग तीन महीने से ज़्यादा का समय है, जिसे सही योजना के साथ इस्तेमाल करना बेहद ज़रूरी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय को तीन फेज़ में बांटना चाहिए। 1. Concept Revision (दिसंबर तक)2. Mock Test & Sample Papers (जनवरी तक)3. Final Polishing & Weak Areas Revision (फरवरी की शुरुआत तक) टॉप तैयारी टिप्स कक्षा 10वीं के छात्र पहली बार बोर्ड का सामना करते हैं, इसलिए उनका आत्मविश्वास और समय प्रबंधन दोनों बेहद अहम हैं। ऐसे में छात्र नीचे दिए गए टिप्स पर काम कर सकते हैं। जैसे- 1. हर दिन 3 घंटे कोर सब्जेक्ट्स (Maths, Science, English) को दें।2. हर सप्ताह एक सैंपल पेपर हल करें ताकि पेपर पैटर्न की आदत बने।3. जिन विषयों में अंक कम आते हैं, उन्हें अब “डेली रिवीजन लिस्ट” में शामिल करें।4. एनसीईआरटी किताबों के ‘इन-टेक्स्ट क्वेश्चन्स’ और ‘एक्सरसाइज क्वेश्चन्स’ को बार-बार दोहराएं।5. अंतिम 15 दिनों में केवल रिवीजन और पिछले साल के प्रश्नपत्र हल करें। कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए स्मार्ट टाइम टेबल कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए समय की कीमत और भी ज्यादा है क्योंकि ये अंक कॉलेज एडमिशन में अहम भूमिका निभाते हैं। आदर्श टाइम टेबल1. सुबह (5–8 बजे): कठिन विषय या फिजिक्स/मैथ्स की थियोरी2. दोपहर (1–3 बजे): सैंपल पेपर या प्रैक्टिकल सब्जेक्ट्स की प्रैक्टिस3. शाम (6–9 बजे): रिवीजन + महत्वपूर्ण नोट्स की दोहराई4. रविवार: फुल लेंथ मॉक टेस्ट और पेपर एनालिसिस इसके अलावा, छात्रों को सलाह दी गई है कि वे ऑनलाइन रिवीजन टेस्ट, CBSE सैंपल पेपर और पिछले वर्षों के पेपर का अभ्यास जरूर करें। आखिरी महीनों में क्या करें और क्या नहीं क्या करें (DO’s)1. टाइम मैनेजमेंट पर ध्यान दें, हर विषय को रोजाना थोड़ा समय दें।2. हेल्दी रूटीन अपनाएं संतुलित भोजन, नींद और हल्का एक्सरसाइज़ रखें।3. गलतियों का रिकॉर्ड बनाएं और उन्हें दोबारा रिपीट न करें।4. अपने टीचर्स से डाउट्स क्लियर करें। क्या न करें (DON’T’s)1. नई किताबें या नोट्स अब शुरू न करें।2. सोशल मीडिया पर ज्यादा समय न बिताएं।3. आखिरी समय में ‘रटने’ की कोशिश न करें, समझकर पढ़ें। सीबीएसई डेटशीट 2026 कक्षा 10वीं की परीक्षा: 17 फरवरी 2026 सेकक्षा 12वीं की परीक्षा: 17 फरवरी 2026 सेपरीक्षाओं का समापन: अप्रैल 2026 तकऑफिशियल वेबसाइट: cbse.gov.inएडमिट कार्ड: जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में जारी होने की संभावना मोटिवेशनल नोट शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अब छात्रों को “कितना पढ़ा” पर नहीं, बल्कि “कैसे पढ़ा” पर ध्यान देना चाहिए।रोजाना छोटे-छोटे लक्ष्य तय करें और उन्हें पूरा करें। आत्मविश्वास बनाए रखें क्योंकि बोर्ड परीक्षा में सबसे बड़ा हथियार सेल्फ-बिलीफ ही है।
भारत या जापान: किस देश में काम करने का तरीका है ज्यादा आरामदायक?

New Delhi: जापान और भारत दोनों देशों की कार्य संस्कृति अपनी-अपनी ऐतिहासिक और सामाजिक जड़ों से गहरे प्रभावित हैं। हालांकि दोनों देशों की कार्य संस्कृति में समानताएं हैं, लेकिन उनका दृष्टिकोण, काम करने का तरीका और मूल्य प्रणाली में काफी अंतर हैं। आइए फिर जानते हैं कि दोनों देशों की कार्य संस्कृति में क्या अंतर है और कौन सबसे ज्यादा बेहतर है। निर्णय लेने की प्रक्रिया जापान: जापान में निर्णय लेने की प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है और यह सर्वसम्मति पर आधारित होती है, जिसे Nemawashi कहा जाता है। किसी भी निर्णय को लागू करने से पहले सभी की सहमति सुनिश्चित की जाती है। इस प्रक्रिया में समय लगता है, लेकिन यह एक सशक्त और स्थिर निर्णय सुनिश्चित करता है। भारत: भारत में निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक केंद्रीयकृत होती है। निर्णय अक्सर टॉप मैनेजमेंट या व्यक्तिगत नेता द्वारा जल्दी लिया जाता है। यह प्रणाली तेज़ है, लेकिन कभी-कभी प्रभावी निर्णय लेने में कमी हो सकती है। काम के घंटे और लीव पॉलिसी जापान: जापानी कार्य संस्कृति में अत्यधिक काम के घंटे और समर्पण को महत्व दिया जाता है। कर्मचारी अक्सर छुट्टी लेने से कतराते हैं, जो कि कारोशी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। कारोशी का अर्थ है अत्यधिक काम करने से मृत्यु या स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं। भारत: भारत में भी काम के घंटे लंबे हो सकते हैं, लेकिन यहां छुट्टियों का इस्तेमाल करने में कर्मचारी ज्यादा सहज होते हैं। भारतीय कार्यस्थल पर काम के घंटे भले ही लंबे हों, लेकिन कर्मचारियों को लचीलापन और छुट्टियों का अधिक लाभ मिलता है। संचार शैली जापान: जापान में संचार शैली काफी इनडायरेक्ट होती है और यह संदर्भ (Context) पर निर्भर करती है। सीधे न कहना यहाँ सामान्य नहीं होता, जिससे बाहरी लोगों के लिए संदेश समझना मुश्किल हो सकता है। यहां बिना शब्दों के ही बहुत कुछ कह दिया जाता है। भारत: भारत में संचार शैली ज्यादा डायरेक्ट होती है। यहां पर कर्मचारी स्पष्ट और प्रभावी तरीके से अपनी बात रखते हैं और औपचारिकता को ध्यान में रखते हुए संवाद करते हैं। क्वॉलिटी पर फोकस जापान: जापान में परफेक्शन और जीरो डिफेक्ट्स पर ज्यादा जोर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को Kaizen कहा जाता है, जो निरंतर सुधार और गुणवत्ता में वृद्धि की मानसिकता को दर्शाता है। भारत: भारत में भी गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता है, लेकिन यहां पर काम की गति और समय पर डिलीवरी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
कैसे करें टॉपर्स की तरह पढ़ाई? 90/20 नियम अपनाकर आप भी जरूर हो जाएंगे सफल

New Delhi: आज के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए छात्रों को सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि सही अध्ययन तकनीक की भी आवश्यकता होती है। कुछ टॉपर्स ऐसी विधियों का पालन करते हैं, जो उनके मानसिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। एक ऐसी प्रभावी तकनीक है, जिसे आजकल दुनिया भर के छात्र और पेशेवर 90/20 नियम के रूप में अपना रहे हैं। इस तकनीक को अपनाकर आप भी अपनी पढ़ाई और काम में बेहतर उत्पादकता प्राप्त कर सकते हैं। 90/20 नियम क्या है? 90/20 नियम के अनुसार, किसी भी काम को या पढ़ाई को 90 मिनट तक पूरी तरह से फोकस करके करना चाहिए और इसके बाद 20 मिनट का ब्रेक लेना चाहिए। यह विधि मस्तिष्क के प्राकृतिक चक्र यानी अल्ट्राडियन रिद्म्स पर आधारित है, जो बताता है कि दिमाग की मानसिक स्थिति दिनभर के दौरान उच्च और निम्न के बीच बदलती रहती है। मस्तिष्क एक उच्च फोकस स्थिति में काम करता है और फिर थकान को कम करने के लिए उसे आराम की आवश्यकता होती है। अल्ट्राडियन रिद्म्स का महत्व अल्ट्राडियन रिद्म्स मस्तिष्क की जैविक लय है, जो दिनभर दोहराई जाती है। इस लय में लगभग 90-120 मिनट का चक्र होता है, जिसमें मस्तिष्क उच्च ध्यान और फोकस में काम करता है। फिर 20 मिनट के ब्रेक के बाद मस्तिष्क अपनी गति को धीमा कर लेता है, जिससे थकान और मानसिक दबाव कम होता है। यह विधि शारीरिक रूप से भी लाभकारी है, क्योंकि इसे अपनाने से शरीर और मस्तिष्क दोनों को आराम मिलता है, जो मानसिक थकान को कम करता है। पेशेवरों में भी प्रभावी यह 90/20 विधि केवल छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि पेशेवरों में भी इसका पालन किया जाता है। मनोवैज्ञानिक एंडर्स एरिकसन ने शीर्ष वायलिनवादकों के अध्ययन में पाया कि वे 90 मिनट अभ्यास के बाद विश्राम करते थे। इस तरीके से उन्होंने 40% अधिक उत्पादकता और 50% कम मानसिक थकान पाई। यह साबित करता है कि सही तकनीक का पालन करके कोई भी व्यक्ति अपने मानसिक प्रदर्शन में सुधार कर सकता है। कैसे अपनाएं 90/20 विधि 90/20 विधि को अपनाने के लिए छात्रों और पेशेवरों को अपनी ऊर्जा के पैटर्न को समझना जरूरी है। इस प्रक्रिया को तीन आसान कदमों में अपनाया जा सकता है- ऊर्जा और ध्यान पैटर्न नोट करें: पहले खुद को समझें कि आपके ध्यान और ऊर्जा का स्तर कब उच्च होता है और कब कम। महत्वपूर्ण कार्यों को उच्च फोकस समय में रखें: जब आपका ध्यान सबसे अधिक होता है, उस समय महत्वपूर्ण कार्य करें। ब्रेक लें और डिवाइस-फ्री रहें: 20 मिनट के ब्रेक के दौरान हल्की सैर करें, स्ट्रेचिंग करें या प्रकृति में समय बिताएं। स्क्रीन से दूर रहें। नोट करने योग्य बातें अगर आप जंभाई लेने लगते हैं या मानसिक थकान महसूस करते हैं, तो यह संकेत है कि आपको ब्रेक लेने की जरूरत है। इस विधि के अनुसरण से न केवल आपकी पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि मानसिक थकान भी कम होगी।
नौकरी बचानी है? ये 5 टिप्स अपनाइए और बनिए अनरिप्लेसेबल!

New Delhi: आज का जॉब मार्केट पहले से कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धात्मक और अनिश्चित हो चुका है। सिर्फ नौकरी पाना ही नहीं, उसे लंबे समय तक बनाए रखना और उसमें ग्रोथ करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। टेक्नोलॉजी की रफ्तार, स्किल्स की बदलती मांग और तेजी से बदलते ट्रेंड्स ने जॉब प्रोफेशनल्स के सामने नया संकट खड़ा कर दिया है। लेकिन अगर आप चाहें, तो कुछ आसान लेकिन असरदार आदतों को अपनाकर न केवल नौकरी में टिके रह सकते हैं, बल्कि आगे भी बढ़ सकते हैं। नए कामों से दोस्ती कीजिए आज के दौर में केवल एक ही तरह का काम करने से काम नहीं चलेगा। अगर आप खुद को जॉब मार्केट में लंबे समय तक बनाए रखना चाहते हैं, तो मल्टी-स्किल बनना जरूरी है। नई जिम्मेदारियां लेना, अलग-अलग डिपार्टमेंट के प्रोजेक्ट्स में हिस्सा लेना और खुद को सीमित न रखकर वर्क-प्लेस पर लचीला बनना आपके करियर को मजबूती देगा। सीखने की आदत कभी न छोड़ें पढ़ाई सिर्फ कॉलेज तक सीमित नहीं होती। असली सीख तो तब शुरू होती है जब आप काम पर होते हैं। नए सॉफ्टवेयर सीखना, ऑनलाइन सर्टिफिकेशन कोर्स करना, या नई भाषा सीखना ये सभी चीजें आपके स्किल सेट को मजबूत बनाती हैं और आपके रिज्यूमे को दूसरों से बेहतर बनाती हैं। वक्त का सही इस्तेमाल करें समय प्रबंधन की कला जॉब सिक्योरिटी का एक मजबूत आधार है। टालमटोल की आदत आपके करियर की सबसे बड़ी दुश्मन है। हर काम को समय पर और प्रभावी तरीके से पूरा करने की आदत डालिए। छोटी-छोटी डेडलाइंस बनाकर काम को ब्रेक करना और प्रायोरिटी तय करना आपकी प्रोडक्टिविटी को बढ़ाएगा। बदलाव के लिए हमेशा तैयार रहें आज का कॉर्पोरेट वर्ल्ड “Change is the only constant” पर आधारित है। कंपनियों के ढांचे से लेकर उनकी जरूरतों तक, सब कुछ तेजी से बदल रहा है। ऐसे में एक ही स्किल या एक ही नौकरी पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। नए स्किल्स सीखते रहें, फ्रीलांसिंग, गिग इकॉनमी, रिमोट जॉब्स जैसे विकल्पों को एक्सप्लोर करें। सही जानकारी से बनाइए बढ़त अगर आप जानते हैं कि किस सेक्टर में ग्रोथ हो रही है, किस स्किल की मांग बढ़ रही है और कौन-सी कंपनियां हायरिंग कर रही हैं, तो आप बाकी लोगों से आगे रहेंगे। जॉब पोर्टल्स, लिंक्डइन, इंडस्ट्री न्यूज और प्रोफेशनल नेटवर्किंग से खुद को अपडेट रखिए। करियर में सही दिशा के लिए यह जानकारी अमूल्य होती है।
SSB इंटरव्यू के पांच दिन: यह जानें क्यों होते हैं उम्मीदवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण

New Delhi: एसएसबी (सर्विस सिलेक्शन बोर्ड) का इंटरव्यू भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में अफसर बनने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए एक बेहद कठिन और महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जाती है। यह परीक्षा पांच दिन तक चलती है और हर दिन की प्रक्रिया में उम्मीदवारों का मानसिक, शारीरिक और नेतृत्व क्षमता का परीक्षण किया जाता है। यह इंटरव्यू उन व्यक्तित्व लक्षणों और कौशलों पर आधारित होता है, जो एक सफल सैन्य अधिकारी में होने चाहिए। एसएसबी इंटरव्यू की प्रक्रिया एसएसबी इंटरव्यू की प्रक्रिया कुल पांच चरणों में विभाजित होती है, जिनमें से हर चरण के दौरान उम्मीदवारों की सोचने की क्षमता, शारीरिक क्षमता, आत्मविश्वास, नेतृत्व और चुनौतियों से निपटने का तरीका परखा जाता है। आइए जानते हैं कि एसएसबी इंटरव्यू के ये पांच दिन उम्मीदवारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण होते हैं। पहला दिन: स्क्रीनिंग टेस्ट एसएसबी इंटरव्यू का पहला दिन स्क्रीनिंग टेस्ट के रूप में होता है, जिसे दो भागों में विभाजित किया जाता है। पहले भाग में वर्बल (मौखिक) और नॉन-वर्बल (गैर-मौखिक) टेस्ट होते हैं, जो उम्मीदवारों की मानसिक क्षमता और तर्कशक्ति की जांच करते हैं। इस दिन के अंत में एक ग्रुप डिस्कशन (GD) भी होता है, जिसमें उम्मीदवारों की टीमवर्क और संवाद कौशल की परीक्षा ली जाती है। स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद, केवल उन उम्मीदवारों का चयन किया जाता है जो इस प्रारंभिक परीक्षण में सफलता प्राप्त करते हैं। दूसरा दिन: मनोविज्ञान टेस्ट दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण मनोविज्ञान टेस्ट होता है। इसमें उम्मीदवारों को कई मानसिक परीक्षणों से गुजरना होता है, जैसे कि थीमैटिक एपर्सेप्शन टेस्ट (टीएटी), जिसमें उन्हें 12 चित्रों पर आधारित कहानी लिखनी होती है। इसके बाद वर्ड एसोसिएशन टेस्ट (WAT) और सिचुएशन रिएक्शन टेस्ट (SRT) होते हैं। इन सभी परीक्षणों का उद्देश्य यह जानना होता है कि उम्मीदवार किसी स्थिति में किस तरह प्रतिक्रिया करता है और उनका मानसिक दृष्टिकोण क्या है। इसके बाद उम्मीदवारों से सेल्फ डिस्क्रिप्शन टेस्ट भी लिया जाता है, जिसमें उन्हें अपनी पहचान और व्यक्तित्व से संबंधित सवालों के उत्तर देने होते हैं। तीसरा दिन: शारीरिक परीक्षण और समूह कार्य तीसरे दिन, उम्मीदवारों के शारीरिक और मानसिक धैर्य का परीक्षण किया जाता है। इसमें ग्रुप डिस्कशन के अलावा ग्रुप ऑब्स्टेकल रेस (GOR) और प्रोग्रेसिव ग्रुप टास्क (PGT) होते हैं। इन कार्यों का उद्देश्य यह देखना होता है कि उम्मीदवार टीम में काम करने में सक्षम है या नहीं और वह चुनौतियों का सामना किस तरह करता है। यह प्रक्रिया उम्मीदवारों के सामूहिक प्रयास और नेतृत्व क्षमता का मूल्यांकन करती है। चौथा दिन: व्यक्तिगत साक्षात्कार चौथे दिन, सबसे महत्वपूर्ण और व्यक्तिगत चरण होता है व्यक्तिगत साक्षात्कार (Personal Interview)। इस दिन उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया जाता है, जिसमें उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता, पारिवारिक पृष्ठभूमि, शिक्षा और उनके जीवन के उद्देश्य के बारे में सवाल पूछे जाते हैं। इस साक्षात्कार के माध्यम से यह जाना जाता है कि उम्मीदवार में एक अधिकारी की आवश्यक विशेषताएं हैं या नहीं। यह चरण उम्मीदवार के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता की परीक्षा लेता है। पांचवां दिन: अंतिम चयन और मेडिकल परीक्षण पांचवे दिन, सभी अधिकारियों की बैठक होती है, जिसमें उम्मीदवारों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया जाता है। इस दिन चयनित उम्मीदवारों को मेडिकल परीक्षण के लिए बुलाया जाता है। अगर कोई उम्मीदवार मेडिकल परीक्षण में सफल होता है, तो उसे अंतिम रूप से चुना जाता है और उसके बाद उसे प्रशिक्षण के लिए भेज दिया जाता है।